41 साल बाद अंतरिक्ष में भारत की वापसी: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला रचेंगे इतिहास

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला 10 जून 2025 को एक्सिओम-4 मिशन के साथ ISS के लिए उड़ान भरकर 41 साल बाद अंतरिक्ष में भारत की वापसी करेंगे। नासा की पैगी व्हिटसन के नेतृत्व में मिशन स्पेसएक्स के ड्रैगन यान से लॉन्च होगा, जिसमें पोलैंड और हंगरी के अंतरिक्ष यात्री भी शामिल हैं। 14-दिवसीय मिशन में 60+ प्रयोग होंगे, जिसमें भारत के 8 शोध शामिल हैं, जो इसरो और अन्य संस्थानों द्वारा संचालित हैं। 550 करोड़ रुपये की लागत वाला यह मिशन भारत के गगनयान मिशन के लिए अनुभव देगा। शुक्ला ISS पर भारतीय छात्रों के साथ STEAM कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
June 10, 2025 • 6:58 PM  17
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41 साल बाद अंतरिक्ष में भारत की वापसी: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला रचेंगे इतिहास
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41 साल बाद अंतरिक्ष में भारत की वापसी: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला रचेंगे इतिहास

लखनऊ के 39 वर्षीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला आज, 10 जून 2025 को शाम 5:52 बजे (IST) फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से एक्सिओम-4 मिशन के साथ अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरकर इतिहास रचने जा रहे हैं। यह 1984 में विंग कमांडर राकेश शर्मा की अंतरिक्ष यात्रा के बाद 41 साल में किसी भारतीय अंतरिक्ष यात्री की अंतरिक्ष में वापसी होगी। शुक्ला ISS के 25 साल के इतिहास में वहां शोध करने वाले पहले भारतीय होंगे।

मिशन का नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

एक्सिओम-4 मिशन का नेतृत्व नासा की अनुभवी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन कर रही हैं। उनके साथ शुक्ला, पोलैंड के स्लावोज़ उज़्नान्स्की और हंगरी के टिबोर कापू 14-दिवसीय अभियान पर ISS जाएंगे। यह मिशन भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए 40 साल से अधिक समय बाद पहली सरकार प्रायोजित मानव अंतरिक्ष उड़ान है। मिशन स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट पर ड्रैगन अंतरिक्ष यान के जरिए उड़ान भरेगा, जिसमें शुक्ला ड्रैगन उड़ाने वाले पहले भारतीय होंगे।

मिशन का विवरण

10 जून को लॉन्च के बाद, मिशन 11 जून को रात 10 बजे (IST) लोअर अर्थ ऑर्बिट में ISS पर पहुंचेगा और डॉक करेगा। अंतरिक्ष यात्री कम से कम दो सप्ताह तक ISS पर रहेंगे, जहां वे 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। भारत के लिए आठ विशेष शोध प्रयोग निर्धारित हैं, जिनमें मांसपेशियों के पुनर्जनन और साइनोबैक्टीरिया की वृद्धि जैसे विषय शामिल हैं। ये प्रयोग इसरो और देश भर के विभिन्न संस्थानों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।

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