पचपदरा रिफाइनरी का मास्टरप्लान! यूनिवर्सिटीज़ की ज़मीनों पर नजर, जानिए क्या है सरकार की पूरी तैयारी

बाड़मेर की पचपदरा रिफाइनरी को लेकर राजस्थान में दो बड़े फैसले लिए गए हैं। रिफाइनरी से निकलने वाले पेट्रोल-डीजल को बेचने के लिए सरकार राजस्थान यूनिवर्सिटी और MBM यूनिवर्सिटी समेत प्रदेश के बड़े कॉलेजों की खाली जमीनों पर पेट्रोल पंप खोलने जा रही है। वहीं दूसरी तरफ, पचपदरा रिफाइनरी के कच्चे माल से जयपुर में 150 करोड़ रुपये की लागत से पॉलीफिल्म प्लांट लगाया जाएगा, जिससे अब राज्य की सरकारी डेयरियों के लिए दूध की पैकेजिंग थैलियां खुद RCDDF तैयार करेगा।

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TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Editor
July 22, 2026 • 2:35 PM  139
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पचपदरा रिफाइनरी का मास्टरप्लान! यूनिवर्सिटीज़ की ज़मीनों पर नजर, जानिए क्या है सरकार की पूरी तैयारी
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पचपदरा रिफाइनरी का मास्टरप्लान! यूनिवर्सिटीज़ की ज़मीनों पर नजर, जानिए क्या है सरकार की पूरी तैयारी

जयपुर। बाड़मेर के पचपदरा में बन रही एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी (HRRL) को लेकर राजस्थान सरकार ने दो ऐसे बड़े फैसले लिए हैं, जो सीधे तौर पर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और डेयरी उद्योग की सूरत बदलने वाले हैं। एक तरफ पचपदरा रिफाइनरी से निकलने वाले पेट्रोल और डीजल को बेचने के लिए प्रदेश के बड़े-बड़े कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज की जमीनों का इस्तेमाल किया जाएगा, तो दूसरी तरफ इसी रिफाइनरी के कच्चे माल (Raw Material) से अब आपके घर आने वाली दूध की थैली भी तैयार होगी।

जयपुर में ₹150 करोड़ का पॉलीफिल्म प्लांट: दूध की हर थैली पर लिखा होगा 'मेड इन RCDDF'

राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDDF) ने दूध पैकेजिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब जयपुर में करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक पॉलीफिल्म प्लांट लगाया जाएगा।

कॉलेजों की जमीनों पर खुलेंगे पेट्रोल पंप: रिफाइनरी का तेल बेचने की बड़ी तैयारी

दूसरा बड़ा फैसला रिफाइनरी से निकलने वाले ईंधन (पेट्रोल-डीजल) को घर-घर पहुँचाने के लिए रिटेल नेटवर्क फैलाने को लेकर है। पचपदरा रिफाइनरी से हर साल करीब 9 मिलियन मीट्रिक टन क्रूड ऑयल रिफाइन होगा, जिसमें से 4 मिलियन मीट्रिक टन पेट्रोल-डीजल सीधे बाज़ार में बेचा जाएगा।

इसके लिए सरकार को तुरंत अच्छी लोकेशंस पर ज़मीनों की ज़रूरत है, जिसकी भरपाई के लिए यूनिवर्सिटीज़ और कॉलेजों की खाली पड़ी ज़मीनों को चिह्नित किया जा रहा है:

  • राजस्थान यूनिवर्सिटी (जयपुर): RU कैंपस के पास अलग-अलग 3 जगहों पर करीब 1-1 बीघा ज़मीन चिह्नित की गई है।

  • एमबीएम यूनिवर्सिटी (जोधपुर): जोधपुर की मशहूर MBM यूनिवर्सिटी की जमीन पर भी सर्वे चल रहा है।

  • अन्य संस्थान: अजमेर का गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, जोधपुर का गवर्नमेंट इंजीनियरिंग ट्रेनिंग सेंटर सहित कई संस्थानों से उनकी उपलब्ध जमीन की रिपोर्ट मांगी गई है।

सरकार का दावा है कि इन दोनों फैसलों से राजस्थान में औद्योगिक क्रांति आएगी—डेयरी सेक्टर आत्मनिर्भर बनेगा और शिक्षण संस्थानों को पेट्रोल पंप की लीज से अच्छी कमाई होगी। लेकिन इसके सिक्के का दूसरा पहलू कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Editor

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