6 दिन के सफर का किराया 5 लाख रुपये, फिर भी नहीं मिल रही सीट! जानिए क्या है इस लग्जरी ट्रेन की खासियत
दक्षिण भारत की मशहूर लग्जरी ट्रेन 'गोल्डन चैरियट' का 2026-27 सीजन नई सुविधाओं के साथ शुरू हो गया है और इसकी पहली यात्रा पूरी तरह बुक है। 5 रात और 6 दिन के इस शाही सफर में यात्रियों को ऐतिहासिक धरोहरों, जंगलों, कॉफी बागानों और गोवा के समुद्री तटों की सैर कराई जाएगी। इस शानदार यात्रा का किराया 2.53 लाख रुपये से लेकर 4.87 लाख रुपये तक है।



दक्षिण भारत की सैर को यादगार बनाने वाली कर्नाटक की मशहूर लग्जरी टूरिस्ट ट्रेन 'गोल्डन चैरियट' (Golden Chariot) नए रंग-रूप में पटरियों पर लौट आई है। 24 अक्टूबर से इसके 2026-27 सीजन का शानदार आगाज हो चुका है। पर्यटकों के बीच इस शाही सफर का क्रेज इस कदर है कि 75 मेहमानों की क्षमता वाली पहली यात्रा की पूरी बुकिंग हो चुकी है। 5 रात और 6 दिन के इस टूर में यात्रियों को राजशाही ठाठ-बाट के साथ ऐतिहासिक धरोहरों, घने जंगलों, कॉफी बागानों और खूबसूरत समुद्री तटों का दीदार कराया जाएगा।
कितना है किराया और क्या हैं टूर पैकेज?
इस फाइव-स्टार ट्रेन यात्रा का आनंद लेने के लिए प्रति व्यक्ति 2.53 लाख रुपये से लेकर 4.87 लाख रुपये तक का किराया तय किया गया है, जिस पर 5% जीएसटी अलग से देय होगा। कर्नाटक पर्यटन विभाग ने इस सीजन में कुल 13 यात्राएं आयोजित करने का खाका तैयार किया है, जिन्हें तीन अलग-अलग पैकेजों में बांटा गया है:
प्राइड ऑफ कर्नाटक (7 यात्राएं): 4,87,500 रुपये प्रति व्यक्ति (बिना जीएसटी)
ज्वेल्स ऑफ साउथ (3 यात्राएं): 4,87,500 रुपये प्रति व्यक्ति (बिना जीएसटी)
ग्लिम्प्स ऑफ कर्नाटक (3 यात्राएं): 3,31,500 रुपये प्रति व्यक्ति (बिना जीएसटी)
'प्राइड ऑफ कर्नाटक' का 6 दिनों का रोमांचक रूट

पहला दिन (बांदीपुर): सफर की शुरुआत प्रकृति के बीच होगी, जहां यात्री बांदीपुर नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ सफारी का लुत्फ उठाएंगे।
दूसरा दिन (मैसूर-श्रीरंगपट्टनम): ऐतिहासिक नगरी श्रीरंगपट्टनम का भ्रमण और भव्य मैसूर पैलेस की सैर।
तीसरा दिन (हलेबीडु-चिकमगलूर): हलेबीडु के प्राचीन मंदिरों की बेजोड़ वास्तुकला दर्शन और चिकमगलूर के हरे-भरे कॉफी बागानों का अनुभव।
चौथा दिन (हम्पी): यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल हम्पी के ऐतिहासिक स्मारकों का दीदार।
पांचवां दिन (गोवा): कर्नाटक की सीमाओं से निकलकर गोवा के शांत समंदर और वहां की पुरानी पुर्तगाली संस्कृति की झलक।
छठा दिन (बेंगलुरु वापसी): छह दिन की इस जादुई यात्रा का समापन बेंगलुरु लौटकर होगा।
नई सुविधाओं के साथ राजशाही एहसास
इस सीजन में गोल्डन चैरियट को अंदर से पूरी तरह नया लुक दिया गया है। पहले जहां सिर्फ बेडरूम हुआ करते थे, वहीं अब कमरों में बैठने के लिए एक अलग 'लिविंग रूम' भी बनाया गया है। 75 यात्रियों की सुविधा और देखभाल के लिए ट्रेन में 60 कर्मचारियों का विशेष रूप से प्रशिक्षित स्टाफ तैनात है।

यात्रियों के जायके का ख्याल रखने के लिए ट्रेन में 'रुचि' और 'नलपाका' नाम के दो शानदार रेस्टोरेंट हैं। यहां अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय व्यंजनों के साथ-साथ जैन और ग्लूटेन-फ्री खाने का विकल्प भी मौजूद है। सफर को और खुशनुमा बनाने के लिए 'मदिरा' नाम का एक बार भी है। सुरक्षा और हाईजीन को ध्यान में रखते हुए रसोई को कॉम्बी ओवन, हैवी-ड्यूटी इंडक्शन और आधुनिक आरओ वॉटर प्यूरीफायर से अपग्रेड किया गया है।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा नया पंख
कर्नाटक के पर्यटन मंत्री केजे जॉर्ज का कहना है कि इस ट्रेन का मुख्य मकसद राज्य की समृद्ध विरासत, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य को दुनिया भर के पर्यटकों तक पहुंचाना है। साल 2008 में शुरू हुई यह ट्रेन कुछ कारणों से 2018 में बंद हो गई थी और 2024 में इसे दोबारा पटरियों पर उतारा गया। शुरुआती दौर में मांग कम रहने के बाद, अब पहली ही ट्रिप का फुल होना पर्यटन विभाग के लिए एक बड़ी कामयाबी है। इससे राज्य में टूरिज्म सेक्टर को बूम मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।













































