नौवीं में नहीं, छठी से शुरू हो तीसरी भाषा की पढ़ाई; CBSE नीति पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि 9वीं कक्षा में तीसरी भाषा शुरू करना छात्रों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

Kashish Sain
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
July 16, 2026 • 2:29 PM  7
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नौवीं में नहीं, छठी से शुरू हो तीसरी भाषा की पढ़ाई; CBSE नीति पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
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नौवीं में नहीं, छठी से शुरू हो तीसरी भाषा की पढ़ाई; CBSE नीति पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि छात्रों के लिए 9वीं कक्षा पहले से ही एक तनावपूर्ण समय होता है, ऐसे में उसी दौरान तीसरी भाषा शुरू करना उनके ऊपर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

जस्टिस नागरत्ना ने सुझाव दिया कि तीसरी भाषा की पढ़ाई छठी कक्षा से शुरू करना ज्यादा बेहतर होगा, ताकि छात्रों को इसे सीखने के लिए पर्याप्त समय मिल सके और आगे चलकर उन पर पढ़ाई का बोझ न बढ़े।

तमिलनाडु सरकार की याचिका पर हुई सुनवाई

दरअसल, यह मामला तमिलनाडु सरकार की उस अपील से जुड़ा है, जिसमें मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) खोलने की सुविधा देने का निर्देश दिया था।

तमिलनाडु सरकार लंबे समय से जवाहर नवोदय विद्यालयों में लागू तीन-भाषा नीति को लेकर आपत्ति जताती रही है। राज्य का कहना है कि भाषा नीति को लेकर उसकी अपनी चिंताएं हैं।

'तीसरी भाषा सिर्फ हिंदी नहीं है'

सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार के वकील ने तीन-भाषा नीति को लेकर अपनी बात रखी। इस पर जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि नीति में तीसरी भाषा के रूप में केवल हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि इसमें राज्य की भाषा, अंग्रेजी और एक तीसरी भाषा पढ़ाने की बात है। जस्टिस नागरत्ना ने सवाल किया कि अगर तीसरी भाषा हिंदी की जगह संस्कृत हो तो क्या परेशानी होगी?

9वीं कक्षा में भाषा शुरू करने पर जताई चिंता

सुनवाई के दौरान जब बताया गया कि तीसरी भाषा कक्षा 9 से अनिवार्य होती है, तो जस्टिस नागरत्ना ने इस पर चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि "नौवीं कक्षा पहले से ही तनावपूर्ण होती है। आप नौवीं में नई भाषा क्यों शुरू करते हैं? इसे छठी कक्षा से शुरू करना चाहिए।"

उन्होंने अपने स्कूल के दिनों का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके समय में मिडिल स्कूल से ही तीसरी भाषा पढ़ाई जाती थी। छात्रों को अलग-अलग भाषाओं के विकल्प दिए जाते थे, जिससे भाषा सीखना आसान हो जाता था।

NEP में भाषा थोपने की बात नहीं

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी राज्य पर कोई भाषा थोपी नहीं जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाषा सीखने का उद्देश्य छात्रों के ज्ञान को बढ़ाना होना चाहिए, न कि उन पर किसी तरह का दबाव डालना।

सीबीएसई नीति पर रोक लगाने से इनकार

गौरतलब है कि सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई जनहित याचिकाएं लंबित हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सीबीएसई की इस नीति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

Kashish Sain

Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

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