जोधपुर में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विहिप राजस्थान क्षेत्र के विधि प्रमुख एवं राजस्थान उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने कहा कि यह विधेयक अशांत क्षेत्रों में बढ़ते जनसांख्यिकीय असंतुलन, अवैध कब्जों, जबरन संपत्ति बिक्री और सामाजिक अस्थिरता पर प्रभावी रोक लगाने में सहायक सिद्ध होगा।
एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं राज्य मंत्रिमंडल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय आम नागरिकों, विशेषकर स्थायी निवासियों और किरायेदारों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का प्रमाण है।
एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने बताया कि प्रस्तावित कानून के तहत अशांत क्षेत्रों में संपत्ति की खरीद-फरोख्त से पहले जिला प्रशासन की अनुमति अनिवार्य होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि संपत्ति का लेन-देन वास्तविक बाजार मूल्य पर हो और किसी भी व्यक्ति को दबाव, भय या अवैध गतिविधियों के कारण अपनी संपत्ति बेचने के लिए मजबूर न किया जाए।
प्रदेश में ऐसे 86 से अधिक क्षेत्रों की पहचान की जा चुकी है, जहां एक निश्चित अवधि में सामाजिक असंतुलन, अवैध गतिविधियां और कानून-व्यवस्था की चुनौतियां सामने आई हैं। इस संदर्भ में एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने कहा कि विधेयक के कानून बनने के बाद इन क्षेत्रों में राष्ट्रविरोधी और असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने स्पष्ट किया कि इस कानून के अंतर्गत बेनामी लेन-देन, जबरन संपत्ति बिक्री और बिना अनुमति आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक या औद्योगिक उपयोग पर पूर्ण रोक लगेगी। साथ ही महिलाओं एवं आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रशासनिक व्यवस्था पर जोर देते हुए एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने कहा कि अशांत क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पर्याप्त पुलिस चौकियों की स्थापना और सरकारी व सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों पर कठोर कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
एडवोकेट मोती सिंह राजपुरोहित ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद लंबे समय से इस प्रकार के कानून की मांग कर रही थी और संगठन इस विधेयक को पूर्ण समर्थन देता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कानून राजस्थान में शांति, सामाजिक संतुलन और सुरक्षित वातावरण स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा।