नशा तस्करी के दोषी को 10 साल की सख्त सजा: अजमेर कोर्ट का कड़ा फैसला, 20 किलो गांजे के साथ पकड़े गए रामकिशन गुर्जर पर एक लाख का जुर्माना

अजमेर की एनडीपीएस विशेष अदालत ने भिनाय क्षेत्र के रामकिशन गुर्जर को बस स्टैंड से 20 किलो 100 ग्राम गांजा के साथ पकड़े जाने के मामले में 10 साल कठोर कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त 6 माह की जेल होगी।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
November 20, 2025 • 4:35 PM  36
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नशा तस्करी के दोषी को 10 साल की सख्त सजा: अजमेर कोर्ट का कड़ा फैसला, 20 किलो गांजे के साथ पकड़े गए रामकिशन गुर्जर पर एक लाख का जुर्माना
“नशा तस्करी के दोषी को 10 साल की सख्त सजा: अजमेर कोर्ट का कड़ा फैसला, 20 किलो गांजे के साथ पकड़े गए रामकिशन गुर्जर पर एक लाख का जुर्माना”
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नशा तस्करी के दोषी को 10 साल की सख्त सजा: अजमेर कोर्ट का कड़ा फैसला, 20 किलो गांजे के साथ पकड़े गए रामकिशन गुर्जर पर एक लाख का जुर्माना

अजमेर, 20 नवंबर 2025: नशीली दवाओं के खिलाफ देशव्यापी अभियान के तहत राजस्थान के अजमेर जिले की एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांसेज) विशेष अदालत ने एक बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। भिनाय थाना क्षेत्र के चापानेरी गांव के निवासी रामकिशन गुर्जर को 20 किलोग्राम 100 ग्राम गांजे की तस्करी के आरोप में 10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 1 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया है। यदि आरोपी यह जुर्माना समय पर नहीं भर पाता है, तो उसे अतिरिक्त 6 महीने की जेल काटनी होगी। यह फैसला नशा तस्करी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मिसाल कायम करता है और अपराधियों के लिए चेतावनी का संदेश देता है।

घटना का पूरा विवरण: बस स्टैंड पर नशे की बड़ी खेप पकड़ी यह मामला मई 2024 का है, जब अजमेर के व्यस्त बस स्टैंड पर सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता ने एक बड़ा नशा तस्करी रैकेट को धर दबोचा था। स्थानीय पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति नशीले पदार्थों की बड़ी मात्रा में तस्करी करने की फिराक में हैं। तत्कालीन जांच के दौरान भिनाय थाने की टीम ने चापानेरी गांव के 45 वर्षीय रामकिशन गुर्जर को हिरासत में लिया। उसके कब्जे से करीब 20 किलोग्राम 100 ग्राम गांजा बरामद किया गया, जो बाजार मूल्य के हिसाब से लाखों रुपये का था। गांजा को प्लास्टिक पाउचों में पैक करके छिपाया गया था, जो स्पष्ट रूप से व्यावसायिक तस्करी का संकेत देता था।पुलिस के अनुसार, रामकिशन गुर्जर स्थानीय स्तर पर नशा तस्करी के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। वह गांजे की आपूर्ति राजस्थान के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक करता था, जहां युवाओं और अन्य लोगों के बीच इसका वितरण होता था। बस स्टैंड को चुने जाने का कारण शायद भीड़-भाड़ और आसान आवागमन था, जिससे तस्करों को लगता था कि वे बच निकल जाएंगे। लेकिन सघन निगरानी और त्वरित कार्रवाई ने उनकी सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद रामकिशन के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया, जो नशीले पदार्थों की तस्करी पर सबसे सख्त कानून है।

अदालत की कार्यवाही: विशेष न्यायाधीश का ऐतिहासिक फैसला एनडीपीएस विशेष अदालत में चले लंबे मुकदमे के बाद यह सजा सुनाई गई। विशेष न्यायाधीश डॉ. रेनू श्रीवास्तव ने सुनवाई के दौरान सभी सबूतों, गवाहों के बयानों और फोरेंसिक रिपोर्टों का बारीकी से परीक्षण किया। अदालत में पेश किए गए प्रमाणों से साबित हुआ कि आरोपी न केवल गांजे के कब्जे में था, बल्कि इसे बेचने और वितरित करने की योजना बना रहा था। न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा, "नशा तस्करी समाज के लिए एक महामारी है, जो युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रही है। ऐसे अपराधों पर कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।" फैसले में जुर्माने की राशि को भी सख्ती से लागू किया गया है। एक लाख रुपये का जुर्माना न भुगताने पर अतिरिक्त 6 महीने की सजा का प्रावधान आरोपी को आर्थिक रूप से भी दंडित करने का माध्यम है। यह फैसला अजमेर जिले में नशा तस्करी के खिलाफ चल रही मुहिम को मजबूती प्रदान करता है, जहां पिछले एक वर्ष में दर्जनों ऐसे मामले पकड़े गए हैं।

नशा तस्करी का व्यापक प्रभाव: समाज पर खतरा यह घटना राजस्थान में नशे के बढ़ते कारोबार की पोल खोलती है। गांजा जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह सामाजिक बुराई भी है जो परिवारों को तहस-नहस कर देती है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों से शहरों तक फैला यह नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर काम करता है, जिसके चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए पुलिस और अदालतों की सतत सतर्कता जरूरी है। अजमेर पुलिस ने इस फैसले के बाद अन्य संदिग्धों पर नजरें तरेरना शुरू कर दिया है।रामकिशन गुर्जर के परिवार ने फैसले पर निराशा जताई है, लेकिन उन्होंने कहा कि वे कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे। दूसरी ओर, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस सजा का स्वागत किया है और सरकार से अपील की है कि ऐसे मामलों में और तेजी से कार्रवाई हो। एनडीपीएस एक्ट के तहत न्यूनतम 10 वर्ष की सजा ही इस तरह के अपराधों के लिए निर्धारित है, जो इस फैसले को न्यायपूर्ण बनाता है।

 

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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