बीकानेर: 232 साल पहले भी खेजड़ी कटाई पर था सख्त बैन, दोषियों पर लगता था आर्थिक दंड ‘गुनहागारी’
बीकानेर रियासत के ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि 232 साल पहले हरी खेजड़ी काटना अपराध था और इसके लिए आर्थिक दंड ‘गुनहागारी’ लगाया जाता था, जो पर्यावरण संरक्षण की प्राचीन मिसाल है।
राजस्थान के बीकानेर से सामने आए ऐतिहासिक दस्तावेज यह बताते हैं कि मरुस्थलीय पर्यावरण संरक्षण को लेकर सदियों पहले ही कड़े नियम लागू किए जा चुके थे। करीब 232 वर्ष पहले बीकानेर रियासत में हरी खेजड़ी वृक्ष की कटाई को गंभीर अपराध माना जाता था।
रियासती अभिलेखों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति खेजड़ी वृक्ष को काटता पाया जाता था, तो उस पर आर्थिक दंड लगाया जाता था, जिसे उस समय ‘गुनहागारी’ कहा जाता था। यह व्यवस्था पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक अनुशासन बनाए रखने के लिए लागू की गई थी।
खेजड़ी संरक्षण की ऐतिहासिक नीति
मोदी लिपि में लिखी कागद बहियों और दरबारी आदेशों से यह स्पष्ट होता है कि बीकानेर दरबार ने खेजड़ी वृक्षों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। इसका उद्देश्य केवल पेड़ों की रक्षा नहीं, बल्कि मरुस्थलीय जीवन, पशुपालन और कृषि प्रणाली को भी सुरक्षित रखना था।