दिव्यांग बेटी लीला कुंवर की भावुक गुहार: पैरों से लिखा शिक्षा मंत्री को पत्र, ट्रांसफर की मांग

शारीरिक रूप से पूर्णतः दिव्यांग होने के बावजूद, लीला ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने पैरों से लिखना सीखा और प्रारंभिक शिक्षक प्रशिक्षण (एसटीसी) पाठ्यक्रम में चयन हासिल किया। उनका सपना है कि वह एक शिक्षक बनकर दूसरों के लिए प्रेरणा बनें। लेकिन नियमानुसार, उन्हें प्रशिक्षण के लिए जोधपुर जिले के बोरुंदा में स्थित एक आवासीय संस्थान आवंटित किया गया है, जो उनके गृह जिले बाड़मेर से 300 किलोमीटर से अधिक दूर है।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
July 15, 2025 • 4:27 PM  223
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दिव्यांग बेटी लीला कुंवर की भावुक गुहार: पैरों से लिखा शिक्षा मंत्री को पत्र, ट्रांसफर की मांग
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दिव्यांग बेटी लीला कुंवर की भावुक गुहार: पैरों से लिखा शिक्षा मंत्री को पत्र, ट्रांसफर की मांग

एक ऐसी लड़की की कहानी, जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपने सपनों को पंख देने के लिए पैरों से लिखना सीखा। बाड़मेर की रहने वाली लीला कुंवर, जिन्होंने एक दर्दनाक हादसे में अपने दोनों हाथ खो दिए, आज अपने दृढ़ संकल्प और हौसले से समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं। लेकिन उनके सामने अब एक नई चुनौती खड़ी है, जिसे पार करने के लिए उन्होंने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को अपने पैरों से एक भावुक पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है।

लीला कुंवर की जिंदगी तब पूरी तरह बदल गई, जब एक बिजली के करंट के हादसे में उनके दोनों हाथ कोहनी के ऊपर से काटने पड़े। शारीरिक रूप से पूर्णतः दिव्यांग होने के बावजूद, लीला ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने पैरों से लिखना सीखा और प्रारंभिक शिक्षक प्रशिक्षण (एसटीसी) पाठ्यक्रम में चयन हासिल किया। उनका सपना है कि वह एक शिक्षक बनकर दूसरों के लिए प्रेरणा बनें। लेकिन नियमानुसार, उन्हें प्रशिक्षण के लिए जोधपुर जिले के बोरुंदा में स्थित एक आवासीय संस्थान आवंटित किया गया है, जो उनके गृह जिले बाड़मेर से 300 किलोमीटर से अधिक दूर है।

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