कारगिल की वो रात... जब 10 भारतीय जवानों ने मौत की घाटी में रच दिया इतिहास!

1999 के कारगिल युद्ध के दौरान, जब पाकिस्तानी सेना ने 18,000 फीट की बर्फीली ऊंचाई पर 100 से अधिक भारतीय चौकियों पर कब्जा जमा लिया था, तब तत्कालीन मेजर (अब सेवानिवृत्त कर्नल) मोहन सिंह धुपालिया और उनके 10 जांबाज जवानों को एक गुप्त और आत्मघाती मिशन सौंपा गया। बिना अपनी जान की परवाह किए, यह छोटी सी टुकड़ी दुश्मन के इलाके के बेहद अंदर घुसी, पाकिस्तान की मुख्य सप्लाई लाइन को पूरी तरह तबाह किया और एक जेसीओ समेत 4 पाक सैनिकों को ढेर कर दिया। इस बेमिसाल बहादुरी ने युद्ध की पूरी बाजी पलट दी—लेकिन 27 साल बाद भी, कारगिल की खामोश पहाड़ियों में छुपा एक अनसुलझा सवाल आज भी हमें सोचने पर मजबूर कर देता है...

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TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Editor
July 26, 2026 • 1:11 PM  16
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कारगिल की वो रात... जब 10 भारतीय जवानों ने मौत की घाटी में रच दिया इतिहास!
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26 Jul 2026
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कारगिल की वो रात... जब 10 भारतीय जवानों ने मौत की घाटी में रच दिया इतिहास!

16 से 18 हजार फीट की हाड़ कंपा देने वाली बर्फानी ऊंचाई... चारों तरफ गहरी खाइयां और सिर पर सीधे निशाने साधता दुश्मन! साल 1999 की तपती गर्मियों में जब पूरा देश चैन की नींद सो रहा था, तब कारगिल की बर्फीली पहाड़ियों पर भारत के जांबाज इतिहास का सबसे कठिन युद्ध लड़ रहे थे। पाकिस्तान को लगा था कि उसने 100 से ज्यादा चोटियों पर कब्जा करके भारत को बैकफुट पर धकेल दिया है। लेकिन उसे अंदाज़ा नहीं था कि भारतीय सेना के पास ऐसे वीर सिपाही हैं, जो भूखे-प्यासे रहकर भी मौत के मुंह से जीत छीन लाते हैं। ऐसी ही एक अनसुनी और दिल दहला देने वाली दास्तान है सेवानिवृत्त कर्नल (तत्कालीन मेजर) मोहन सिंह धुपालिया की, जिन्होंने महज 10 जवानों के साथ दुश्मन के इलाके में घुसकर वो कारनामा कर दिखाया, जिसने कारगिल युद्ध (Kargil War 1999) का रुख ही बदल दिया।

जब खाली चौकियों का फायदा उठाकर पाकिस्तान ने पीठ में घोंपा छुरा

कारगिल युद्ध की खौफनाक पटकथा 1998-99 की सर्दियों में लिखी गई थी। कर्नल मोहन सिंह धुपालिया बताते हैं कि उस वक्त एक पुराना सैन्य प्रोटोकॉल था—नवंबर और दिसंबर में जब -30 से -40 डिग्री तापमान और भारी बर्फबारी होती थी, तो भारतीय और पाकिस्तानी दोनों सेनाएं अपनी बेहद ऊंची चौकियों को खाली करके नीचे आ जाती थीं। मौसम ठीक होने पर गर्मियों में सैनिक वापस लौटते थे।

लेकिन 1999 की सर्दियों में पाकिस्तान ने नीचता की सारी हदें पार कर दीं।

TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Editor

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