लगातार 7वीं बार निर्विरोध सरपंच बनीं भीखी देवी, 3 दशक से गांव में नहीं हुआ चुनाव
बाड़मेर की वीरेंद्र नगर ग्राम पंचायत में पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी की पत्नी भीखी देवी लगातार 7वीं बार निर्विरोध सरपंच चुनी गई हैं। उनके साथ ही सभी 7 वार्ड पंच भी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, जिससे पिछले 3 दशकों से इस पंचायत में चुनाव न होने का अनूठा रिकॉर्ड बरकरार है।



राजस्थान पंचायत चुनाव में जहां एक-एक वोट के लिए प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलती है, वहीं बाड़मेर जिले से एक अनूठी मिसाल सामने आई है। जिले की बायतु पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली वीरेंद्र नगर (पूर्व में बायतु भीमजी) ग्राम पंचायत में पिछले 32 सालों से चुनावी शोर और वोटिंग की नौबत ही नहीं आई है। यहां से 78 वर्षीय भीखी देवी को ग्रामीणों ने लगातार सातवीं बार अपना निर्विरोध सरपंच चुना है।
सादगी और विकास पर जनता का भरोसा
भीखी देवी राजस्थान कांग्रेस के कद्दावर नेता, 6 बार के विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री हेमाराम चौधरी की पत्नी हैं। इतने बड़े राजनीतिक रसूख के बावजूद उनका जीवन बेहद सादगी भरा है। बतौर सरपंच उन्होंने हमेशा गांव के विकास, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दी है। इसी सेवा भाव और भरोसे के चलते पूरे गांव ने एक बार फिर एकजुट होकर पंचायत का नेतृत्व उनके हाथों में सौंप दिया है।
1994 से कायम है निर्विरोध जीत का सिलसिला
भीखी देवी पहली बार वर्ष 1994-95 में सरपंच चुनी गई थीं। इसके बाद से पिछले चार दशकों में नामांकन प्रक्रिया के दौरान उनके सामने किसी भी प्रत्याशी ने पर्चा दाखिल नहीं किया। इस बार भी नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने तक उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं आया, जिसके बाद रिटर्निंग अधिकारी ने उन्हें आधिकारिक रूप से निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया। सबसे बड़ी बात यह है कि केवल सरपंच ही नहीं, बल्कि इस ग्राम पंचायत के सभी 7 वार्ड पंच भी सर्वसम्मति से निर्विरोध चुने गए हैं।
दिवंगत बेटे के नाम पर रखा गया नई पंचायत का नाम
इस बार के चुनाव में एक खास भावनात्मक पहलू भी जुड़ा है। पूर्व में इस ग्राम पंचायत का नाम बायतु भीमजी था, जिसे नवसृजित कर अब 'वीरेंद्र नगर' कर दिया गया है। यह नई ग्राम पंचायत हेमाराम चौधरी और भीखी देवी के इकलौते बेटे डॉ. वीरेंद्र चौधरी की याद में बनाई गई है, जिनका कम उम्र में बीमारी के कारण निधन हो गया था। ग्राम पंचायत का नाम और सीमाएं भले ही नई हों, लेकिन गांव के मुखिया के रूप में जनता का अटूट विश्वास आज भी भीखी देवी पर ही कायम है।













































