करण सिंह शेखावत का कहना है कि आरोपी अलवर जेल में बंद होने के बावजूद पिछले करीब दो महीनों से मोबाइल और व्हाट्सएप कॉल के जरिए उनसे संपर्क कर रहा है। कॉल पर आरोपी खुलेआम धमकी देता है कि यदि उन्होंने केस में उसके खिलाफ गवाही देना बंद नहीं किया, तो उनका परिवार भी उसी तरह खत्म कर दिया जाएगा जैसे पहले गीता देवी की बहू और मासूम बच्चों की हत्या की गई थी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी को करण सिंह के परिवार की हर छोटी-बड़ी गतिविधि की जानकारी रहती है। करण सिंह के मुताबिक, आरोपी कॉल पर उनके बच्चों की गतिविधियों तक का जिक्र करता है कौन बच्चा घर से बाहर गया, क्या सामान लेकर आया और परिवार के सदस्य कहां आ-जा रहे हैं। इससे परिवार को शक है कि कोई उनकी निगरानी कर रहा है या आरोपी जेल के अंदर से किसी नेटवर्क के जरिए उन पर नजर रखवा रहा है।
इन धमकियों के बाद पूरा परिवार गहरे डर और मानसिक तनाव में जी रहा है। करण सिंह ने बताया कि वे लगातार तनाव और डर के कारण काम पर भी नहीं जा पा रहे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है और मानसिक दबाव इतना बढ़ चुका है कि उन्हें डिप्रेशन की दवाइयां लेनी पड़ रही हैं।
करण सिंह की पत्नी रितु कंवर ने भी गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि वे हर पल अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर डरी रहती हैं। उन्होंने कहा कि जिस आरोपी पर पहले से दो मासूम बच्चों की बेरहमी से हत्या करने का आरोप है, उससे किसी भी तरह की अनहोनी की आशंका बनी हुई है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने कई बार पुलिस प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से सुरक्षा की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो उनके साथ भी बड़ी घटना हो सकती है।
रितु कंवर ने प्रशासन को सीधे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनके बच्चों या परिवार के किसी सदस्य को कुछ भी होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन और जेल विभाग की होगी।
इस पूरे मामले ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जेल के अंदर बंद आरोपी के पास मोबाइल फोन कैसे पहुंचा? वह व्हाट्सएप कॉल कैसे कर रहा है? और बाहर बैठे लोगों की गतिविधियों की जानकारी उसे कौन दे रहा है? ये सवाल अब जांच एजेंसियों और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं।