दौसा सिलिकोसिस घोटाला: 2 सरकारी डॉक्टर और एक रेडियोग्राफर गिरफ्तार, फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर ठगे 12.39 करोड़ रुपये

दौसा जिले में सिलिकोसिस के फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर सरकारी खजाने को 12.39 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के मामले में पुलिस ने दो साल बाद बड़ी कार्रवाई की। 30 मार्च 2026 को दो सरकारी डॉक्टरों (डॉ. मनोज ऊंचवाल और डॉ. डीएन शर्मा) तथा एक रेडियोग्राफर मनोहर लाल को गिरफ्तार किया गया। 2453 फर्जी सर्टिफिकेट बनाए गए और 413 मामलों में गलत भुगतान हुआ। जांच में सामने आया कि असली मरीजों के बजाय स्वस्थ लोगों को कार्ड दिए गए और एक ही एक्स-रे को कई बार इस्तेमाल किया गया। चिकित्सा विभाग ने कई कर्मचारियों को पहले निलंबित और APO किया था। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
March 31, 2026 • 5:37 PM  32
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दौसा सिलिकोसिस घोटाला: 2 सरकारी डॉक्टर और एक रेडियोग्राफर गिरफ्तार, फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर ठगे 12.39 करोड़ रुपये
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दौसा सिलिकोसिस घोटाला: 2 सरकारी डॉक्टर और एक रेडियोग्राफर गिरफ्तार, फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर ठगे 12.39 करोड़ रुपये
AI जनरेटेड

दौसा जिले में सिलिकोसिस के फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के बड़े घोटाले में राजस्थान पुलिस ने लगभग दो साल बाद बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार, 30 मार्च 2026 को शाम करीब 7 बजे पुलिस ने दो सरकारी डॉक्टरों और एक रेडियोग्राफर को गिरफ्तार किया। मंगलवार, 31 मार्च 2026 को दोपहर 1:30 बजे इन आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें दोषी मानते हुए गिरफ्तारी के आदेश जारी कर दिए।इस मामले में पुलिस ने डॉ. मनोज ऊंचवाल, डॉ. डीएन शर्मा (दोनों सरकारी डॉक्टर) और रेडियोग्राफर मनोहर लाल को गिरफ्तार किया है। सभी पर फर्जी सिलिकोसिस प्रमाण पत्र जारी करने और सरकारी धन का गलत भुगतान कराने के आरोप हैं।

मामला कब दर्ज हुआ और कैसे सामने आया?

यह घोटाला साल 2024 में कोतवाली थाने में दर्ज FIR का हिस्सा है। 29 जनवरी 2024 को जिला अस्पताल के पीएमओ कार्यालय में एलडीसी के माध्यम से शिकायत दी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि डॉक्टरों और रेडियोग्राफर ने मिलीभगत से 2453 फर्जी सिलिकोसिस प्रमाण पत्र जारी किए और 413 मामलों में 12.39 करोड़ रुपये का गलत भुगतान कराया गया।

जांच साइबर सेल की मदद से की गई। तकनीकी सबूतों, डिजिटल रिकॉर्ड और एक्स-रे विश्लेषण के आधार पर आरोपियों की पहचान हुई। सिलिकोसिस कार्ड नवंबर 2022 से ऑनलाइन बनने शुरू हुए थे। मात्र 10 महीनों में दौसा जिले में 2755 सिलिकोसिस कार्ड जारी हो गए, जो पूरे प्रदेश के कुल कार्डों का लगभग 46 प्रतिशत थे। इस असामान्य रूप से ऊंची संख्या पर प्रदेश स्तर की टीम को शक हुआ और जांच कमेटियां गठित की गईं।

जांच कमेटियों ने क्या पाया?

जांच के लिए दो अलग-अलग कमेटियां बनाई गईं: एक कमेटी मेडिकल कॉलेज जयपुर (एसएमएस मेडिकल कॉलेज) की ओर से बनाई गई, जिसमें डॉ. सीपी सावरकर, डॉ. मुकेश मित्तल और डॉ. सुनील जाखड़ शामिल थे।दूसरी कमेटी जिला कलेक्टर दौसा द्वारा गठित की गई।दोनों कमेटियों की रिपोर्ट में साफ हुआ कि दौसा जिले में सबसे ज्यादा फर्जी प्रमाण पत्र बनाए गए। जांच में पाया गया:जिन लोगों को सिलिकोसिस नहीं था, उन्हें फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए।वास्तविक सिलिकोसिस मरीजों के प्रमाण पत्र रिजेक्ट कर दिए गए।रेडियोग्राफर द्वारा अपलोड किए गए एक्स-रे में गड़बड़ी थी — एक ही एक्स-रे को कई लोगों के नाम पर इस्तेमाल किया गया।ऑटो-अप्रूवल प्रक्रिया का दुरुपयोग कर गलत भुगतान किया गया।चिकित्सा विभाग के निदेशक सुरेश नवल ने 8 मेडिकल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। बाद में कुछ डॉक्टरों को APO (अपने पद से हटाकर अन्यत्र तैनात) करने के आदेश भी जारी हुए।

फर्जीवाड़े का तरीका और सरकारी नुकसान

सिलिकोसिस मुख्य रूप से खदानों में काम करने वाले मजदूरों में होती है, जहां सिलिका युक्त धूल फेफड़ों में जमा हो जाती है। राजस्थान सरकार ने 2019 में सिलिकोसिस नीति लागू की, जिसमें पीड़ितों को राहत दी जाती है: सिलिकोसिस कार्ड बनने पर 3 लाख रुपये एकमुश्त सहायता।मरीज की मौत पर परिवार को 2 लाख रुपये + अंतिम संस्कार के लिए 10 हजार रुपये।मासिक पेंशन 1500 रुपये।लालच में डॉक्टरों, रेडियोग्राफरों और अन्य कर्मचारियों ने मिलकर फर्जी नेटवर्क चलाया। फर्जी मरीजों को कार्ड दिलाकर सरकारी अनुदान का फायदा उठाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ चिकित्सा अधिकारियों की मिलीभगत से गलत तरीके से कार्ड जारी किए गए। कुल मिलाकर सरकार को 12.39 करोड़ रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान हुआ।

पहले की कार्रवाइयां

इससे पहले महुवा जिला अस्पताल के प्रभारी डॉ. दिनेश मीणा, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सुरेश कुमार सैनी और डॉ. लोकेंद्र सिंह गुर्जर को निलंबित किया जा चुका था। FIR में कुल कई डॉक्टरों और रेडियोग्राफरों के नाम शामिल थे, जिनमें डॉ. देवीनारायण शर्मा, डॉ. घनश्याम मीना, डॉ. बत्तीलाल मीना, डॉ. प्रेम कुमार मीना, डॉ. दिनेश एसएस और कई अन्य रेडियोग्राफर शामिल थे। अन्य आरोपियों की तलाश अब भी जारी है।

वर्तमान स्थिति

पुलिस फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और पूरे नेटवर्क की गहराई में जांच चल रही है। साइबर थाना प्रभारी बृजेश ने बताया कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ही यह कार्रवाई संभव हुई। मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी उजागर की जा रही है।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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