“PM की 7 अपीलों पर राहुल गांधी ने क्यों कहा की ‘ये नीति नहीं, नाकामी है’… जानिए पूरा मामला
पश्चिम एशिया संकट के बीच पीएम मोदी की 7 अपीलों पर राहुल गांधी के तीखे बयान ने सियासत गरमा दी है… क्या यह आर्थिक मजबूरी है या सरकार की विफलता का संकेत? देश में उठ रहा है सबसे बड़ा सवाल!
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
May 11, 2026 • 12:29 PM 87
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राजनीति
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““PM की 7 अपीलों पर राहुल गांधी ने क्यों कहा की ‘ये नीति नहीं, नाकामी है’… जानिए पूरा मामला”
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया 7 अपीलों को लेकर विपक्ष और सरकार आमने-सामने आ गए हैं। इन अपीलों में जनता से ईंधन बचाने, विदेशी यात्रा कम करने और सोने की खरीद रोकने जैसे सुझाव शामिल हैं।
राहुल गांधी का बड़ा हमला
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की इन अपीलों पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने इसे “सरकार की विफलता” बताया और कहा कि यह कोई नीति नहीं बल्कि प्रशासनिक कमजोरी का संकेत है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सरकार अब जनता से त्याग की मांग कर रही है, जो यह दिखाता है कि देश को सही दिशा में नहीं चलाया जा रहा है। उन्होंने अपने बयान में कहा “12 साल में देश को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया गया है कि अब सरकार को लोगों को बताना पड़ रहा है कि क्या खरीदें और क्या नहीं।” राहुल गांधी ने तंज कसते हुए इसे “उपदेश नहीं, नाकामी” बताया और कहा कि जब सरकार अपने आर्थिक मॉडल को संभाल नहीं पाती, तो पूरा बोझ जनता पर डाल दिया जाता है।
पीएम मोदी की अपीलें क्या हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक तेल संकट को देखते हुए देशवासियों से कई अहम अपीलें की थीं। इनमें शामिल हैं—
सरकार का कहना है कि इन कदमों से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश आर्थिक दबाव से बच सकेगा।
सरकार का तर्क: क्यों जरूरी हैं ये कदम?
सरकार के अनुसार भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 70% हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर भारत पर पड़ता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक
कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं
ट्रांसपोर्ट महंगा होने से महंगाई बढ़ सकती है
विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है
रुपये की स्थिरता पर असर पड़ सकता है
इसी कारण सरकार का मानना है कि जनता की भागीदारी से ही इस संकट को कम किया जा सकता है।
विपक्ष का आरोप: जिम्मेदारी से भाग रही सरकार
विपक्षी दलों ने सरकार की इन अपीलों को लेकर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार अपनी नीतिगत विफलताओं को छुपाने के लिए जनता पर बोझ डाल रही है। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार और मंत्री बड़े काफिलों और हवाई यात्राओं में खर्च कर रहे हैं, तो आम जनता से त्याग क्यों मांगा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह पूरा कदम राजनीतिक और आर्थिक असंतुलन को छुपाने का प्रयास है।
भारत की आर्थिक तस्वीर
आंकड़े बताते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था पर आयात का बड़ा दबाव है:
कच्चा तेल आयात: लाखों करोड़ रुपये सालाना
सोने का आयात: भारी विदेशी मुद्रा खर्च
विदेश यात्रा: तेजी से बढ़ता खर्च
उर्वरक आयात: लगातार बढ़ती निर्भरता
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक संकट बढ़ता है तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
वैश्विक संकट का असर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अस्थिरता के कारण दुनिया भर में तेल आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है। अगर यह स्थिति और बिगड़ती है तो
तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं
वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है
भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव बढ़ सकता है
यह पूरा मामला अब सिर्फ आर्थिक नीति का नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक तरफ सरकार इसे “राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा” के लिए जरूरी बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे “सरकार की विफलता” करार दे रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ये अपीलें भारत को आर्थिक संकट से बचाने का रास्ता हैं या फिर राजनीतिक टकराव का नया अध्याय?
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
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