सिर्फ 162 वोटों से मिली हार, और बदले में गांव वालों ने थाल में सजाकर दे दिए 25 लाख रुपये
नागौर की भदौरा ग्राम पंचायत में सरपंच चुनाव हारने के बाद भी ग्रामीणों ने प्रत्याशी चिड़ी देवी और उनके पति हेमाराम को 25 लाख रुपये भेंट किए।



नागौर की मूंडवा पंचायत समिति के तहत आने वाली भदौरा ग्राम पंचायत में सरपंच चुनाव का एक बेहद अनोखा और सकारात्मक मामला सामने आया है। यहां मोड़ी गांव की निवासी चिड़ी देवी चुनाव जरूर हार गईं, लेकिन गांव वालों ने उनका ऐसा भव्य सम्मान किया जो जीत से भी बड़ा साबित हुआ। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से 25 लाख रुपये इकट्ठा किए और गाड़ियों के काफिले के साथ उनके घर पहुंचकर यह राशि उनके पति हेमाराम राव को भेंट की।
समाज सेवा ने जीता ग्रामीणों का दिल
चिड़ी देवी (45) एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं और उनके पति हेमाराम राव खेती करते हैं। क्षेत्र में उनकी पहचान एक बड़े समाज सेवक के रूप में है। करीब दो साल पहले उन्होंने गांव की गोशाला को एक ट्रैक्टर भेंट किया था। इसके अलावा उन्होंने गांव में एक प्याऊ बनवाई और बोरवेल खुदवाने की भी घोषणा की थी। इसी निस्वार्थ सेवा से प्रभावित होकर, भदौरा ग्राम पंचायत सीट महिला आरक्षित होने पर मोड़ी गांव के लोगों ने आपसी सहमति से चिड़ी देवी को अपना प्रत्याशी चुना था।
162 वोटों के करीबी अंतर से मिली हार
सरपंच पद के इस चुनाव में चिड़ी देवी का मुकाबला भदौरा गांव के रिटायर्ड थानेदार माधोसिंह की पुत्रवधू गिरिजा सान्दू से था। चुनाव परिणामों में गिरिजा सान्दू को 1317 वोट मिले, जबकि चिड़ी देवी को 1155 वोट प्राप्त हुए। इस प्रकार चिड़ी देवी मात्र 162 वोटों के अंतर से चुनाव हार गईं।
"जीतेगा तो गांव जीतेगा, हारेगा तो गांव हारेगा"
चुनाव परिणाम आने के बाद मोड़ी गांव के ग्रामीणों ने एक सभा बुलाई। उन्होंने तय किया कि हार-जीत से ऊपर गांव की एकता है। आपसी सहयोग से 25 लाख रुपये जुटाए गए। इसके बाद भारी संख्या में ग्रामीण गाड़ियों में सवार होकर हेमाराम के घर पहुंचे। गले में माला और सिर पर साफा पहनाकर उनका स्वागत किया गया और रुपयों से भरा थाल उन्हें सौंपा गया।
इस अभूतपूर्व सम्मान पर भावुक होते हुए हेमाराम राव ने कहा, "सरपंच नहीं बन पाने का मलाल मन में था, लेकिन गांव के लोगों ने इस पल को गर्व और खुशी में बदल दिया है। पद मिले या नहीं, पूरे गांव का साथ और अपनापन ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।" वहीं, ग्रामीणों ने भी संदेश दिया कि चुनाव में हार-जीत अपनी जगह है, लेकिन आपसी भाईचारा और सामाजिक एकता इससे कहीं बड़ी है।












































