दोनों हाथ खो चुकी लीला ने पैरों से लिखकर बनाई नई पहचान… लेकिन बीएसटीसी कॉलेज ने एक फैसले से तोड़ दिया उसका सपना, कहानी सुनकर रह जाएंगे हैरान
दोनों हाथ खोने के बाद भी पैरों से लिखकर और पेंटिंग बनाकर आगे बढ़ी लीला… लेकिन बीएसटीसी कॉलेज के एक फैसले ने उसकी उम्मीदों को फिर हिला दिया।
बाड़मेर जिले के हापो की ढाणी की रहने वाली 12 साल की लीला की जिंदगी उस समय पूरी तरह बदल गई थी, जब एक दर्दनाक हादसे में करंट लगने से उसके दोनों हाथ काटने पड़े। बचपन की इस घटना ने न सिर्फ उसका शरीर बदला बल्कि उसका पूरा बचपन और आत्मविश्वास भी हिला दिया।
शुरुआत में लीला स्कूल जाने से डरती थी। उसे लगता था कि बच्चे उसका मजाक उड़ाएंगे, लेकिन इसी मुश्किल समय में उसके एक शिक्षक ने उसे आगे बढ़ने की हिम्मत दी। परिवार ने भी पूरा साथ दिया और धीरे-धीरे लीला ने अपने डर को पीछे छोड़कर पढ़ाई शुरू की।
अपने मजबूत इरादों के दम पर लीला ने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उसने जोधपुर के बोरुंदा स्थित एक कॉलेज में बीएसटीसी (BSTC) के लिए एडमिशन लिया, ताकि वह टीचर बन सके। लेकिन यहां उसे एक और बड़ा झटका लगा—कॉलेज प्रशासन ने यह कहकर उसे बाहर कर दिया कि वह बिना दोनों हाथों के बीएसटीसी नहीं कर सकती। इस फैसले ने लीला को अंदर तक तोड़ दिया।