इजराइल-लेबनान समझौते के खिलाफ बेरूत में प्रदर्शन, ईरान-अमेरिका तनाव भी बढ़ा... मध्य पूर्व में फिर बढ़ी हलचल

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'फेथ एंड फ्रीडम कोएलिशन' सम्मेलन में दावा किया कि उनके प्रशासन की कार्रवाई के बाद ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा।

Kashish Sain
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
June 27, 2026 • 11:20 AM  7
अ
अंतर्राष्ट्रीय
NEWS CARD
Logo
इजराइल-लेबनान समझौते के खिलाफ बेरूत में प्रदर्शन, ईरान-अमेरिका तनाव भी बढ़ा... मध्य पूर्व में फिर बढ़ी हलचल
“इजराइल-लेबनान समझौते के खिलाफ बेरूत में प्रदर्शन, ईरान-अमेरिका तनाव भी बढ़ा... मध्य पूर्व में फिर बढ़ी हलचल”
Favicon
Read more onthekhatak.com/s/f7b584
27 Jun 2026
https://thekhatak.com/s/f7b584
Google News
Copied
इजराइल-लेबनान समझौते के खिलाफ बेरूत में प्रदर्शन, ईरान-अमेरिका तनाव भी बढ़ा... मध्य पूर्व में फिर बढ़ी हलचल
🔴 Live Updates LIVE
1
Kashish Sain
4 months ago
Iran-US Conflict: सीजफायर के बाद फिर भड़की जंग, अमेरिका ने ईरान पर किए हवाई हमले... मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव
Iran-US Conflict: सीजफायर के बाद फिर भड़की जंग, अमेरिका ने ईरान पर किए हवाई हमले... मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान के खिलाफ करीब एक घंटे तक सैन्य कार्रवाई करते हुए मिसाइल-ड्रोन ठिकानों और तटीय रडार साइट्स पर हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने युद्धविराम (सीजफायर) का उल्लंघन किया था, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 25 जून को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में सिंगापुर के मालवाहक जहाज MV Ever Lovely पर ड्रोन हमला किया था। इसी घटना को अमेरिकी कार्रवाई का प्रमुख कारण बताया गया है।

ईरान का पलटवार का दावा

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने जवाबी कार्रवाई में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।

ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने अमेरिका पर बातचीत के दौरान हमला करने का आरोप लगाते हुए कहा कि युद्धविराम का उल्लंघन अमेरिका के लिए भविष्य में भारी पड़ेगा।

NATO देशों पर भी साधा निशाना

ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई में सहयोग करने वाले NATO सदस्य देशों को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इन देशों को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने इस अभियान का समर्थन क्यों किया।

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा समुद्री संकट

होर्मुज स्ट्रेट के पास एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले के बाद वैश्विक समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। हमले में जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। घटना के बाद समुद्री यातायात और ऊर्जा आपूर्ति पर असर की आशंका जताई जा रही है।

इजराइल-लेबनान के बीच 14 सूत्रीय समझौता

तनाव के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में इजराइल और लेबनान के बीच 14 बिंदुओं पर आधारित एक समझौता हुआ है। प्रस्ताव के अनुसार लेबनानी सेना पूरे देश में सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेगी, जबकि हिजबुल्लाह जैसे सशस्त्र समूहों को हथियार छोड़ने होंगे। इसके बाद इजराइली सेना चरणबद्ध तरीके से कब्जे वाले इलाकों से पीछे हटेगी।

हालांकि समझौते के विरोध में बेरूत में हिजबुल्लाह समर्थकों ने प्रदर्शन भी किया और कई स्थानों पर विरोध मार्च निकाला।

परमाणु कार्यक्रम पर फिर बढ़ी हलचल

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने संकेत दिया है कि उसकी टीम जल्द ही ईरान के परमाणु ठिकानों का निरीक्षण करेगी। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता भी पूरी हो चुकी है। दोनों देशों ने चार संयुक्त समितियां बनाकर 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई है।

तेल बाजार पर भी दिखा असर

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। वहीं खाड़ी क्षेत्र में LNG टैंकरों के रास्ते बदलने की खबरों ने समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

हालात पर दुनिया की नजर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, इजराइल-लेबनान समझौते, परमाणु वार्ता और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात को देखते हुए पूरी दुनिया की नजर मध्य पूर्व के घटनाक्रम पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की अगली रणनीति और कूटनीतिक वार्ताएं क्षेत्र की स्थिरता के लिए अहम साबित हो सकती हैं।

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है। शनिवार को लेबनान की राजधानी बेरूत में इजराइल-लेबनान समझौते के विरोध में हिजबुल्लाह समर्थक सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने मोटरसाइकिल रैली निकाली, नारेबाजी की और कई स्थानों पर जलते टायर रखकर सड़कें जाम करने की कोशिश की। हालात को देखते हुए लेबनानी सेना ने राजधानी के कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ाते हुए अस्थायी चौकियां स्थापित कर दीं।

इसी बीच इजराइली सेना ने लेबनान-इजराइल सीमा के पास देर रात बमबारी की। लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार यह हमला सीमा से करीब 1.5 किलोमीटर अंदर स्थित क्षेत्र में किया गया। इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

दूसरी ओर ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह कार्रवाई दक्षिणी तटीय इलाकों पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में की गई। हालांकि, ईरान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया।

अमेरिकी हमलों को लेकर ईरानी मीडिया ने दावा किया कि सिरिक पोर्ट पर कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और बंदरगाह सामान्य रूप से काम कर रहा है। वहीं ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और दोनों देशों के बीच हुए युद्ध-विराम संबंधी मेमोरेंडम का उल्लंघन बताया।

इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान का आभार व्यक्त किया। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट की अमेरिकी नाकेबंदी के दौरान फंसे ईरानी नाविकों की सुरक्षित वापसी में पाकिस्तान द्वारा दी गई कूटनीतिक सहायता की सराहना की।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही को वैश्विक आवश्यकता बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए समुद्री रास्तों का खुला रहना बेहद जरूरी है।

रोम की अमेरिकन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ एंड्रिया डेसी का मानना है कि ईरान और अमेरिका दोनों होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच हुआ मेमोरेंडम बेहद नाजुक स्थिति में है और आने वाले दिनों में इस तरह के तनावपूर्ण घटनाक्रम दोबारा देखने को मिल सकते हैं। हालांकि दोनों पक्ष पूर्ण युद्ध से बचना चाहेंगे।

उधर ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी एक बार फिर वैश्विक चर्चा में है। वर्ष 2015 के परमाणु समझौते के तहत ईरान ने यूरेनियम संवर्धन को 3.67 प्रतिशत तक सीमित रखने पर सहमति दी थी, लेकिन 2018 में अमेरिका के समझौते से बाहर होने के बाद ईरान ने संवर्धन का स्तर लगातार बढ़ाया। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार ईरान 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम का उत्पादन कर चुका है, जो परमाणु हथियार के लिए आवश्यक 90 प्रतिशत स्तर से नीचे होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता का विषय बना हुआ है।

इजराइल-लेबनान सीमा पर बढ़ती सैन्य गतिविधियां, ईरान-अमेरिका के बीच जवाबी हमले और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा ने पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को एक बार फिर बेहद संवेदनशील बना दिया है। 

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'फेथ एंड फ्रीडम कोएलिशन' के 'रोड टू मेजॉरिटी' सम्मेलन में ईरान को लेकर कई बड़े दावे किए। अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन ने ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया है, जिससे ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा।

'ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा'

ट्रंप ने कहा कि हाल ही में हुए एक ऐतिहासिक समझौते के जरिए अमेरिका ने वह हासिल किया है, जो पहले कोई भी राष्ट्रपति नहीं कर सका। उनके मुताबिक, इस समझौते के बाद ईरान के परमाणु हथियार विकसित करने की संभावना लगभग समाप्त हो गई है।

ईरानी सेना की क्षमता पर किया बड़ा दावा

अपने भाषण में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना, वायुसेना, एयर डिफेंस सिस्टम, रडार नेटवर्क और सैन्य उत्पादन क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।

हालांकि, ट्रंप ने इन दावों के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण या आधिकारिक सैन्य रिपोर्ट पेश नहीं की।

ड्रोन और मिसाइल क्षमता में भारी कमी का दावा

ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत में बड़ी गिरावट आई है। उनके अनुसार—

  • ड्रोन क्षमता में 82% की कमी आई है।

  • मिसाइल क्षमता में 80% की गिरावट आई है।

  • रॉकेट लॉन्चर क्षमता में 90% तक कमी आई है।

उन्होंने कहा कि इन कार्रवाइयों के बाद ईरान की आक्रामक सैन्य क्षमता पहले की तुलना में काफी कमजोर हो गई है।

ईरानी नेतृत्व पर भी साधा निशाना

ट्रंप ने दावा किया कि हालिया घटनाओं में ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व को भी भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि नेतृत्व स्तर पर लगातार झटके लगने से अब कोई भी ईरान का नेता बनने के लिए तैयार नहीं है।

कासिम सुलेमानी का भी किया जिक्र

अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सुलेमानी अमेरिकी सैनिकों पर हुए कई हमलों के लिए जिम्मेदार था और उसे मार गिराना उनकी सरकार के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक था।

ट्रंप ने दावा किया कि सुलेमानी की मौत मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हुई और इससे ईरान की सैन्य रणनीति को गहरा झटका लगा।

दावों पर नहीं दिया कोई स्वतंत्र प्रमाण

अपने पूरे संबोधन में ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता और परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई बड़े दावे किए। हालांकि, उन्होंने इन दावों की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र रिपोर्ट, आधिकारिक खुफिया आकलन या अंतरराष्ट्रीय एजेंसी के आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए। ऐसे में इन दावों पर विभिन्न पक्षों की अलग-अलग राय सामने आ सकती है।

Kashish Sain

Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Bringing truth from the ground राजस्थान और देश-दुनिया की ताज़ा, सटीक और भरोसेमंद खबरें सरल और प्रभावी अंदाज़ में प्रस्तुत करना, ताकि हर पाठक तक सही जानकारी समय पर पहुँच सके।

Digital Archives

homeHomeamp_storiesWeb Storieslocal_fire_departmentTrendingplay_circleVideosmark_email_unreadNewsletter