सोनू कंवर: बाल विवाह के खिलाफ राजस्थान की एक प्रेरणादायक आवाज

भांवता गांव की सोनू कंवर ने बाल विवाह के खिलाफ मुहिम छेड़कर दर्जनों विवाह रुकवाए, अपनी स्कूटी पर गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करती हैं। उनकी कहानी साहस और सामाजिक बदलाव की प्रेरणा है

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
July 26, 2025 • 3:29 PM  397
राजस्थान
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सोनू कंवर: बाल विवाह के खिलाफ राजस्थान की एक प्रेरणादायक आवाज
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26 Jul 2025
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सोनू कंवर: बाल विवाह के खिलाफ राजस्थान की एक प्रेरणादायक आवाज

राजस्थान के अजमेर जिले के छोटे से गांव भांवता में एक ऐसी महिला रहती हैं, जिनका जीवन साहस, संघर्ष और सामाजिक बदलाव की एक जीवंत मिसाल है। सोनू कंवर राठौड़, जिन्हें आज लोग एक नन्हा सा गांव बदलाव की प्रतीक के रूप में जानते हैं, ने न केवल अपने दर्द को ताकत में बदला, बल्कि समाज की गहरी जड़ों में बसी कुरीति—बाल विवाह—के खिलाफ एक मजबूत लड़ाई छेड़ दी। स्कूटी पर सवार, कानों के पीछे पल्लू बांधे, और कलाइयों पर रंग-बिरंगी चूड़ियां पहने सोनू की पैनी निगाहें हर उस परिवार तक पहुंचती हैं, जहां बाल विवाह की तैयारियां हो रही हों। उनकी कहानी न केवल प्रेरणा देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि दृढ़ संकल्प के आगे कोई रुकावट टिक नहीं सकती।

एक दर्दनाक शुरुआत

सोनू कंवर की कहानी उस वक्त शुरू होती है, जब वह महज 12 साल की थीं। उस उम्र में, जब बच्चे खेल-कूद और पढ़ाई में मगन रहते हैं, सोनू का विवाह कर दिया गया। उनके पिता ने उनकी बड़ी बहन की शादी के साथ ही उनकी भी शादी तय कर दी। परिवार में जश्न और संगीत के शोर के बीच सोनू की छोटी सी आवाज दब गई। वह बताती हैं, “मुझे समझ ही नहीं था कि शादी क्या होती है। मेरी आवाज को कोई सुनने वाला नहीं था।” उनके पति लक्ष्मण सिंह भी उस वक्त नाबालिग थे। इस बाल विवाह ने दोनों की जिंदगी को मुश्किलों से भर दिया।

17 साल की उम्र में सोनू ने एक साथ तीन बच्चियों को जन्म दिया। अपनी बेटियों के चेहरों को देखते ही उनके मन में एक संकल्प जागा—उनकी बेटियां और कोई भी लड़की उस दर्द से नहीं गुजरेगी, जो उन्होंने झेला। सोनू कहती हैं, “जब मैंने अपनी बेटियों को देखा, तो मैंने ठान लिया कि मैं उनके अधिकारों की रक्षा करूंगी। मैं नहीं चाहती थी कि उनकी जिंदगी भी मेरी तरह बाल विवाह की भेंट चढ़े।”

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