अब अस्पतालों के चक्कर काटने से मुक्ति! 'पिंक एप्रन' वाली 'प्रसव सखी' रखेंगी ध्यान.
राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के मामलों और अस्पतालों की अव्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए भजनलाल सरकार ने 'प्रसव सखी' योजना शुरू की है। इस व्यवस्था के तहत अस्पतालों में तैनात प्रशिक्षित महिला स्वास्थ्यकर्मी 'पिंक एप्रन' पहनकर मौजूद रहेंगी, जो विशेष रूप से 'हाई रिस्क' गर्भवती महिलाओं का पर्ची बनवाने से लेकर सोनोग्राफी, डॉक्टर परामर्श, डिलीवरी और डिस्चार्ज तक हर कदम पर सहयोग करेंगी। मेडिकल कॉलेज अस्पतालों, जिला अस्पतालों और एफआरयू में लागू की जा रही इस पहल का मकसद परिजनों को काउंटरों के चक्कर काटने से बचाना और प्रसूताओं को समय पर सुरक्षित व सम्मानजनक इलाज मुहैया कराना है।
जयपुर: अस्पताल के ठंडे गलियारे, एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक दौड़ते-हांफते घरवाले और प्रसव पीड़ा में तड़पती एक गर्भवती महिला... सरकारी अस्पतालों की यह तस्वीर हममें से कई लोगों ने देखी या सुनी होगी। लेकिन जरा सोचिए, जब कोई महिला डिलीवरी के दर्द में अस्पताल पहुंचे और उसे किसी काउंटर के चक्कर न काटने पड़ें? एक ऐसी मददगार साथ खड़ी हो जो रजिस्ट्रेशन कराने से लेकर डॉक्टर को दिखाने, ब्लड टेस्ट करवाने और सुरक्षित डिलीवरी कराकर घर भेजने तक साये की तरह साथ रहे? राजस्थान की भजनलाल सरकार अब इसी मंशा के साथ एक नई पहल लेकर आई है— 'प्रसव सखी'। हाल ही में अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत और लापरवाही के बढ़ते मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग ने यह बड़ा फैसला लिया है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि यह 'प्रसव सखी' योजना क्या है और इससे मरीजों को क्या फायदा होगा।
क्या है 'प्रसव सखी' योजना?
सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं, खास तौर पर 'हाई रिस्क प्रेगनेंसी' (अत्यधिक जोखिम वाली गर्भावस्था) से जूझ रही महिलाओं को बेहतर, सुरक्षित और संवेदनशील इलाज देने के लिए 'प्रसव सखी' की तैनाती की जा रही है।
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कौन होंगी प्रसव सखी? अस्पतालों में पहले से कार्यरत प्रशिक्षित नर्सिंग कर्मी, एएनएम (ANM) और चयनित महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता ही 'प्रसव सखी' की भूमिका निभाएंगी।