राजस्थान में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत चल रही वाटरशेड विकास परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर केंद्र सरकार ने नाराजगी जताई है। केंद्रीय भूमि संसाधन विभाग एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर परियोजनाओं में हो रही देरी और धनराशि के कम उपयोग पर चिंता व्यक्त की है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कार्यों की वर्तमान गति जारी रही तो सितंबर 2026 तक भी सभी परियोजनाओं का पूरा होना मुश्किल दिखाई देता है।
हालांकि निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद कार्य पूर्ण नहीं हो सके। परियोजनाओं के महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार ने समय सीमा को छह माह बढ़ाकर सितंबर 2026 तक कर दिया है।
1990 करोड़ की योजना, खर्च हुआ सिर्फ 71 प्रतिशत
इन परियोजनाओं की कुल लागत 1990.36 करोड़ रुपए निर्धारित की गई थी। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 1194.22 करोड़ रुपए है।
मंत्रालय के अनुसार राज्य सरकार ने अब तक केंद्र से केवल 859.80 करोड़ रुपए, यानी लगभग 72 प्रतिशत राशि का ही दावा किया है। वहीं मार्च 2026 तक कुल परियोजना लागत का सिर्फ 71.40 प्रतिशत यानी 1421.11 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए हैं।
पहली तिमाही की राशि भी पूरी खर्च नहीं हुई
योजना की अवधि बढ़ाने के बाद केंद्र सरकार ने अप्रैल से सितंबर 2026 के लिए पहली तिमाही की 85.03 करोड़ रुपए की किश्त जारी की थी।
लेकिन मंत्रालय के अनुसार राज्य सरकार ने अप्रैल से 15 जून तक केवल 31.33 करोड़ रुपए ही खर्च किए हैं, जो कुल राशि का महज 37 प्रतिशत है।
केंद्र ने पत्र में कहा है कि खर्च और कार्य निष्पादन की वर्तमान स्थिति संतोषजनक नहीं है और इससे परियोजनाओं के समय पर पूरा होने की संभावना कमजोर पड़ रही है।
क्या है WDC-PMKSY 2.0 योजना?
वाटरशेड विकास घटक-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (WDC-PMKSY 2.0) का उद्देश्य वर्षा जल संरक्षण और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
राजस्थान में इस योजना के तहत—
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खेतों में जल संग्रहण टैंक बनाना,
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नालों पर एनीकट और चेक डैम निर्माण,
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खेतों में मेडबंदी,
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चारागाह विकास,
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बंजर भूमि पर चारा उत्पादन,
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पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण,
जैसे कार्य किए जाते हैं।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना, भूजल स्तर सुधारना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है। योजना में कुल लागत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करती है।
सितंबर 2026 की डेडलाइन पर सवाल
केंद्रीय मंत्रालय ने अपने पत्र में संकेत दिया है कि यदि कार्यों की रफ्तार नहीं बढ़ाई गई तो सितंबर 2026 तक भी सभी परियोजनाओं का पूरा होना कठिन होगा। ऐसे में अब राज्य सरकार के सामने लंबित कार्यों को समय पर पूरा करने और आवंटित राशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने की चुनौती है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार और ग्रामीण विकास को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं।