भारत छोड़ो आंदोलन की वो वीरांगना: जिसे पूरा देश 'गांधी बुड़ी' के नाम से जानता है

"स्वतंत्रता दिवस विशेष: जानिए 72 वर्षीय वीरांगना मातंगिनी हाजरा (गांधी बुड़ी) की अमर शहादत की कहानी, जिन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में ब्रिटिश पुलिस की गोलियों के सामने तिरंगा थामे सर्वोच्च बलिदान दिया।"

kratika Jethwani
kratika Jethwani Sub Editor
August 14, 2026 • 5:04 PM | तामलुक  56
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भारत छोड़ो आंदोलन की वो वीरांगना: जिसे पूरा देश 'गांधी बुड़ी' के नाम से जानता है
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भारत छोड़ो आंदोलन की वो वीरांगना: जिसे पूरा देश 'गांधी बुड़ी' के नाम से जानता है

स्वतंत्रता दिवस विशेष: 72 साल की उम्र में गोलियां खाकर भी तिरंगा थामे रहीं 'गांधी बुड़ी' मातंगिनी हाजरा

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जब-जब अदम्य साहस और बलिदान की बात होती है, वीरांगना मातंगिनी हाजरा का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिया जाता है। बंगाल में लोग उन्हें प्यार और आदर से 'गांधी बुड़ी' (वृद्ध गांधी महिला) कहकर पुकारते थे।

प्रारंभिक जीवन और संघर्ष: मातंगिनी हाजरा का जन्म 19 अक्टूबर 1870 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले में तामलुक के पास होगला गांव के एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। निर्धनता के कारण उन्हें कोई औपचारिक शिक्षा नहीं मिल सकी। मात्र 12 वर्ष की उम्र में उनका विवाह त्रिलोचन हाजरा से हुआ, लेकिन 18 वर्ष की अल्पायु में ही वे निःसंतान विधवा हो गईं।

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