मोबाइल छोड़ किताबों से जुड़ेंगे बच्चे, जयपुर के स्टार्टअप ने लॉन्च किया अनोखा स्टोरीबुक प्लेटफॉर्म
जयपुर स्थित स्टार्टअप ‘पीकोरी’ (Pikori) ने बच्चों के लिए देश का अनूठा पर्सनलाइज्ड स्टोरीबुक प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म में बच्चों की वास्तविक तस्वीरों को कहानी के पात्रों में शामिल किया जाता है, जिससे बच्चे खुद कहानी के हीरो बन जाते हैं।
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
May 31, 2026 • 2:23 PM 6
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राजस्थान
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“मोबाइल छोड़ किताबों से जुड़ेंगे बच्चे, जयपुर के स्टार्टअप ने लॉन्च किया अनोखा स्टोरीबुक प्लेटफॉर्म”
डिजिटल युग में जहां बच्चे तेजी से मोबाइल, टैबलेट और टीवी स्क्रीन की ओर आकर्षित हो रहे हैं, वहीं जयपुर के एक स्टार्टअप ने उन्हें दोबारा किताबों की दुनिया से जोड़ने की दिशा में अनोखी पहल की है। जयपुर आधारित स्टार्टअप ‘पीकोरी’ (Pikori) ने एक ऐसा पर्सनलाइज्ड स्टोरीबुक प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिसमें बच्चे केवल कहानी पढ़ते नहीं, बल्कि खुद कहानी के मुख्य पात्र बन जाते हैं।
इस अभिनव प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बच्चों की वास्तविक तस्वीरों को कहानी के चित्रों और किरदारों में शामिल किया जाता है। जब कोई बच्चा किताब के पन्नों में खुद को अंतरिक्ष यात्री, सुपरहीरो, जंगल के राजा या किसी जादुई दुनिया के नायक के रूप में देखता है, तो उसकी रुचि और उत्साह कई गुना बढ़ जाता है।
स्क्रीन टाइम कम करने की दिशा में नई पहल
पीकोरी के डायरेक्टर अनुज ने लॉन्चिंग कार्यक्रम के दौरान बताया कि आज अधिकांश अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम है। मोबाइल और डिजिटल डिवाइस पर बढ़ती निर्भरता बच्चों की एकाग्रता, रचनात्मकता और मानसिक विकास को प्रभावित कर रही है।
इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए कंपनी ने तकनीक का उपयोग बच्चों को स्क्रीन से दूर करने और किताबों के करीब लाने के लिए किया है। उनका मानना है कि जब बच्चे खुद को कहानी का हिस्सा देखते हैं, तो उनका किताबों से भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है और वे पढ़ने में अधिक रुचि लेने लगते हैं।
तकनीक और रचनात्मकता का अनोखा संगम
लॉन्च कार्यक्रम में स्टार्टअप की टीम ने पर्सनलाइज्ड स्टोरीबुक का लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया। इसमें दिखाया गया कि किस प्रकार एक बच्चे की तस्वीर को कहानी के पात्र के रूप में शामिल कर पूरी किताब तैयार की जाती है।
इस दौरान मौजूद अभिभावकों, शिक्षकों और बच्चों ने इस अनूठे कॉन्सेप्ट की सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल बच्चों की कल्पनाशक्ति को बढ़ावा देने के साथ-साथ उनकी सीखने की क्षमता को भी मजबूत कर सकती है।
सिर्फ कहानी नहीं, शिक्षा का नया माध्यम
कंपनी ने बताया कि यह पहल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में बच्चों के लिए पाठ्यक्रम आधारित सामग्री, नैतिक शिक्षा से जुड़ी कहानियां, व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम और अन्य कस्टमाइज्ड शैक्षणिक उत्पाद भी लॉन्च किए जाएंगे।
इन उत्पादों का उद्देश्य बच्चों को रोचक तरीके से सीखने के लिए प्रेरित करना और शिक्षा को अधिक इंटरैक्टिव बनाना होगा।
पढ़ने की आदत को मिलेगा नया प्रोत्साहन
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल युग में बच्चों के बीच किताबें पढ़ने की आदत लगातार कम हो रही है। ऐसे समय में पर्सनलाइज्ड स्टोरीबुक्स जैसी पहल बच्चों को किताबों की ओर आकर्षित करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
जब कोई बच्चा खुद को कहानी का नायक देखता है, तो वह कहानी के साथ गहराई से जुड़ता है और सीखने की प्रक्रिया अधिक मजेदार और प्रभावशाली बन जाती है। यही कारण है कि पीकोरी का यह नवाचार शिक्षा और तकनीक के सफल संगम का एक सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।
बच्चों और अभिभावकों को मिलेगा लाभ
बच्चों का स्क्रीन टाइम कम होगा।
पढ़ने की आदत विकसित होगी।
कल्पनाशक्ति और रचनात्मक सोच को बढ़ावा मिलेगा।
सीखने की प्रक्रिया अधिक रोचक बनेगी।
बच्चों का आत्मविश्वास और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा।
डिजिटल दौर में जहां तकनीक को अक्सर बच्चों की पढ़ाई और मानसिक विकास के लिए चुनौती माना जाता है, वहीं जयपुर का यह स्टार्टअप तकनीक का उपयोग सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कर रहा है। यह पहल आने वाले समय में बच्चों की शिक्षा और मनोरंजन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
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