लेंसकार्ट में मचा बवाल… स्टोर्स में घुसे प्रदर्शनकारी, कर्मचारियों को पहनाया तिलक-कलावा, जानिए पूरा मामला

लेंसकार्ट की कथित ड्रेस कोड पॉलिसी वायरल होने के बाद देशभर में विरोध तेज हो गया है… कई जगह स्टोर्स पर प्रदर्शन, तिलक-कलावा पहनाने की घटनाएं और विवाद बढ़ता जा रहा है, जानिए पूरा मामला।

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TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026Editor
April 22, 2026 • 4:25 PM  20
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लेंसकार्ट में मचा बवाल… स्टोर्स में घुसे प्रदर्शनकारी, कर्मचारियों को पहनाया तिलक-कलावा, जानिए पूरा मामला
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लेंसकार्ट में मचा बवाल… स्टोर्स में घुसे प्रदर्शनकारी, कर्मचारियों को पहनाया तिलक-कलावा, जानिए पूरा मामला

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

आईवियर कंपनी लेंसकार्ट एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। मामला तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर कंपनी की कथित ड्रेस कोड पॉलिसी का एक डॉक्यूमेंट वायरल हो गया।

इस डॉक्यूमेंट में दावा किया गया कि कर्मचारियों के लिए बिंदी, तिलक, कलावा और बुर्का जैसे धार्मिक प्रतीकों पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए हैं। हालांकि हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दिए जाने की बात भी सामने आई। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर कंपनी की नीति पर सवाल उठने लगे और विवाद तेजी से फैल गया।

 देशभर में भड़का विरोध प्रदर्शन

विवाद बढ़ने के बाद कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में अलग-अलग जगहों पर लोगों ने लेंसकार्ट स्टोर्स के बाहर प्रदर्शन किया।

कई स्थानों पर प्रदर्शनकारी स्टोर्स के अंदर पहुंचे और कर्मचारियों को तिलक लगाया तथा कलावा बांधा। कुछ जगहों पर नारेबाजी और बहस की स्थिति भी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

 कंपनी का आधिकारिक बयान

विवाद बढ़ने के बाद लेंसकार्ट के सह-संस्थापक पीयूष बंसल ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि वायरल हुआ डॉक्यूमेंट पुराना है और कंपनी की वर्तमान नीति को दर्शाता नहीं है।

पीयूष बंसल के अनुसार, लेंसकार्ट एक समावेशी कंपनी है जो सभी धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं का सम्मान करती है। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में हजारों कर्मचारी अपनी धार्मिक पहचान के साथ काम कर रहे हैं और उन्हें किसी प्रकार की रोक नहीं है।

 विरोध के बीच बढ़ा सियासी और सामाजिक तनाव

इस विवाद में सामाजिक और धार्मिक संगठनों की भी एंट्री हो गई है। कई जगहों पर लोगों ने इसे धार्मिक पहचान से जोड़कर विरोध जताया।

इस बीच बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी बयान देते हुए कंपनी की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर भारत में ऐसी नीतियां होंगी तो कंपनी को अन्य देशों में काम करना चाहिए।

 वायरल ड्रेस कोड पॉलिसी में क्या था दावा?

सोशल मीडिया पर वायरल डॉक्यूमेंट में कई दावे किए गए, जिनमें कहा गया कि:

  • महिला कर्मचारियों के लिए बिंदी और क्लचर पर रोक
  • बुर्का पहनकर स्टोर में काम करने की मनाही
  • हिजाब और पगड़ी पर कुछ शर्तें लागू
  • धार्मिक प्रतीकों को लेकर ड्रेस कोड नियम

इन्हीं बातों ने विवाद को और गहरा कर दिया और लोगों में नाराजगी बढ़ गई।

 लेंसकार्ट का बिजनेस और विस्तार

लेंसकार्ट की शुरुआत 2010 में हुई थी और आज यह भारत की सबसे बड़ी आईवियर कंपनियों में शामिल है। कंपनी के देशभर में 2500 से ज्यादा स्टोर्स हैं और इसका मार्केट वैल्यू हजारों करोड़ रुपये में है।

कंपनी का बिजनेस मॉडल ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों पर आधारित है, जहां ग्राहक घर बैठे चश्मे ट्राई कर सकते हैं और स्टोर में जाकर आंखों की जांच भी करवा सकते हैं।

 मौजूदा स्थिति और कंपनी का रुख

विवाद बढ़ने के बाद कंपनी ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी किया है कि उनकी नीति सभी कर्मचारियों के लिए समान और सम्मानजनक है।

लेंसकार्ट ने यह भी कहा है कि वायरल डॉक्यूमेंट उनकी वर्तमान गाइडलाइन नहीं है और किसी भी धर्म या परंपरा के खिलाफ कोई भेदभाव नहीं किया जाता।

 निष्कर्ष

फिलहाल यह मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। कई जगहों पर अभी भी चर्चा और बहस जारी है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक इस विवाद ने बड़ा रूप ले लिया है और अब सभी की नजर कंपनी के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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