"मेरे बड़े राजनीतिक लिंक हैं..." पॉडकास्ट में कबूलनामे के बाद नपे स्वतंत्र भारद्वाज, छुट्टी के दिन जज के घर लगी अदालत; 24 घंटे में कैसे पलटा पूरा केस?

दिल्ली की अदालत ने जंतर-मंतर पर नाबालिग कार्यकर्ता के पिता से मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा। मामले में पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।

yashaswani
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
September 5, 2026 • 9:32 PM  849
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"मेरे बड़े राजनीतिक लिंक हैं..." पॉडकास्ट में कबूलनामे के बाद नपे स्वतंत्र भारद्वाज, छुट्टी के दिन जज के घर लगी अदालत; 24 घंटे में कैसे पलटा पूरा केस?
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"मेरे बड़े राजनीतिक लिंक हैं..." पॉडकास्ट में कबूलनामे के बाद नपे स्वतंत्र भारद्वाज, छुट्टी के दिन जज के घर लगी अदालत; 24 घंटे में कैसे पलटा पूरा केस?

दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। यह मामला जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की एक नाबालिग कार्यकर्ता के पिता के साथ हुई कथित मारपीट से जुड़ा है।

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से भारद्वाज को हिरासत में लिया था। यह कार्रवाई CJP कार्यकर्ताओं द्वारा संसद मार्ग थाने के बाहर आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी की मांग को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन के कुछ ही घंटों बाद अमल में लाई गई।

FIR में SC/ST और POCSO एक्ट की धाराएं शामिल

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) में कई गंभीर धाराएं जोड़ी हैं। पुलिस के अनुसार, नाबालिग कार्यकर्ता के पिता पर कथित हमले के मामले में अब एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) की धाराएं शामिल की गई हैं। इसके अलावा मामले में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

जज के आवास पर हुई पेशी, पीड़ित पक्ष के वकील ने उठाए सवाल

शनिवार दोपहर करीब 2 बजे स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर के समक्ष उनके आवास पर पेश किया गया।

पीड़िता (निशु आज़ाद) के वकील ऋषभ रंजन ने पेशी के तरीके को "अजीब" बताते हुए अदालत की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। अधिवक्ता रंजन ने सोशल मीडिया मंच पर लिखा:

"पटियाला हाउस कोर्ट के तहत दोपहर करीब 1:45 बजे आरोपी को जज के आवास पर पेश किया गया और उसके लिए विशेष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) की व्यवस्था की गई। जज अदालत कक्ष में नहीं बैठे थे। हमें इस बात की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि कौन सी नई धाराएं जोड़ी गई हैं और पुलिस ने कितने दिनों की रिमांड मांगी थी।"

बचाव पक्ष के वकील ने दी सफाई

दूसरी ओर, आरोपी भारद्वाज के वकील उमेश शर्मा ने पूरी स्थिति पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के नियमित मजिस्ट्रेट, जो आमतौर पर ऐसे मामलों की सुनवाई करते हैं, वे छुट्टी पर थे। पहले सूचना दी गई थी कि आरोपी को लिंक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा।

अधिवक्ता उमेश शर्मा ने कहा:

"चूंकि मामले में एससी/एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट की धाराएं जोड़ दी गई थीं, इसलिए जांच अधिकारी (IO) ने आरोपी को सक्षम सत्र अदालत/न्यायाधीश के समक्ष वर्चुअली या व्यक्तिगत रूप से पेश किया। इसके बाद अदालत ने आरोपी को एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया।"

वायरल पॉडकास्ट से शुरू हुआ था विवाद

स्वतंत्र भारद्वाज का मामला तब सामने आया जब एक वीडियो पॉडकास्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में भारद्वाज ने खुद यह दावा किया था कि उसने प्रदर्शनकारी नाबालिग के पिता के साथ मारपीट की थी। वीडियो में वह अपने राजनीतिक संपर्कों और रसूख की शेखी बघारता भी नजर आया था, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई थी।

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yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor

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