अयोध्या राम मंदिर में 19 मार्च को ऐतिहासिक श्री राम यंत्र स्थापना: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि, 9000 विशिष्ट मेहमान और 300+ संत शामिल, चैत्र नवरात्रि पर वैदिक अनुष्ठान शुरू
मार्च 2026 को अयोध्या राम मंदिर के दूसरे तल पर श्री राम यंत्र की विधिवत स्थापना होगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि रहेंगी। 300+ संत और 9000 विशिष्ट मेहमान शामिल, नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठान शुरू, अभिजीत मुहूर्त में 11:55 बजे स्थापना, आध्यात्मिक ऊर्जा प्रसार और शांति का संदेश।
अयोध्या (उत्तर प्रदेश), 17 मार्च 2026: रामनगरी अयोध्या में एक और ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण की तैयारी जोरों पर है। 19 मार्च 2026 को श्री राम जन्मभूमि मंदिर के दूसरे तल (कुछ रिपोर्ट्स में तीसरे तल के रूप में उल्लेख) पर 'श्री राम यंत्र' की विधिवत स्थापना होगी। इस भव्य कार्यक्रम में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। राम मंदिर ट्रस्ट ने देशभर के संतों, आचार्यों और विशिष्ट अतिथियों को निमंत्रण भेजना शुरू कर दिया है। इसमें 300 से अधिक संत और करीब 9000 विशेष मेहमान शामिल होंगे।
यह आयोजन चैत्र नवरात्रि के पहले दिन, वर्ष प्रतिपदा (हिंदू नववर्ष) के शुभ अवसर पर हो रहा है। राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, श्री राम यंत्र की स्थापना के लिए नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठान पहले से ही शुरू हो चुके हैं। दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के विद्वान आचार्य इन अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुबह करीब 11 बजे मंदिर पहुंचेंगी। वे सबसे पहले रामलला के चरणों में शीश झुकाएंगी, फिर राम दरबार में दर्शन करेंगी और अभिजीत मुहूर्त में ठीक 11:55 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्री राम यंत्र की स्थापना करेंगी। राष्ट्रपति लगभग चार घंटे मंदिर परिसर में रहेंगी और श्री राम नाम मंदिर की स्थापना भी करेंगी।
श्री राम यंत्र क्या है? यह एक विशेष ज्यामितीय आकृति है, जो वैदिक गणित और ज्यामिति के आधार पर तैयार की गई है। शास्त्रों के अनुसार, यंत्र देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। यह यंत्र सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करता है और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि यह यंत्र दो साल पहले विजयेंद्र सरस्वती द्वारा शोभायात्रा के साथ अयोध्या लाया गया था। वर्तमान में इसका नियमित पूजन हो रहा है और 19 मार्च को इसे मंदिर के दूसरे तल पर स्थापित किया जाएगा। ट्रस्ट का कहना है कि यह विश्व का पहला दुर्लभ 'श्री राम यंत्र' है, जिसकी स्थापना से आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रसार होगा और विश्व में शांति व सद्भाव का संदेश जाएगा।