जैसलमेर-बाड़मेर-भाभर नई रेल लाइन: 31 स्टेशनों के साथ सामरिक और आर्थिक महत्व की परियोजना
जैसलमेर-बाड़मेर-भाभर नई रेल लाइन परियोजना (लगभग 380 किमी) को रेल मंत्रालय ने अंतिम स्थान सर्वेक्षण (FLS) और डीपीआर तैयार करने के लिए 10 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह तीन दशक पुरानी मांग है, जो सामरिक महत्व की है और सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना, व्यापार व विकास को बढ़ावा देगी। रूट पर कुल 31 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित हैं—जैसलमेर से बाड़मेर तक 8 तथा बाड़मेर से भाभर तक 23। ड्रोन और डीजीपीएस से टोपोग्राफिकल सर्वे जारी है, जिससे थार के रेगिस्तानी इलाकों में नई कनेक्टिविटी बनेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
राजस्थान और गुजरात के सीमावर्ती इलाकों को जोड़ने वाली एक महत्वाकांक्षी रेल परियोजना जैसलमेर-बाड़मेर-भाभर नई रेल लाइन तेजी से आगे बढ़ रही है। यह लगभग 380 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित रेल लाइन तीन दशकों से लंबित थी, लेकिन अब रेल मंत्रालय ने इसके सर्वेक्षण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के लिए 10 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है। वर्तमान में ड्रोन और डीजीपीएस तकनीक से टोपोग्राफिकल सर्वे कार्य जोरों पर चल रहा है, जो इस परियोजना को वास्तविकता के करीब ला रहा है।
परियोजना का महत्व
यह रेल लाइन न केवल राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर और जालौर जिलों को गुजरात के बनासकांठा जिले के भाभर से जोड़ेगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सामरिक महत्व भी रखती है। यह भारतीय सेना की गतिशीलता बढ़ाएगी, सीमा सुरक्षा को मजबूत करेगी और साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था, व्यापार, पर्यटन तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी। इस रूट से राजस्थान-गुजरात के बीच सीधी कनेक्टिविटी बनेगी, जिससे यात्रा समय और दूरी में काफी कमी आएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना क्षेत्र के 41 शहरों, कस्बों और गांवों की तकदीर बदल सकती है।