करोड़ों की फसलें स्वाहा होने की कगार पर, भगवान और सरकार भरोसे किसान!
राजस्थान में मानसून के कमजोर पड़ने से जैसलमेर, नोहर, पल्लू और पादरू समेत कई इलाकों में खरीफ की फसलें सूखने की कगार पर हैं। किसानों पर आर्थिक संकट गहरा गया है और उन्होंने सरकार से विशेष गिरदावरी व मुआवजे की मांग की है।
राजस्थान में एक बार फिर मानसून कमजोर पड़ गया है। शुरुआती अच्छी बारिश के बाद अब लंबे समय से बारिश न होने के कारण प्रदेश के कई जिलों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। तेज धूप और उमस ने जहां आम जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, वहीं खेतों में लहलहाती खरीफ की फसलें अब बिना पानी के मुरझाने लगी हैं। जैसलमेर से लेकर हनुमानगढ़ के नोहर और पल्लू तक, किसानों की रातों की नींद उड़ गई है।
जैसलमेर में बढ़ा पारा, उमस से लोग बेहाल
जैसलमेर शहर और इसके ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ दिनों से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। यहां अधिकतम तापमान 38.7 डिग्री और न्यूनतम 24.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। सुबह से ही तेज धूप खिलने के कारण दोपहर में बाजार सूने हो जाते हैं। कूलर-पंखे भी गर्मी से राहत नहीं दे पा रहे हैं। इस चिलचिलाती धूप का सबसे बुरा असर ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहां खेतों में खड़ी ग्वार, मूंग, मोठ और बाजरे की फसलें अब पानी की कमी से सूखने की कगार पर हैं।
पादरू और पल्लू का हाल: फलियां आने के समय सूखा
पादरू और पल्लू क्षेत्र के किसानों ने भी मानसून की अच्छी शुरुआत देखकर बड़े पैमाने पर बुवाई की थी। खेतों में फसलें लगभग दो महीने की हो चुकी हैं और अब मूंग-मोठ में फलियां (दाने) आने का अहम समय है। लेकिन लंबे समय से बारिश का गैप आने के कारण खेतों की नमी पूरी तरह खत्म हो गई है।