मौत सामने थी, सांसें उखड़ रही थीं... मलबे में 4 घंटे तक दबे DU के छात्रों की आपबीती सुन आपके भी आंसू छलक जाएंगे

दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला हॉस्टल गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई। मलबे में 4 घंटे तक फंसे DU के छात्रों की रोंगटे खड़े कर देने वाली आपबीती पढ़ें। जानें कैसे मौत के मुंह से दोस्त को किया था फोन।

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yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
September 9, 2026 • 12:32 PM  78
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मौत सामने थी, सांसें उखड़ रही थीं... मलबे में 4 घंटे तक दबे DU के छात्रों की आपबीती सुन आपके भी आंसू छलक जाएंगे
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9 Sep 2026
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मौत सामने थी, सांसें उखड़ रही थीं... मलबे में 4 घंटे तक दबे DU के छात्रों की आपबीती सुन आपके भी आंसू छलक जाएंगे

राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को हुए दर्दनाक हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया है। यहां एक पांच मंजिला इमारत (हॉस्टल) ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस भयानक हादसे में 7 लोगों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि 12 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के मोतीलाल नेहरू कॉलेज के सेकेंड ईयर के दो छात्र- नीरज बावा और नितेश भी शामिल हैं। मलबे के नीचे 4 घंटे तक जिंदगी और मौत से जंग लड़ने वाले इन दोनों छात्रों की कहानी बेहद खौफनाक है।

'भाई, मैं मर रहा हूं... मुझे बचा लो'

हादसे के वक्त दोनों छात्र अपने-अपने कमरों में थे। बिल्डिंग गिरने के बाद दोनों कई टन भारी मलबे के नीचे दब गए। शरीर पर गंभीर चोटें थीं और सांस लेना मुश्किल हो रहा था। इसी घुटन और अंधेरे के बीच नीरज ने अपने एक करीबी दोस्त वीर चतरथ को फोन मिलाया। वीर के मुताबिक, दोपहर 1:45 बजे नीरज का फोन आया और उसने सिर्फ इतना कहा- "भाई, मैं मर रहा हूं।" दोनों के बीच 5-6 बार बात हुई। वीर ने तुरंत उसे वॉट्सऐप पर लाइव लोकेशन भेजने को कहा। 1:55 बजे नीरज ने लोकेशन भेजी, लेकिन 2:16 बजे के बाद उसका फोन उठना बंद हो गया। इसके बाद दोस्तों ने मिलकर रेस्क्यू टीम (NDRF और पुलिस) के साथ नीरज को ढूंढने की मुहिम शुरू की।

महज 2 सेकंड और भरभराकर गिर गई 5 मंजिला इमारत

नीरज के पास वाले कमरे में ही रहने वाले नितेश ने बताया कि हादसा कितनी तेजी से हुआ। रविवार दोपहर 12:30 बजे वह खाना खाकर अपने कमरे में आया था। अचानक दीवारों से पानी जैसी अजीब आवाजें आने लगीं। नितेश ने नीरज से पूछा कि क्या उसे भी यह आवाज आ रही है? नीरज ने जैसे ही 'हां' कहा, उसके महज 2 सेकंड बाद ही पूरी बिल्डिंग ढह गई।

मलबे के नीचे का वो खौफनाक मंजर

नितेश के ऊपर लेंटर गिर गया था, लेकिन अच्छी बात यह रही कि मलबे और लेंटर के बीच एक छोटी सी जगह बन गई थी, जिससे उसके चेहरे तक हवा पहुंच रही थी। वह लगातार मदद के लिए चिल्ला रहा था। वहीं, नीरज ऐसी जगह फंसा था जहां मलबा और धूल बहुत ज्यादा थी, जिससे उसे सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही थी और वह दर्द से तड़प रहा था।

नितेश ने बताया कि जब रेस्क्यू टीम ऊपर पहुंची, तो वह उनकी बातें सुन पा रहा था। रेस्क्यू टीम कह रही थी कि 'दूसरी बिल्डिंग भी गिरने वाली है।' यह सुनकर मलबे में दबे नितेश की रूह कांप गई कि अगर ऐसा हुआ तो उनका बचना नामुमकिन हो जाएगा।

4 घंटे बाद रेस्क्यू, AIIMS में चल रहा नीरज का इलाज

कड़ी मशक्कत के बाद करीब 4 घंटे बाद दोनों छात्रों को मलबे से बाहर निकाला गया। नीरज को तुरंत प्राइमस अस्पताल ले जाया गया, जिसके बाद शाम 6 बजे उसे AIIMS ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। नीरज की हालत इस वक्त बेहद गंभीर है। उसकी पीठ, पेट और जांघ के ऊपरी हिस्से में गहरी चोटें आई हैं। रात करीब 1 बजे तक उसकी एक सर्जरी चली। डॉक्टरों के मुताबिक, उसके शरीर में इन्फेक्शन फैल गया है और त्वचा काली पड़ने लगी है। उसे जल्द ही एक और सर्जरी की जरूरत पड़ेगी।

हादसे से कुछ देर पहले ही मिल गए थे खतरे के संकेत

इस हादसे को टाला जा सकता था, क्योंकि इमारत गिरने के संकेत पहले ही मिलने लगे थे। 'हॉस्टल डेज' नाम के इस हॉस्टल के ठीक बगल में स्थित 'कनक लता' हॉस्टल की छात्राओं (अर्निका और मानसी) ने हादसे से कुछ मिनट पहले ही एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। इस वीडियो में साफ दिख रहा था कि उनके कमरे की दीवारों और छत पर गहरी दरारें आ गई हैं। वीडियो में छात्रा को यह कहते सुना जा सकता है- 'लगता है यह गिरने वाली है।' वहीं, हॉस्टल के कुछ अन्य छात्रों की किस्मत अच्छी रही, जो दीवारों से आ रही क्रैक (दरकने) की आवाजें सुनकर हादसे से 10-20 मिनट पहले ही बाहर निकल गए थे।

छात्रों का हब है सत्य निकेतन

सत्य निकेतन, दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित एक प्रमुख इलाका है। वेंकटेश्वर, आर्यभट्ट, मोतीलाल नेहरू और मैत्रेयी जैसे कई बड़े कॉलेज पास होने की वजह से यहां हजारों की संख्या में छात्र PG और हॉस्टल्स में रहते हैं। दिनभर यहां युवाओं की भारी भीड़ रहती है। इस हादसे ने इलाके में रहने वाले सैकड़ों छात्रों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है।

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