सड़कों पर उतरी हजारों की भीड़, इंटरनेट पर छिड़ा महासंग्राम! क्या 'टाइगर' के नाम पर छिन जाएगी हजारों परिवारों की रोजी-रोटी?

करौली-धौलपुर टाइगर रिजर्व के विरोध में सरमथुरा में ग्रामीणों का आंदोलन 23वें दिन भी जारी है। X (ट्विटर) पर #करौली_धौलपुर_टाइगर_रिजर्व_रद्द_करो हैशटैग ट्रेंड कर रहा है। विस्थापन और रोजगार को लेकर ग्रामीणों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं।

yashaswani
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
September 3, 2026 • 6:40 PM  557
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राजस्थान
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सड़कों पर उतरी हजारों की भीड़, इंटरनेट पर छिड़ा महासंग्राम! क्या 'टाइगर' के नाम पर छिन जाएगी हजारों परिवारों की रोजी-रोटी?
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3 Sep 2026
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सड़कों पर उतरी हजारों की भीड़, इंटरनेट पर छिड़ा महासंग्राम! क्या 'टाइगर' के नाम पर छिन जाएगी हजारों परिवारों की रोजी-रोटी?

करौली-धौलपुर टाइगर रिजर्व को लेकर सरमथुरा इलाके में ग्रामीणों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को इस आंदोलन के 23वें दिन धरना स्थल पर हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ी। आसपास के गांवों ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी लोग इस आंदोलन को अपना समर्थन देने पहुंच रहे हैं। जमीन, घर और रोजगार छिनने के डर से ग्रामीण लगातार विस्थापन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

X (ट्विटर) पर दिनभर चला ऑनलाइन अभियान

जमीन पर चल रहे इस आंदोलन की गूंज अब सोशल मीडिया पर भी तेज हो गई है। गुरुवार को X पर #करौली_धौलपुर_टाइगर_रिजर्व_रद्द_करो हैशटैग पूरे दिन ट्रेंड करता रहा। इस ऑनलाइन अभियान के जरिए लोगों ने सरकार तक अपनी बात पहुंचाई और टाइगर रिजर्व के कारण होने वाले नुकसान को लेकर चिंता जताई। सोशल मीडिया पर हजारों पोस्ट के जरिए ग्रामीणों की परेशानी को उजागर किया गया।

रोजगार और विस्थापन का सता रहा है डर

आंदोलन कर रहे लोगों की सबसे बड़ी चिंता उनका घर और रोजगार है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यहां टाइगर रिजर्व बनता है, तो उन्हें अपने ही घरों से विस्थापित होना पड़ेगा। इसके अलावा सरमथुरा इलाके की पहचान यहां के लाल पत्थर से भी है। इस पत्थर के काम से हजारों परिवारों की रोजी-रोटी चलती है। अगर टाइगर रिजर्व बना, तो यह रोजगार छिन जाएगा और लोगों के सामने भूखे मरने की नौबत आ जाएगी।

"जानवर भी बचें और इंसान भी"

 ग्रामीणों ने साफ किया है कि वे बाघों या वन्यजीवों को बचाने के खिलाफ नहीं हैं। उनका सिर्फ इतना कहना है कि जानवरों को बचाने के चक्कर में इंसानों की बलि न चढ़ाई जाए। वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका नारा है कि "जानवर भी बचें और इंसान भी।"

सरकार से बातचीत की मांग

लगातार 23 दिनों से चल रहे इस धरने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। अब ग्रामीणों की मुख्य मांग यह है कि सरकार और प्रशासन के अधिकारी उनके साथ सीधे बातचीत करें। वे चाहते हैं कि सरकार यह साफ करे कि टाइगर रिजर्व बनने की स्थिति में उन लोगों के घर, जमीन और भविष्य को लेकर क्या ठोस व्यवस्था की जाएगी।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस मामले में अगला क्या कदम उठाती है और वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ इंसानों के रोजगार को बचाने के लिए क्या रास्ता निकालती है।

yashaswani

yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor

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