राजस्थान युवा संसद में कोचिंग छात्रों की आत्महत्याओं पर गंभीर चर्चा: स्पीकर बोले- डॉक्टर, इंजीनियर या IAS ही सबसे बड़ा नहीं

राजस्थान विधानसभा में आयोजित युवा संसद में सरकारी स्कूलों के छात्रों ने कोचिंग छात्रों की बढ़ती आत्महत्याओं पर गंभीर चिंता जताई। स्पीकर वासुदेव देवनानी ने कहा कि डॉक्टर, इंजीनियर या IAS बनना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं है। छात्रों ने कोचिंग संस्थानों को "आत्महत्या फैक्ट्री" बताया, शिक्षा व्यवस्था पर छात्रों का "मर्डर" करने का आरोप लगाया और मेंटल हेल्थ तथा करियर काउंसलिंग की मांग की।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
December 15, 2025 • 1:27 PM  44
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राजस्थान युवा संसद में कोचिंग छात्रों की आत्महत्याओं पर गंभीर चर्चा: स्पीकर बोले- डॉक्टर, इंजीनियर या IAS ही सबसे बड़ा नहीं
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राजस्थान युवा संसद में कोचिंग छात्रों की आत्महत्याओं पर गंभीर चर्चा: स्पीकर बोले- डॉक्टर, इंजीनियर या IAS ही सबसे बड़ा नहीं

जयपुर।  राजस्थान विधानसभा में आयोजित युवा संसद कार्यक्रम के दौरान कोचिंग छात्रों की बढ़ती आत्महत्याओं का मुद्दा जोर-शोर से उठा। इस कार्यक्रम में सरकारी स्कूलों के 9वीं से 12वीं कक्षा के 164 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। छात्रों ने कोचिंग संस्थानों पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें "आत्महत्या फैक्ट्री" की संज्ञा दी और शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव चतुर्वेदानी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि डॉक्टर, इंजीनियर या भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) बनना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं है। सभी क्षेत्र बराबर हैं और छात्र अपनी रुचि के अनुसार अन्य करियर विकल्प चुन सकते हैं।

स्पीकर का संदेश: करियर के लिए दबाव न लें स्पीकर वासुदेव देवनानी ने युवा संसद को संबोधित करते हुए छात्रों से कहा- "डॉक्टर, इंजीनियर और IAS ही सबसे बड़े खुदा नहीं होते। सब बराबर हैं। आप अपनी रुचि के हिसाब से और भी बहुत से क्षेत्रों में जा सकते हैं।" उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे समाज में व्याप्त इस भ्रम से बाहर निकलें कि केवल ये तीन क्षेत्र ही सफलता की गारंटी हैं। स्पीकर ने जोर दिया कि युवा पीढ़ी को विविध करियर विकल्पों की जानकारी होनी चाहिए ताकि वे अनावश्यक दबाव से मुक्त हो सकें।

छात्र तपिश वैष्णव: कोचिंग सेंटर "आत्महत्या फैक्ट्री" बन रहे छात्र तपिश वैष्णव ने सदन में सबसे तीखा हमला कोचिंग संस्थानों पर किया। उन्होंने कहा- "राजस्थान के कोचिंग सेंटर आत्महत्या फैक्ट्री के नाम से बदनाम होते जा रहे हैं। आज के कोचिंग संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को हर नागरिक के मौलिक अधिकार की जगह विशेषाधिकार बना दिया गया है।" तपिश ने आगे कहा कि कोचिंग संस्थान छात्रों और अभिभावकों पर "गिद्ध दृष्टि" रखते हैं। हर साल लाखों छात्र इन संस्थानों की "आग" में झुलस जाते हैं। अभिभावक बड़े कोचिंग ब्रांड्स के आगे दबकर अपनी इच्छाओं का गला घोंट देते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि एक दिन करियर मेले आयोजित करने से वाहवाही लूटने की बजाय ठोस कदम उठाए जाएं, क्योंकि माता-पिता की उम्मीदें, पढ़ाई का दबाव और कोचिंग का प्रेशर छात्रों की जान ले रहा है।

छात्र गौरव यादव: आत्महत्याएं सभ्य समाज पर कलंक गौरव यादव ने आत्महत्याओं के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा- "स्टूडेंट आत्महत्या के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। यह सिर्फ आंकड़ों का विषय नहीं है। हर आत्महत्या के पीछे एक बुझता हुआ घर और टूटा हुआ परिवार होता है।" उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए दावा किया कि राजस्थान में 2020 में 5000 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की थी, जो अब 13 हजार को पार कर चुकी है। गौरव ने कहा कि ये आत्महत्याएं पूरे सभ्य समाज के मुंह पर कलंक हैं। उन्होंने कारण बताते हुए कहा कि माता-पिता की बढ़ती आकांक्षाएं मानसिक स्वास्थ्य पर दबाव डाल रही हैं। संयुक्त परिवारों का खत्म होना भी एक बड़ा कारण है। पहले दादा-दादी, चाचा-चाची से संस्कार और समाधान मिलता था, लेकिन अब एकल परिवार में बच्चा अकेला पड़ जाता है और अपनी समस्याएं किससे साझा करे?

छात्रा फाल्गुनी यादव: शिक्षा प्रणाली कर रही है "स्टूडेंट का मर्डर" फाल्गुनी यादव ने सबसे भावुक और तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा- "हमारे किशोर महाभारत के अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं। वे तनाव और डिप्रेशन से घिरे हैं, जिससे भविष्य का निर्णय नहीं ले पा रहे। मेंटल हेल्थ के लिए करियर काउंसलिंग की जरूरत है जो सही राह दिखाए। हमारा एजुकेशन सिस्टम स्टूडेंट का मर्डर कर रहा है।" फाल्गुनी ने कोचिंग कल्चर पर हमला बोलते हुए कहा कि बच्चों के अंदर कंपटीशन की आग जला दी गई है। "सवाल यह नहीं कि आग किसने जलाई, सवाल यह है कि सिस्टम ने तीली किसके हाथ में थमाई?" उन्होंने आगे कहा- "सुसाइड की संख्या कोचिंग सेंटर की फीस से मैच करती है। हम बच्चों की मौत सह लेते हैं, लेकिन सिस्टम का कड़वा सच नहीं। हम चार घंटे पढ़ाने पर ध्यान देते हैं, लेकिन मेंटल हेल्थ पर क्यों नहीं? अमेजन या नेटफ्लिक्स की तरह ट्रायल पैक देते हैं, वैसे ही करियर चुनने से पहले ट्रायल पीरियड होना चाहिए।"

पृष्ठभूमि: कोचिंग हब कोटा में आत्महत्याओं की समस्या राजस्थान का कोटा शहर देश का प्रमुख कोचिंग हब है, जहां हर साल लाखों छात्र NEET, JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। हालांकि, यहां छात्रों पर अत्यधिक दबाव के कारण आत्महत्याओं के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। NCRB के 2022 आंकड़ों के अनुसार, भारत में छात्र आत्महत्याएं कुल आत्महत्याओं का लगभग 7.6% हैं, और राजस्थान इस सूची में ऊपरी स्थान पर है। कोटा में 2023 में 26, 2024 में 17 और 2025 की शुरुआत में ही कई मामले दर्ज हो चुके हैं।

 

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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