चुनाव हारे पर लाखों दिल जीत गए किसान के बेटे गोपाल चौधरी
पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर से निकलकर DUSU चुनाव में संयुक्त सचिव पद की दावेदारी करने वाले गोपाल चौधरी भले ही चुनाव हार गए, लेकिन अपनी सादगी से उन्होंने पूरे राजस्थान का दिल जीत लिया है। पढ़ें उनके संघर्ष की कहानी।
पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर के एक साधारण किसान परिवार से आने वाले गोपाल चौधरी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में संयुक्त सचिव पद पर दावेदारी ठोककर हर राजस्थानी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। हार के बावजूद उनकी सादगी और जज्बे ने पूरे देश में एक नई मिसाल कायम की है।
बंजर जमीन से डीयू के गलियारों तक का सफर
पश्चिमी राजस्थान का बाड़मेर, जहां की तपती और बंजर धरती पर जीवन यापन करना ही अपने आप में एक कड़ा संघर्ष है। ऐसे सुदूर इलाके के एक बेहद साधारण और गरीब किसान परिवार से निकलकर देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार 'दिल्ली यूनिवर्सिटी' तक का सफर तय करना हर किसी के बस की बात नहीं है। गोपाल चौधरी ने न सिर्फ इस मुश्किल सफर को तय किया, बल्कि डीयू की छात्र राजनीति के सबसे बड़े मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति भी दर्ज कराई।
सिर्फ एक पद की लड़ाई नहीं, सपनों की उड़ान थी
जब गोपाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में 'संयुक्त सचिव' (Joint Secretary) पद के लिए अपना नामांकन भरा, तो यह सिर्फ एक राजनीतिक पद पाने की होड़ नहीं थी। यह उन तमाम सपनों की उड़ान थी, जो दूर-दराज के गांवों और ढाणियों में पल रहे किसी भी सामान्य बालक के मन में होते हैं। अभावों के बीच पले-बढ़े गोपाल की यह उम्मीदवारी इस बात का प्रमाण थी कि अगर हौसलों में जान हो, तो पृष्ठभूमि कभी भी सपनों की राह में रोड़ा नहीं बन सकती।