मारवाड़ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर कर्मचारी की साहसिक कार्रवाई से टला बड़ा रेल हादसा: एसी कोच की ओवरहेड लाइन में लगी आग
मारवाड़ जंक्शन स्टेशन पर ट्रेन 17606 के एसी कोच की ओवरहेड लाइन में लगी आग को कर्मचारी चंदनसिंह गुर्जर ने सूझबूझ से बुझाया, बड़ा हादसा टला।
पाली, 4 नवंबर 2025 : राजस्थान के पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर देर रात एक बड़ा हादसा टल गया। प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर खड़ी पेसेंजर ट्रेन के एसी कोच की ओवरहेड विद्युत लाइन में अचानक आग लग गई, जिससे यात्रियों में हड़कंप मच गया। लेकिन रेलवे विभाग के कर्मचारी चंदनसिंह गुर्जर की तत्परता और सूझबूझ भरी कार्रवाई ने न केवल आग बुझाई, बल्कि एक भयानक दुर्घटना को होने से रोक लिया। यह घटना भगत की कोठी से काचीगुड़ा जाने वाली ट्रेन नंबर 17606 के दौरान हुई, जो यात्रियों के लिए राहत की सांस बन गई।
घटना का पूरा विवरण: रात के सन्नाटे में भड़की आगदेर रात करीब 2 बजे की बात है। मारवाड़ जंक्शन स्टेशन पर ट्रेन नंबर 17606 (भगत की कोठी - काचीगुड़ा एक्सप्रेस) प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर खड़ी थी। यात्रियों ने सोचा होगा कि रात की थकान मिटाने का समय है, लेकिन अचानक एसी कोच के ऊपर बनी ओवरहेड विद्युत लाइन से चिंगारियां उड़ने लगीं। देखते ही देखते आग की लपटें भड़क उठीं, जो तेजी से फैलने की कगार पर थी। स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोग चीखने लगे, तो कुछ ने सामान समेटना शुरू कर दिया। आग का शिकार अगर कोच बन जाता, तो न केवल यात्रियों की जान को खतरा हो जाता, बल्कि पूरे स्टेशन पर ब्लैकआउट और ट्रेनों का संचालन ठप हो सकता था।ट्रेन नंबर 17606 दिल्ली-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर चलने वाली महत्वपूर्ण पेसेंजर ट्रेन है, जो रोजाना सैकड़ों यात्रियों को दक्षिण भारत के शहरों से जोड़ती है। इस ट्रेन में कुल 20 कोच हैं, जिनमें एसी और स्लीपर क्लास शामिल हैं। घटना के समय ट्रेन में करीब 400-500 यात्री सवार थे, जो ज्यादातर लंबी दूरी के सफर पर थे। आग की शुरुआत ओवरहेड इलेक्ट्रिक वायर से हुई, जो हाई वोल्टेज कैरी करती है। ऐसी आग शॉर्ट सर्किट, ओवरलोडिंग या मौसम की वजह से लग सकती है, लेकिन अभी तक आग लगने का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
चंदनसिंह गुर्जर: एक कर्मचारी की नायाब बहादुरी इस आपात स्थिति में रेलवे विभाग के सीनियर कर्मचारी चंदनसिंह गुर्जर ने अपनी जान की परवाह किए बिना मोर्चा संभाला। गुर्जर, जो मारवाड़ जंक्शन स्टेशन पर विद्युत विभाग में तैनात हैं, तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले एसी कोच को पूरी तरह खाली करवाया, ताकि कोई यात्री खतरे की जद में न रहे। यात्रियों को सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर उतारने में उनकी भूमिका अहम रही। इसके बाद, बिना एक पल गंवाए, वे खुद कोच के ऊपर चढ़ गए। हाथ में अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) थामे गुर्जर ने आग पर काबू पाने की कोशिश की।"आग तेजी से फैल रही थी, लेकिन मैंने सोचा कि अगर अभी नहीं रोका तो बड़ा नुकसान हो जाएगा," गुर्जर ने बाद में बताया। लगभग 10-15 मिनट की जद्दोजहद के बाद उन्होंने आग को पूरी तरह बुझा दिया। इस दौरान स्टेशन पर मौजूद अन्य स्टाफ ने भी सहयोग किया, लेकिन गुर्जर की पहल ही निर्णायक साबित हुई। उनकी इस बहादुरी के लिए रेलवे प्रशासन ने उन्हें सम्मानित करने का ऐलान किया है। गुर्जर के इस कार्य ने न केवल यात्रियों की जान बचाई, बल्कि ट्रेन के संचालन में देरी को भी न्यूनतम रखा।