अब अस्पतालों के चक्कर काटने से मुक्ति! 'पिंक एप्रन' वाली 'प्रसव सखी' रखेंगी ध्यान.

राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के मामलों और अस्पतालों की अव्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए भजनलाल सरकार ने 'प्रसव सखी' योजना शुरू की है। इस व्यवस्था के तहत अस्पतालों में तैनात प्रशिक्षित महिला स्वास्थ्यकर्मी 'पिंक एप्रन' पहनकर मौजूद रहेंगी, जो विशेष रूप से 'हाई रिस्क' गर्भवती महिलाओं का पर्ची बनवाने से लेकर सोनोग्राफी, डॉक्टर परामर्श, डिलीवरी और डिस्चार्ज तक हर कदम पर सहयोग करेंगी। मेडिकल कॉलेज अस्पतालों, जिला अस्पतालों और एफआरयू में लागू की जा रही इस पहल का मकसद परिजनों को काउंटरों के चक्कर काटने से बचाना और प्रसूताओं को समय पर सुरक्षित व सम्मानजनक इलाज मुहैया कराना है।

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TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Editor
July 23, 2026 • 2:44 PM  67
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अब अस्पतालों के चक्कर काटने से मुक्ति! 'पिंक एप्रन' वाली 'प्रसव सखी' रखेंगी ध्यान.
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अब अस्पतालों के चक्कर काटने से मुक्ति! 'पिंक एप्रन' वाली 'प्रसव सखी' रखेंगी ध्यान.

जयपुर: अस्पताल के ठंडे गलियारे, एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक दौड़ते-हांफते घरवाले और प्रसव पीड़ा में तड़पती एक गर्भवती महिला... सरकारी अस्पतालों की यह तस्वीर हममें से कई लोगों ने देखी या सुनी होगी। लेकिन जरा सोचिए, जब कोई महिला डिलीवरी के दर्द में अस्पताल पहुंचे और उसे किसी काउंटर के चक्कर न काटने पड़ें? एक ऐसी मददगार साथ खड़ी हो जो रजिस्ट्रेशन कराने से लेकर डॉक्टर को दिखाने, ब्लड टेस्ट करवाने और सुरक्षित डिलीवरी कराकर घर भेजने तक साये की तरह साथ रहे? राजस्थान की भजनलाल सरकार अब इसी मंशा के साथ एक नई पहल लेकर आई है— 'प्रसव सखी'। हाल ही में अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत और लापरवाही के बढ़ते मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग ने यह बड़ा फैसला लिया है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि यह 'प्रसव सखी' योजना क्या है और इससे मरीजों को क्या फायदा होगा।

क्या है 'प्रसव सखी' योजना?

सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं, खास तौर पर 'हाई रिस्क प्रेगनेंसी' (अत्यधिक जोखिम वाली गर्भावस्था) से जूझ रही महिलाओं को बेहतर, सुरक्षित और संवेदनशील इलाज देने के लिए 'प्रसव सखी' की तैनाती की जा रही है।

अस्पतालों में अब कैसे बदलेंगे हालात?

1. बिना वजह भटकने से मिलेगी आजादी

अक्सर देखा जाता है कि परिजन मरीज को लेबर रूम के बाहर छोड़कर पर्ची बनवाने, टेस्ट रिपोर्ट लेने या डॉक्टर को ढूंढने में काफी वक्त गंवा देते हैं। अब प्रसव सखी मरीज के अस्पताल पहुंचते ही उसका रजिस्ट्रेशन कराने से लेकर ब्लड टेस्ट और सोनोग्राफी जैसी सभी जरूरी जांचें तुरंत पूरा कराने में मदद करेंगी।

2. भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज तक पूरा साथ

प्रसव सखी का काम सिर्फ मरीज को बेड दिलाना नहीं होगा। वे डिलीवरी, बच्चे और मां की देखभाल, विशेषज्ञ डॉक्टरों से तालमेल और मरीज के डिस्चार्ज होने तक पूरी प्रक्रिया में साथ बनी रहेंगी।

3. इमरजेंसी में तुरंत मिलेगा रेफरल

अगर किसी महिला की स्थिति गंभीर होती है और उसे बड़े अस्पताल में भेजने की जरूरत पड़ती है, तो प्रसव सखी बिना किसी कागजी देरी के रेफरल प्रक्रिया को तेजी से पूरा करवाएंगी।

किन-किन अस्पतालों में मिलेगी यह सुविधा?

स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के अनुसार, यह व्यवस्था प्राथमिक रूप से:

  • राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में,

  • सभी जिला अस्पतालों में, और

  • ज्यादा डिलीवरी लोड वाले फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) में लागू की जा रही है।

इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी भी गर्भवती महिला को इलाज के दौरान अस्पतालों में किसी तरह का दुर्व्यवहार या लापरवाही न झेलनी पड़े।

...लेकिन क्या 'पिंक एप्रन' बदल पाएगी अस्पतालों की असली हकीकत? 

कागज पर बनी यह योजना बेहद राहत देने वाली और मानवीय नजर आती है। लेकिन इस पूरी मुहिम के पीछे सबसे बड़ा 'सस्पेंस' यह है कि— क्या सालों से लचर पड़ी सरकारी अस्पतालों की कार्यशैली और कर्मचारियों का ढुलमुल रवैया सिर्फ एक 'पिंक एप्रन' पहना देने से रातों-रात बदल जाएगा? क्या यह 'प्रसव सखी' सचमुच ज़मीनी स्तर पर पीड़ित महिलाओं के लिए देवदूत साबित होगी, या फिर सिस्टम के पुराने ढर्रे में उलझकर केवल एक कागज़ी योजना बनकर रह जाएगी?सरकार ने अपनी तरफ से 'पिंक एप्रन' तैयार कर दिए हैं... अब देखना यह होगा कि राजस्थान की माताओं को अस्पतालों के दरवाजों पर कितना सुकून और सुरक्षा मिल पाती है!

TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Editor

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