घर में चालू शौचालय नहीं तो रद्द होगा पर्चा, राजस्थान पंचायत चुनाव से पहले जान लें ये 5 नए नियम
राजस्थान में पंचायत चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। सरपंच पद के लिए नामांकन दाखिल करने से पहले चुनाव आयोग के नए नियमों, योग्यताओं और 2026 में हुए दो संतानों वाले कानून में बदलाव की पूरी जानकारी यहां पढ़ें।



राजस्थान में पंचायत चुनावों की तारीखों का ऐलान होते ही गांवों की सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चौपालों पर चुनावी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और सरपंच पद के संभावित उम्मीदवार मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। लेकिन, चुनावी अखाड़े में उतरने और अपना नामांकन दाखिल करने से पहले उम्मीदवारों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि सरपंच का चुनाव लड़ने के नियम क्या हैं।
कानून में तय योग्यताओं को पूरा न करने पर ऐन मौके पर आपका नामांकन खारिज हो सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं चुनाव लड़ने की पूरी गाइडलाइन और इस बार हुए अहम बदलाव।
उम्र सीमा और मतदाता सूची में नाम है अनिवार्य
सरपंच चुनाव की दावेदारी पेश करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए। इसके साथ ही सबसे अहम शर्त यह है कि प्रत्याशी का नाम उसी संबंधित ग्राम पंचायत की वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) में अनिवार्य रूप से दर्ज होना चाहिए। यदि नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, तो आप चुनाव नहीं लड़ सकते।
क्या है शैक्षणिक योग्यता का नियम?
पंचायती राज नियमों के मुताबिक, सरपंच पद का चुनाव लड़ने के लिए अब किसी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification) की कोई बाध्यता नहीं है। बिना किसी विशेष डिग्री या मार्कशीट के भी दावेदार चुनाव लड़ सकते हैं।
सबसे बड़ा बदलाव: अब लागू नहीं है 'दो संतान' का नियम
साल 2026 के पंचायत चुनावों में सबसे बड़ी राहत उन उम्मीदवारों को मिली है जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं। 2026 में पंचायती राज कानून में अहम संशोधन किया गया है। इसके तहत, दो से अधिक संतान होने के आधार पर चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने वाले प्रावधान को पूरी तरह हटा दिया गया है। यानी अब तीन या उससे अधिक बच्चों वाले व्यक्ति भी बिना किसी कानूनी बाधा के सरपंच का चुनाव लड़ सकते हैं।
घर में शौचालय होना अब भी है सबसे सख्त शर्त
स्वच्छ भारत मिशन के तहत चुनाव लड़ने के लिए शौचालय का नियम बेहद महत्वपूर्ण है। उम्मीदवार के घर में एक चालू हालत (Functional) में सैनिटरी शौचालय होना अनिवार्य है। सिर्फ ढांचा बना होना ही काफी नहीं है; यह भी आवश्यक है कि उम्मीदवार के परिवार का कोई भी सदस्य खुले में शौच (Open Defecation) के लिए न जाता हो। खुले में शौच करने की स्थिति में भी उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है।
आरक्षण के नियमों का रखें विशेष ध्यान
जिस ग्राम पंचायत में सरपंच की सीट जिस वर्ग के लिए आरक्षित (Reserved) की गई है, वहां केवल उसी श्रेणी का उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है।
अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित सीट पर उसी वर्ग का प्रमाण पत्र होना जरूरी है।
यदि कोई सीट 'महिला' के लिए आरक्षित है, तो वहां किसी भी स्थिति में पुरुष उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकता है।
इन गलतियों और अयोग्यताओं से छिन सकती है दावेदारी
नामांकन से पहले उम्मीदवार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उस पर कोई कानूनी या आर्थिक अयोग्यता न लगी हो। इन स्थितियों में फॉर्म रिजेक्ट हो सकता है:
पंचायत का बकाया (No Dues): उम्मीदवार पर पंचायत का कोई टैक्स, फीस या पुरानी बकाया राशि नहीं होनी चाहिए। हालांकि, नियमों में यह राहत दी गई है कि यदि बकाया का नोटिस मिला है, तो नामांकन दाखिल करने से पहले उसका पूरा भुगतान करके चुनाव लड़ा जा सकता है।
सरकारी नौकरी से बर्खास्तगी: नैतिक पतन (Moral Turpitude) या भ्रष्टाचार के आरोप में राज्य सरकार की सेवा से बर्खास्त किया गया व्यक्ति, जिसे आगे की सरकारी सेवा के लिए अयोग्य घोषित किया गया हो, वह चुनाव के योग्य नहीं माना जाएगा।
आपराधिक मामले: कानून के तहत किसी मामले में आपराधिक दोषसिद्धि चुनाव लड़ने में बहुत बड़ी बाधा बन सकती है।
पंचायत के ठेके: दावेदार का अपनी ग्राम पंचायत के किसी भी ठेके (Contract) या वित्तीय मामलों में कोई सीधा आर्थिक हित नहीं होना चाहिए।
नामांकन से पहले जरूर करें अपना 'क्रॉस-चेक'
सरपंच पद के सभी दावेदारों को सलाह दी जाती है कि पर्चा भरने से पहले वे एक बार अपनी उम्र, मतदाता सूची में नाम, सीट के आरक्षण का स्टेटस, घर में शौचालय की उपयोगिता और पंचायत की एनओसी (NOC) जरूर चेक कर लें। सही जानकारी और दुरुस्त कागजात ही चुनाव में आपकी पहली जीत तय करते हैं।












































