मिड-डे मील या जहर? सरकारी स्कूल में खाना खाने के बाद 31 बच्चे बीमार, 20 अस्पताल में भर्ती

पूनिया देवरी के गवर्नमेंट मिडिल स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 31 छात्र-छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई। उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद 20 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। खाद्य विभाग ने भोजन और पानी के सैंपल लिए हैं।

yashaswani
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
August 25, 2026 • 4:56 PM  7
र
राजस्थान
NEWS CARD
Logo
मिड-डे मील या जहर? सरकारी स्कूल में खाना खाने के बाद 31 बच्चे बीमार, 20 अस्पताल में भर्ती
“मिड-डे मील या जहर? सरकारी स्कूल में खाना खाने के बाद 31 बच्चे बीमार, 20 अस्पताल में भर्ती”
Favicon
Read more onthekhatak.com/s/5efa0a
25 Aug 2026
https://thekhatak.com/s/5efa0a
Google News
Copied
मिड-डे मील या जहर? सरकारी स्कूल में खाना खाने के बाद 31 बच्चे बीमार, 20 अस्पताल में भर्ती

राजस्थान के पूनिया देवरी स्थित गवर्नमेंट मिडिल स्कूल (Government Middle School, Poonia Deori) में सोमवार को बड़ा प्रशासनिक और स्वास्थ्य संबंधी अलर्ट सामने आया। यहां मिड-डे मील (Mid-Day Meal) खाने के बाद 31 छात्र-छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। बच्चों को उल्टी, दस्त, घबराहट और सिर-पेट दर्द की गंभीर शिकायत के बाद स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया।

परिजनों और स्कूल स्टाफ की मदद से सभी बीमार बच्चों को तुरंत निजी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।

कद्दू की सब्जी से आ रही थी बदबू

अस्पताल में भर्ती बच्चों का कहना है कि मिड-डे मील में दी गई कद्दू की सब्जी से अजीब सी बदबू आ रही थी। संस्था प्रधान चंद्रप्रकाश मीणा ने जानकारी दी कि स्कूल में भोजन सुबह 10 बजे केबलनगर अन्नपूर्णा सहकारी समिति से बनकर आया था। सोमवार को स्कूल के लगभग 110 छात्र-छात्राओं ने मेन्यू के अनुसार कद्दू की सब्जी, दाल और चपाती खाई थी। खाना खाने के कुछ देर बाद, दोपहर करीब 12:30 बजे बच्चों को एक-एक कर उल्टी, सिरदर्द और घबराहट होने लगी।

20 बच्चे अस्पताल में भर्ती, 11 को मिली छुट्टी

स्थिति को बिगड़ता देख तुरंत मेडिकल सहायता ली गई। डॉक्टरों ने 11 बच्चों को प्राथमिक उपचार देने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी है, जबकि 20 बच्चों की हालत को देखते हुए उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कर लिया गया है। फिलहाल बच्चों का इलाज जारी है।

स्कूल में पेयजल व्यवस्था नदारद, बोरवेल का पानी पीते हैं बच्चे

इस घटना ने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की पोल भी खोल दी है। कक्षा एक से आठ तक के इस स्कूल में कुल 130 बच्चों का नामांकन है, इसके बावजूद यहां पीने के साफ पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। जानकारी के अनुसार, एक पड़ोसी के बोरवेल से पाइप लगाकर स्कूल की पानी की टंकी को भरा जाता है और मासूम बच्चे वही पानी पीने को मजबूर हैं।

शिक्षा और खाद्य विभाग ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलते ही जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ - प्रारंभिक मुख्यालय) रूपसिंह मीणा सहित अन्य शीर्ष शिक्षा अधिकारी तुरंत स्कूल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। खाद्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर मिड-डे मील के खाने और पीने के पानी (बोरवेल) दोनों के सैंपल ले लिए हैं।

yashaswani

yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor

Digital Archives

homeHomeamp_storiesWeb Storieslocal_fire_departmentTrendingplay_circleVideosmark_email_unreadNewsletter