बाड़मेर कलेक्ट्रेट के तहसीलदार आम्बा राम बोसिया लड़ेंगे प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव... जानें क्या है पूरा समीकरण

जयपुर के आरएएस क्लब में राजस्थान तहसीलदार सेवा परिषद के प्रदेश स्तरीय चुनाव होने जा रहे हैं।

Kashish Sain
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
June 27, 2026 • 8:28 PM | Barmer 57
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राजस्थान
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बाड़मेर कलेक्ट्रेट के तहसीलदार आम्बा राम बोसिया लड़ेंगे प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव... जानें क्या है पूरा समीकरण
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बाड़मेर कलेक्ट्रेट के तहसीलदार आम्बा राम बोसिया लड़ेंगे प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव... जानें क्या है पूरा समीकरण
आम्बा राम बोसिया

राजस्थान के राजस्व प्रशासनिक हलकों में इन दिनों सांगठनिक हलचल चरम पर है। राजधानी जयपुर के प्रतिष्ठित आरएएस (RAS) क्लब में 'राजस्थान तहसीलदार सेवा परिषद' के प्रदेश स्तरीय चुनाव होने जा रहे हैं। इस चुनाव में प्रदेशभर के तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की नजरें टिकी हैं। इस बार के चुनावी रण में पश्चिमी राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर से एक बेहद मजबूत नाम सामने आया है श्री आम्बा राम बोसिया। बाड़मेर कलेक्ट्रेट के तहसीलदार आम्बा राम इस बार 'प्रदेश अध्यक्ष' पद के लिए मजबूती से अपनी दावेदारी पेश कर प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरे हैं।

आइए इस विशेष लेख में विस्तार से समझते हैं कि आम्बा राम बोसिया कौन हैं, उनका अब तक का सफर कैसा रहा और तहसीलदारों का यह चुनाव कैसे होता है।

कौन हैं श्री आम्बा राम बोसिया? (महाबार से प्रदेश स्तर तक का सफर)

श्री आम्बा राम बोसिया वर्तमान में बाड़मेर कलेक्ट्रेट में तहसीलदार के पद पर कार्यरत हैं। वे मूल रूप से बाड़मेर जिले के ही महाबार गांव के निवासी हैं। स्थानीय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक उन्हें एक बेहद सुलझे हुए, गंभीर और न्यायप्रिय अधिकारी के रूप में जाना जाता है।

1. लंबा प्रशासनिक अनुभव

आम्बा राम बोसिया के पास राजस्व मामलों और जमीनी स्तर के प्रशासन का एक बेहद लंबा और गहरा अनुभव है। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान कई चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम किया है। बाड़मेर जैसे भौगोलिक रूप से बड़े और सीमावर्ती जिले में कलेक्ट्रेट तहसीलदार के रूप में उनकी भूमिका प्रशासनिक बारीकियों पर उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाती है।

2. संगठन पर मजबूत पकड़

अधिकारी संवर्ग में उनकी लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनका 'सांगठनिक अनुभव' भी है। वे केवल एक सरकारी अधिकारी नहीं रहे, बल्कि लंबे समय से अपने साथी अधिकारियों की समस्याओं, सर्विस रूल्स (सेवा नियमों) की कमियों और संवर्ग के हितों के लिए मुखर रहे हैं। यही वजह है कि प्रदेशभर के तहसीलदारों ने उन्हें इस बार राजस्थान तहसीलदार सेवा परिषद के सबसे बड़े पद यानी 'प्रदेश अध्यक्ष' के प्रत्याशी के रूप में चुना है।

क्या है राजस्थान तहसीलदार सेवा परिषद और कैसे होते हैं इसके चुनाव?

आम जनता में अक्सर यह भ्रम होता है कि कलेक्ट्रेट या तहसीलदारों के चुनाव में जनता वोट डालती है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह पूरी तरह से एक आंतरिक और विभागीय सांगठनिक चुनाव (Association Election) है।

चुनाव की पूरी प्रक्रिया:

वोटर कौन होते हैं?: इस चुनाव में केवल वही लोग मतदान कर सकते हैं जो राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) या पदोन्नति के जरिए 'राजस्थान तहसीलदार सेवा' (RTS Cadre) का हिस्सा बने हैं। यानी पूरे राजस्थान के सभी कार्यरत तहसीलदार और नायब तहसीलदार ही इस चुनाव के वैध मतदाता (Voters) होते हैं।

कौन-कौन चुनाव लड़ता है?: इस संगठन में मुख्य रूप से प्रदेश अध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्यों के पदों के लिए चुनाव होता है। चुनाव में वे ही अधिकारी खड़े होते हैं जिन्हें प्रशासनिक सेवा में लंबा समय हो चुका हो और जिनकी पूरे राज्य के कैडर में अच्छी साख हो।

कैसे होता है मुकाबला?: अक्सर इस चुनाव में दो या तीन मुख्य पैनल (गुट) आमने-सामने होते हैं। एक गुट वर्तमान कार्यकारिणी का होता है, तो दूसरा गुट बदलाव या नई मांगों को लेकर सामने आता है। इस बार आम्बा राम बोसिया के सामने प्रदेश के अन्य हिस्सों (जैसे जयपुर या उदयपुर संभाग) के वरिष्ठ तहसीलदार टक्कर दे रहे हैं।

इस चुनाव और पद का महत्व क्या है?

तहसीलदार सेवा परिषद का प्रदेश अध्यक्ष बनना बेहद रसूख और जिम्मेदारी का काम माना जाता है।

सरकार से सीधी वार्ता: परिषद का अध्यक्ष सीधे तौर पर राज्य के राजस्व मंत्री, मुख्यमंत्री और राजस्व मंडल (Board of Revenue) के सामने अपने कैडर की मांगें रखता है।

प्रमोशन और ट्रांसफर नीति: तहसीलदार कैडर से ही प्रमोट होकर अधिकारी आरएएस (RAS) यानी उपखंड अधिकारी (SDM) बनते हैं। समय पर प्रमोशन (DPC) करवाना, तहसीलदारों के ट्रांसफर के नियमों को पारदर्शी बनवाना और उनके वेतन विसंगतियों को दूर करवाने में इस संगठन के अध्यक्ष की भूमिका सबसे बड़ी होती है।

जयपुर के आरएएस क्लब में होने जा रहा यह मुकाबला बेहद दिलचस्प है। महाबार के लाल और बाड़मेर के कलेक्ट्रेट तहसीलदार आम्बा राम बोसिया जिस तरह अपने लंबे अनुभव के दम पर पूरे प्रदेश के तहसीलदारों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं, उसने इस चुनावी मुकाबले को पूरी तरह एकतरफा या बेहद कड़ा बना दिया है। उनके समर्थक इसे 'पश्चिमी राजस्थान के प्रशासनिक नेतृत्व' की एक बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं।

Kashish Sain

Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

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