अलवर में सरकारी शिक्षक की दुखद आत्महत्या: रिटायरमेंट से 5 महीने पहले सुसाइड नोट में लगाए गंभीर आरोप

अलवर जिले के निर्भमपुरा गांव में सरकारी शिक्षक बड्डन लाल बलाई (59) ने रविवार को फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उनकी सेवा निवृत्ति मात्र 5 महीने बाद 30 जून 2026 को होने वाली थी। 4 पेज के सुसाइड नोट में उन्होंने माइंड स्ट्रोक से हुई शारीरिक-मानसिक कमजोरी, अत्यधिक कार्यभार (पुस्तक वितरण, परीक्षा, चुनाव ड्यूटी), प्रधानाचार्यों और सहकर्मी शिक्षकों द्वारा मजाक उड़ाने, शराब पीकर गाली-गलौज, सहयोग न करने और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया। नोट में परिवार को अंतिम प्रणाम और दोषियों को सजा की मांग की गई है। पुलिस जांच कर रही है।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
February 9, 2026 • 12:30 PM  151
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राजस्थान
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अलवर में सरकारी शिक्षक की दुखद आत्महत्या: रिटायरमेंट से 5 महीने पहले सुसाइड नोट में लगाए गंभीर आरोप
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अलवर में सरकारी शिक्षक की दुखद आत्महत्या: रिटायरमेंट से 5 महीने पहले सुसाइड नोट में लगाए गंभीर आरोप

अलवर जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत निर्भमपुरा गांव में रविवार (9 फरवरी 2026) दोपहर लगभग 2 बजे एक हृदयविदारक घटना घटी। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ढेहलावास में कार्यरत 59 वर्षीय शिक्षक बड्डन लाल बलाई ने घर से करीब 100 मीटर दूर बाड़े के टीन शेड में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की सेवा निवृत्ति मात्र 5 महीने बाद 30 जून 2026 को होने वाली थी।

घटना स्थल से 4 पेज का सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें शिक्षक ने अपनी गंभीर मानसिक और शारीरिक स्थिति, अत्यधिक कार्यभार, स्कूल स्टाफ द्वारा प्रताड़ना, मजाक उड़ाने और शराब पीकर गाली-गलौज करने का विस्तृत जिक्र किया है। नोट में प्रधानाचार्यों और सहकर्मी शिक्षकों पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने परिवार की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। एएसआई प्रकाश चंद ने जांच की पुष्टि की है।

शिक्षक की पृष्ठभूमि और स्वास्थ्य स्थिति

बड्डन लाल बलाई गांव निर्भमपुरा, अकबरपुर पंचायत समिति, तहसील मालाखेड़ा, जिला अलवर के निवासी थे। वे पिछले 25 वर्षों से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ढेहलावास (पंचायत समिति उमरेण) में अध्यापक पद पर कार्यरत थे। कुल राजकीय सेवा लगभग 38 वर्ष की थी।

4-5 वर्ष पहले बड़े बेटे की शादी से 2 दिन पहले उन्हें गंभीर माइंड स्ट्रोक आया था, जिससे शरीर का आधा हिस्सा पैरालाइज्ड हो गया, मुंह टेढ़ा हो गया और आंखों की रोशनी बहुत कम हो गई। वे बारात में भी नहीं जा सके। इलाज के लिए डॉक्टर पंकज शर्मा (न्यूरोलॉजिस्ट) और जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल की डॉक्टर भावना शर्मा से सलाह ली गई। डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि सुधार सीमित रहेगा, दवाइयां जीवन भर लेनी पड़ेंगी और बौद्धिक क्षमता कमजोर रह सकती है। हाल की जांच में मात्र 30% सुधार दिखा, लेकिन शिक्षक को कुछ भी समझ नहीं आता था।

परिवार में 11 सदस्य हैं, जिसमें तीन पढ़े-लिखे बेटे नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और सभी उनके आश्रित हैं। इसलिए वे अनिवार्य सेवानिवृत्ति भी नहीं ले पाए। उनके पास 600 दिन HPL (हाफ पे लीव) अवकाश बाकी थे और रिटायरमेंट से पहले 115 वर्किंग दिन थे, लेकिन कार्यभार के कारण नहीं ले पा रहे थे।

सुसाइड नोट में लिखी प्रमुख 7 बातें

शिक्षक ने नोट में अपनी पीड़ा को विस्तार से बयां किया:रिटायरमेंट की तिथि: 30 जून 2026 को रिटायर होने वाले थे, लेकिन फरवरी-अप्रैल 2026 में परीक्षा और पंचायत चुनाव के दबाव से परेशान।स्वास्थ्य संकट और बेटे की शादी: माइंड स्ट्रोक के बाद बेटे की बारात में नहीं जा सके, बेटा रोता हुआ गया। इलाज के बावजूद सुधार नहीं हुआ।कार्यभार और समझने में असमर्थता: कुछ समझ नहीं आता, क्या करना है पता नहीं। PEEO ढेहलावास नोडल के 8 विद्यालयों का निशुल्क पाठ्यपुस्तक, वर्क बुक, लाइब्रेरी चार्ज; स्वयं के स्कूल में कक्षा 1 से 12 तक चार्ज। प्रधानाचार्यों (सुनीता बाई, गायत्री जी, ए.के. मिश्रा) से अनुरोध किया कि कार्यभार किसी को सौंप दें, लेकिन कोई नहीं सुना।

मानसिक प्रताड़ना और मजाक: बहुत दुखी, नींद-खाना छूट गया। स्टाफ कहता- "कैसे भी करो, आप जानो आपका काम जाने।" मजाक उड़ाया जाता था। सत्र 2025-26 में पुस्तकें बांटने में खुद के पैसे से 20 चक्कर लगाए।प्रधानाचार्यों की अनदेखी: सुनीता बाई ने कहा- "ट्रांसफर हो जाऊंगी, आने वाला जाने।" गायत्री जी ने प्रमोशन का हवाला दिया। सीमा गुप्ता (अध्यापिका) ने रिजल्ट की परवाह नहीं की।

शराब और गाली-गलौज: कुछ शिक्षक (प्रत्येकेंद्र सिंह, रोशन लाल) शराब पीकर गाली देते, धमकाते- "हमारी पहुंच ऊंची है, नौकरी खा जाएंगे, रिटायरमेंट नहीं देंगे।" रिजल्ट बनाने से इनकार किया।

आत्महत्या के लिए मजबूर होना: अवकाश नहीं ले पा रहे, मदद नहीं मिली, चार्ज नहीं सौंपा गया। माइंड स्ट्रोक बढ़ रहा था, चिंतन क्षमता खत्म। ईश्वर से अनुरोध- दोषियों को कड़ी सजा मिले, शिक्षा विभाग कार्रवाई करे। अंत में परिवार (धर्मपत्नी संतोष देवी, बेटे, पुत्रवधुएं, पोतियां, भाई मामचंद, सुरेंद्र कुमार) और ग्रामवासियों को प्रणाम व माफी मांगी।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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