रातभर में बंद होंगे करोड़ों अकाउंट्स, क्या फ्रांस के नए फरमान से मची दुनिया भर में खलबली!
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और बिगड़ती दिनचर्या को बचाने के लिए फ्रांस ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह बैन लगा दिया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के इस फैसले के बाद नए शैक्षणिक सत्र से टेक कंपनियों को 15 साल से छोटे बच्चों के अकाउंट्स ब्लॉक करने होंगे। रील्स की लत, नींद की कमी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से बच्चों को दूर रखने के लिए लिया गया यह फैसला ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के सख्त कानूनों की अगली कड़ी है। हालांकि, अब सबसे बड़ा सस्पेंस यह है कि टेक कंपनियां बच्चों को फर्जी उम्र और VPN का इस्तेमाल करने से कैसे रोक पाएंगी और क्या भारत जैसे अन्य देश भी जल्द ऐसा ही कोई सख्त कदम उठाएंगे?
फ्रांस ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पूरी तरह बैन करने का फैसला लिया है। ज़रा सोचिए... अगर एक सुबह आपका बच्चा उठे और उसका पसंदीदा Instagram, Reel या TikTok ऐप हमेशा के लिए लॉक हो जाए, तो क्या होगा? लेकिन यूरोप के एक बड़े देश ने इसे हकीकत बना दिया है! डिजिटल लत और स्क्रीन टाइम के खिलाफ सबसे बड़ा युद्ध छेड़ते हुए फ्रांस ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन (Emmanuel Macron) ने इस कानून का खुलकर स्वागत किया है और इसे बच्चों की जिंदगी संवारने वाला मास्टरस्ट्रोक बताया है। आइए, बहुत आसान और सीधी भाषा में समझते हैं कि आखिर फ्रांस सरकार को यह सख्त कदम क्यों उठाना पड़ा और इसका दुनिया पर क्या असर होगा!
1. राष्ट्रपति मैक्रॉन ने क्यों कहा—"मैंने अपना वादा पूरा किया!"
फ्रांस की संसद में जब इस बिल पर वोटिंग हुई, तो भारी बहुमत से यह पास हो गया। राष्ट्रपति मैक्रॉन ने तुरंत सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए सांसदों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, "मैंने देश की जनता से वादा किया था कि बच्चों को डिजिटल खतरे से बचाऊंगा, और आज संसद ने उस पर मुहर लगा दी है। अब स्कूल का नया सत्र शुरू होते ही 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का दरवाजा पूरी तरह बंद हो जाएगा।" अब बस फ्रांस की संवैधानिक परिषद (Constitutional Council) की औपचारिक हरी झंडी का इंतजार है, जिसके बाद टेक कंपनियों (जैसे Meta, Snapchat, TikTok) को अपनी वेरिफिकेशन तकनीक सख्त करनी होगी।