राजस्थान में पंचायत चुनाव 15 अप्रैल 2026 से पहले होंगे या नहीं? राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार के बीच टकराव, ओबीसी आरक्षण पर अड़चन

राजस्थान में पंचायत चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक होने की संभावना कमजोर है। राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार से सभी सीटों का आरक्षण (SC/ST/OBC/जनरल) तय कर सूचित करने को कहा, लेकिन सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट न मिलने का हवाला देकर इनकार कर दिया। आयोग ने मध्य प्रदेश केस का जिक्र कर चेतावनी दी कि OBC सीटों को जनरल मानकर चुनाव हो सकते हैं। ओबीसी आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा कि पंचायती राज विभाग से मिले जनसंख्या आंकड़े अपूर्ण और गलत हैं (कई पंचायतों में OBC जनसंख्या शून्य दिखाई गई)। इससे आरक्षण निर्धारण रुका है और चुनाव टलने या कोर्ट में देरी की याचिका की आशंका है। 21 जिलों में पहले ही प्रशासक लगे हैं, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
March 11, 2026 • 10:32 AM  3.1k
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राजस्थान में पंचायत चुनाव 15 अप्रैल 2026 से पहले होंगे या नहीं? राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार के बीच टकराव, ओबीसी आरक्षण पर अड़चन
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11 Mar 2026
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राजस्थान में पंचायत चुनाव 15 अप्रैल 2026 से पहले होंगे या नहीं? राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार के बीच टकराव, ओबीसी आरक्षण पर अड़चन

राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) के चुनाव को लेकर स्थिति अभी भी अस्पष्ट बनी हुई है। राज्य हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, इन चुनावों को 15 अप्रैल 2026 तक पूरा करना अनिवार्य है, लेकिन ओबीसी आरक्षण निर्धारण में देरी और जनसंख्या आंकड़ों की कमियों के कारण यह समयसीमा पालन करना मुश्किल लग रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने सरकार को कई बार चिट्ठी लिखकर आरक्षण तय करने को कहा है, जबकि सरकार ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का हवाला देकर इनकार कर रही है।

कोर्ट के आदेश और समयसीमा

राजस्थान हाईकोर्ट ने नवंबर 2025 में लगभग 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पंचायत और निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक कराए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने भी परिसीमन से जुड़ी याचिकाओं को खारिज कर इस डेडलाइन को बरकरार रखा है। कोर्ट ने परिसीमन प्रक्रिया को 31 दिसंबर 2025 तक पूरा करने को कहा था, लेकिन आरक्षण संबंधी मुद्दों ने पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया है।

राज्य निर्वाचन आयोग की चिट्ठी और सरकार का रुख

राज्य निर्वाचन आयोग ने 24 दिसंबर 2025 को पंचायतीराज विभाग को पत्र लिखकर सभी सीटों का आरक्षण निर्धारित कर सूची सौंपने को कहा था।सरकार ने मार्च 2026 के पहले सप्ताह में जवाब दिया कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट अभी तैयार नहीं हुई है, इसलिए आरक्षण तय नहीं हो सकता।इसके बाद आयोग ने 9 मार्च 2026 को फिर चिट्ठी लिखी, जिसमें मध्य प्रदेश के एक मामले का हवाला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में मध्य प्रदेश प्रकरण में कहा था कि यदि ओबीसी आरक्षण तय नहीं होता, तो ओबीसी सीटों को जनरल मानकर चुनाव कराए जा सकते हैं।आयोग ने चेतावनी दी है कि हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना न हो, इसलिए सभी वर्गों (SC, ST, OBC, जनरल) का आरक्षण तय कर सूचित किया जाए।

ओबीसी आरक्षण में देरी के मुख्य कारण

ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में विलंब — आयोग का गठन मई 2025 में हुआ था, लेकिन रिपोर्ट अभी तक नहीं सौंपी गई। आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर बताया कि पंचायतीराज विभाग से प्राप्त जनसंख्या आंकड़े अपूर्ण और त्रुटिपूर्ण हैं। उदाहरण: 403 ग्राम पंचायतों में OBC जनसंख्या 'शून्य' दिखाई गई।कई पंचायतों में 1-500 या 501-1000 तक ही आंकड़े दिए गए, जो वास्तविक नहीं लगते।इससे वार्ड पंच पदों के लिए OBC आरक्षण तय करना असंभव हो गया है।सरकार का तर्क — सरकार कह रही है कि आरक्षण ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही होगा, और रिपोर्ट नहीं मिलने तक कुछ नहीं किया जा सकता। पंचायतीराज विभाग में चुनाव की कोई ठोस तैयारी नजर नहीं आ रही।

चुनाव टलने की संभावनाएं और विकल्प

यदि ओबीसी आरक्षण तय नहीं होता, तो चुनाव टल सकते हैं या कोर्ट में सरकार याचिका दायर कर देरी की मांग कर सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ओबीसी रिपोर्ट में देरी का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है।कुछ रिपोर्ट्स में दावा है कि चुनाव मार्च-अप्रैल में नहीं, बल्कि नवंबर 2026 में हो सकते हैं, लेकिन यह पुष्ट नहीं है और कोर्ट की डेडलाइन का उल्लंघन होगा।विकल्प: मध्य प्रदेश मॉडल की तरह OBC सीटों को जनरल मानकर चुनाव कराना, लेकिन यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील है।

वर्तमान स्थिति और राजनीतिक बयानबाजी

21 जिलों (जैसे जैसलमेर, उदयपुर, बाड़मेर, अजमेर आदि) में जिला परिषदों और पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, जहां प्रशासक (जिला कलेक्टर) लगे हैं।12 मूल जिलों + 4 नए जिलों (कुल 16) में कार्यकाल बाकी है।कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर चुनाव टालने का आरोप लगाया है, कहा कि ओबीसी आयोग सरकार के इशारे पर काम कर रहा है।बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पलटवार किया कि चुनाव आयोग कराएगा, हम तैयार हैं; विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आरोप लगा रहा है।

कुल मिलाकर, 15 अप्रैल 2026 से पहले चुनाव होने की संभावना कमजोर है क्योंकि आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया रुकी हुई है। यदि आयोग और सरकार के बीच जल्द समझौता नहीं होता या कोर्ट में देरी की अनुमति नहीं मिलती, तो चुनाव टलने या आंशिक रूप से (बिना OBC आरक्षण के) कराने की स्थिति बन सकती है। स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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