अग्निवीर महेश मुहाल पंचतत्व में विलीन, 22KM की तिरंगा यात्रा के साथ नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
ओडिशा में ट्रेनिंग के दौरान जान गंवाने वाले चूरू के पीथीसर गांव के अग्निवीर महेश कुमार मुहाल का रविवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब।



राजस्थान के चूरू जिले के रहने वाले 21 वर्षीय ट्रेनी अग्निवीर महेश कुमार मुहाल रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। ओडिशा में ट्रेनिंग के दौरान गुरुवार को उनका निधन हो गया था। रविवार सुबह जब उनकी पार्थिव देह उनके पैतृक गांव पीथीसर पहुंची, तो पूरा गांव अपने वीर सपूत के अंतिम दर्शनों के लिए उमड़ पड़ा। बेटे के शव को देखकर मां का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं पिता लालचंद ने नम आंखों से कहा- "मैंने अपने बेटे को देश के नाम कर दिया है, मुझे इस बात का गर्व है।"
22 किलोमीटर की लंबी तिरंगा यात्रा और गूंजे जयकारे
रविवार सुबह करीब 9:30 बजे सेना के विशेष वाहन से अग्निवीर का पार्थिव शरीर दिल्ली से चूरू लाया गया। यहां से उनके गांव पीथीसर तक 22 किलोमीटर लंबी विशाल तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस दौरान सैंकड़ों युवाओं और ग्रामीणों का हुजूम सेना की गाड़ी के साथ चला। रास्ते में हर किसी ने नम आंखों से पुष्प वर्षा कर शूरवीर को नमन किया। वहीं, पास के गांव घंटेल के युवाओं ने 100 मीटर लंबा राष्ट्रीय ध्वज लेकर श्रद्धांजलि दी। पूरे रास्ते 'महेश कुमार अमर रहे' के नारों से आसमान गूंजता रहा।
पूरे सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

गांव में बीकानेर की टू राज राइफल्स सेंटर से आए जवानों, नायब सूबेदार विजयपाल सैनी और नायब सूबेदार बजरंग सिंह के नेतृत्व में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सेना के अधिकारियों ने गर्व और सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज महेश के पिता लालचंद को सौंपा। इसके बाद छोटे भाई निर्मल ने उन्हें मुखाग्नि दी। शूरवीर के अंतिम संस्कार के लिए गांव के ही निवासी राकेश मुहाल ने अपने खेत की आधा बीघा जमीन सहर्ष दान में दी।
इस दौरान पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, विधायक हरलाल सहारण, पूर्व विधायक रफीक मंडेलिया और भाजपा नेता देवेंद्र झाझड़िया समेत कई गणमान्य लोगों ने पुष्पचक्र अर्पित कर वीर सपूत को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
महज 4 महीने पहले ही सेना में हुए थे शामिल
महेश कुमार मुहाल ने देश सेवा का जज्बा लिए महज 4 महीने पहले ही भारतीय सेना की आर्टिलरी एयर डिफेंस को जॉइन किया था। वे ओडिशा के गोपालपुर में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें बुखार आया और बेहोशी की हालत में ब्रह्मपुर के आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
परिजनों के मुताबिक, डॉक्टरों ने डेंगू जैसे लक्षणों का अंदेशा जताया था, हालांकि इसकी स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई थी। बेटे की खराब तबीयत की खबर सुनकर पिता दिल्ली के लिए निकले ही थे कि सादुलपुर पहुंचते-पहुंचते उन्हें बेटे के निधन की मनहूस खबर मिल गई। शनिवार को उनका पार्थिव शरीर दिल्ली लाया गया था और रविवार को पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।












































