ईरान युद्ध के बीच भारत के लिए बड़ी राहत, मौत के कुएं 'होर्मुज स्ट्रेट' को पार कर गुजरात पहुंचा पहला भारतीय LNG टैंकर 'दिशा'

ईरान युद्ध के बीच भारत के लिए बड़ी राहत। माल्टा के झंडे वाला भारतीय एलएनजी टैंकर 'दिशा' दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते 'होर्मुज स्ट्रेट' को सुरक्षित पार कर गुजरात के दाहेज पोर्ट पहुंच गया है।

Kashish Sain
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
June 19, 2026 • 11:51 AM  6
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ईरान युद्ध के बीच भारत के लिए बड़ी राहत, मौत के कुएं 'होर्मुज स्ट्रेट' को पार कर गुजरात पहुंचा पहला भारतीय LNG टैंकर 'दिशा'
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ईरान युद्ध के बीच भारत के लिए बड़ी राहत, मौत के कुएं 'होर्मुज स्ट्रेट' को पार कर गुजरात पहुंचा पहला भारतीय LNG टैंकर 'दिशा'

करीब साढ़े तीन महीने से जारी ईरान युद्ध और खाड़ी देशों में फैले भारी तनाव के बीच भारत के लिए एक बेहद बड़ी और राहत देने वाली खबर आई है। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के कंसोर्टियम द्वारा प्रबंधित और माल्टा के झंडे वाला विशालकाय एलएनजी (LNG) टैंकर 'दिशा' दुनिया के सबसे खतरनाक और संवेदनशील समुद्री रास्ते 'होर्मुज स्ट्रेट' को सुरक्षित पार करके शुक्रवार सुबह गुजरात के दाहेज पोर्ट पर पहुंच गया है।

गुजरात के भरूच बंदरगाह प्राधिकरण ने पुष्टि करते हुए बताया कि 'LNGC दिशा' सुबह दाहेज बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंच चुका है और फिलहाल यह पेट्रोनेट एलएनजी जेटी पर लंगर डाले खड़ा है। यह जहाज अपने साथ 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी का विशाल कार्गो लेकर आया है।

ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज पार करने वाला पहला भारतीय जहाज

28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले शुरू किए थे, तो ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण 'होर्मुज स्ट्रेट' को पूरी तरह बंद कर दिया था। इस वजह से खाड़ी देशों से होने वाली भारत की गैस आपूर्ति अधर में लटक गई थी।

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक शुरुआती समझौते (सीजफायर) के बाद, तेहरान ने 60 दिनों के लिए इस समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही को बिना किसी फीस के मंजूरी दी है। इस सीजफायर की घोषणा के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला 'दिशा' पहला भारतीय और शुरुआती वाणिज्यिक जहाजों में से एक बन गया है।

भारत के लिए क्यों लाइफलाइन है यह समुद्री रास्ता?

बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) के डायरेक्टर ओपेश कुमार शर्मा ने गुरुवार को ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि 15 जून को होर्मुज से निकला यह जहाज शुक्रवार तक गुजरात पहुंच जाएगा। भारत के लिए इस जहाज का सुरक्षित पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि:

  • गैस की भारी निर्भरता: भारत अपनी जरूरत की कुल प्राकृतिक गैस (Natural Gas) का लगभग 50 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात (Import) के जरिए पूरा करता है।

  • 65% आपूर्ति कतर से: इस कुल आयात का करीब 65 फीसदी हिस्सा कतर जैसे खाड़ी देशों से आता है, जिसके लिए जहाजों को 'होर्मुज स्ट्रेट' से होकर ही गुजरना पड़ता है।

टल गया देश पर मंडरा रहा बड़ा ऊर्जा संकट

अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता न होता और होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता, तो भारत में प्राकृतिक गैस की भारी किल्लत हो सकती थी, जिसका सीधा असर देश की बिजली, खाद और सीएनजी (CNG) आपूर्ति पर पड़ता। एलएनजी टैंकर 'दिशा' का सुरक्षित गुजरात पहुंचना भारतीय कूटनीति, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार के लिहाज से इस साल की सबसे बड़ी और सुखद खबरों में से एक है।

Kashish Sain

Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

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