भारत का असली महानायक , सुचित्रा सेन संग 29 हिट फिल्में, एक घटना ने डराया तो छोड़ा कोलकाता
उत्तम कुमार, बंगाली सिनेमा के पहले सुपरस्टार और महानायक, जिन्होंने संघर्षों से शुरूआत कर सुपरहिट फिल्मों और सत्यजीत रे की नायक जैसी कालजयी कृतियों से अमर पहचान बनाई। उनकी लोकप्रियता का सम्मान कोलकाता के 'महानायक उत्तम कुमार' मेट्रो स्टेशन के रूप में आज भी जीवित है।
3 सितंबर को बंगाली सिनेमा के पहले सुपरस्टार और महानायक उत्तम कुमार की जयंती है। बॉलीवुड में जहां अमिताभ बच्चन को 'सदी का महानायक' कहा जाता है, वहीं उत्तम कुमार ने बंगाली सिनेमा में वह मुकाम हासिल किया, जिसने उन्हें इस उपाधि का पहला हकदार बनाया। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि कोलकाता के टॉलीगंज मेट्रो स्टेशन का नाम उनके सम्मान में 'महानायक उत्तम कुमार' रखा गया। आइए, उनके जीवन, संघर्ष, और सिनेमा में अतुलनीय योगदान की कहानी को करीब से जानते हैं।
साधारण शुरुआत से सुपरस्टार तक का सफर
1926 में कोलकाता के एक साधारण बंगाली परिवार में जन्मे उत्तम कुमार का असली नाम अरुण कुमार चटोपाध्याय था। बचपन से ही कला और अभिनय के प्रति उनका रुझान था। घर का माहौल ऐसा था कि थिएटर और कला उनके जीवन का हिस्सा बन गए। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ने उन्हें क्लर्क की नौकरी करने को मजबूर किया। दिन में ऑफिस और शाम को थिएटर—उत्तम कुमार का यह जुनून ही था, जिसने उन्हें सिनेमा की दुनिया में कदम रखने के लिए प्रेरित किया।
हालांकि, उनकी शुरुआत आसान नहीं थी। उत्तम ने एक के बाद एक सात फ्लॉप फिल्में दीं, जिसके बाद उन्हें 'फ्लॉप जनरल मास्टर' तक कहा जाने लगा। लेकिन हार मानना उनकी फितरत में नहीं था। 1952 में आई बंगाली फिल्म बासु परिवार ने उनके करियर को पहली बार सफलता का स्वाद चखाया। इसके बाद 1953 में Sharey Chuattor ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। इस फिल्म में उनकी जोड़ी अभिनेत्री सुचित्रा सेन के साथ बनी, जिन्हें उत्तम अपनी 'लकी चार्म' मानते थे।