250 साल पुरानी हवेली से निकलीं दो तिजोरियां, ठेकेदार पर एक लेकर भागने का आरोप; खजाने की चर्चा तेज

जयपुर की 250 साल पुरानी बंबई वालों की हवेली से खुदाई के दौरान दो पुरानी तिजोरियां मिलने का दावा किया गया है। परिवार ने आरोप लगाया कि ठेकेदार एक छोटी तिजोरी चोरी-छिपे अपने साथ ले गया, जबकि हवेली के नए मालिक ने खजाना मिलने की बात को अफवाह बताते हुए कहा कि तिजोरी में केवल कचरा मिला। मामले को लेकर परिवार, मालिक और पुलिस के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
July 19, 2026 • 4:27 PM  5
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राजस्थान
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250 साल पुरानी हवेली से निकलीं दो तिजोरियां, ठेकेदार पर एक लेकर भागने का आरोप; खजाने की चर्चा तेज
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250 साल पुरानी हवेली से निकलीं दो तिजोरियां, ठेकेदार पर एक लेकर भागने का आरोप; खजाने की चर्चा तेज

जयपुर। राजधानी जयपुर के परकोटा क्षेत्र स्थित करीब 250 साल पुरानी 'बंबई वालों की हवेली' से दो पुरानी तिजोरियां निकलने के दावे के बाद इलाके में खजाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हवेली से जुड़े परिवार का आरोप है कि दीवार तोड़ने के दौरान निकली दो तिजोरियों में से एक छोटी तिजोरी को ठेकेदार और जेसीबी चालक चोरी-छिपे अपने साथ ले गए, जबकि दूसरी बड़ी तिजोरी मौके पर ही छोड़ दी गई। दूसरी ओर, वर्तमान मालिक ने इन दावों को अफवाह बताते हुए कहा है कि तिजोरी में केवल कचरा मिला और किसी तरह का खजाना नहीं निकला।

परिवार का कहना है कि यह हवेली उनके पूर्वजों की थी और उनकी दादी अक्सर बताया करती थीं कि हवेली में गुप्त तहखाने और सोने-चांदी का खजाना दबा हुआ है। इसी वजह से तिजोरियां मिलने के बाद परिवार को संदेह है कि हवेली में अब भी बहुमूल्य संपत्ति छिपी हो सकती है।

छत से देखा तिजोरी ले जाते हुए

हवेली के पीछे रहने वाले एक युवक ने दावा किया कि शुक्रवार सुबह वह अपने चाचा के साथ घर की छत पर था। उसी दौरान जेसीबी से हवेली के अंतिम हिस्से की दीवार तोड़ी जा रही थी। मलबे के साथ एक बड़ी और एक छोटी तिजोरी बाहर निकली। युवक का आरोप है कि छोटी तिजोरी को ठेकेदार और जेसीबी चालक तुरंत एक्टिवा पर रखकर वहां से ले गए, जबकि बड़ी तिजोरी वहीं छोड़ दी गई।

दादी बताती थीं हवेली में दबा है खजाना

हवेली से जुड़े राकेश अग्रवाल ने बताया कि यह पुश्तैनी हवेली करीब 250 साल पुरानी है, जिसे वर्ष 1925 में उनके दादा सूरजमल अग्रवाल ने खरीदा था। वे पेशे से ज्वेलर थे। राकेश का कहना है कि उनकी दादी अक्सर हवेली में बने गुप्त तहखानों और सोने-चांदी के भंडार की बातें किया करती थीं। इसलिए उन्हें पूरा विश्वास है कि हवेली में अभी भी खजाना हो सकता है।

परिवार का दावा- पुलिस तिजोरी ले गई, पुलिस ने किया इनकार

परिवार का आरोप है कि बड़ी तिजोरी को पुलिस थाने ले गई थी, लेकिन बाद में बताया गया कि उसमें कुछ नहीं मिला। हालांकि, माणक चौक थाना पुलिस ने ऐसे किसी भी मामले की जानकारी होने से इनकार किया है। थाना प्रभारी का कहना है कि पुलिस कोई तिजोरी थाने लेकर नहीं आई और न ही इस संबंध में कोई मामला दर्ज है।

खरीदार बोला- तिजोरी में केवल कचरा मिला

हवेली के नए खरीदार रमेश नारनोली ने खजाना मिलने की खबरों को महज अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह हवेली अपने दो अन्य साझेदारों रामवतार अग्रवाल और कमल रूपानी के साथ इसी वर्ष अप्रैल में खरीदी थी। हवेली के कुल 13 हिस्सेदार थे और अब इसे तोड़कर नया निर्माण किया जाना है।

नारनोली के अनुसार, पुरानी तिजोरी को खुलवाने में करीब 400 रुपये खर्च किए गए, लेकिन उसके अंदर केवल कचरा निकला। उन्होंने कहा कि किसी तरह का सोना, चांदी या अन्य कीमती सामान नहीं मिला।

दोनों मामलों में एक ही ठेकेदार पर आरोप

हवेली से जुड़े परिवार ने आरोप लगाया है कि इस हवेली को तोड़ने का काम महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू खटीक को दिया गया था। उनका दावा है कि छह महीने पहले विद्याधर के रास्ते स्थित एक अन्य हवेली की खुदाई भी इसी ठेकेदार ने की थी। उस मामले में भी खजाना मिलने और उसके गायब होने के आरोप लगे थे।

परिवार का कहना है कि उस हवेली से 45 किलो चांदी और सोने से भरे 15 कलश मिलने की चर्चा हुई थी, जिन्हें कथित रूप से ठेकेदार गायब कर गया। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि जयपुर के परकोटा क्षेत्र की अधिकांश पुरानी हवेलियों को तोड़ने का काम यही ठेकेदार करता है। ऐसे में पिछले वर्षों में तोड़ी गई सभी पुरानी हवेलियों से निकले सामान की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

फिलहाल खजाना मिलने की चर्चाओं और आरोप-प्रत्यारोप के बीच पुलिस का कहना है कि उसके पास इस मामले की कोई आधिकारिक शिकायत नहीं है, जबकि परिवार अपने दावों पर कायम है। ऐसे में मामला अभी भी रहस्य और विवाद के घेरे में बना हुआ है।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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