बीमार पति की देखभाल नहीं करना पड़ा भारी, फैमिली कोर्ट ने मंजूर किया तलाक

जयपुर फैमिली कोर्ट ने बीमार पति की देखभाल नहीं करने और उसके साथ मानसिक व शारीरिक क्रूरता करने को तलाक का पर्याप्त आधार मानते हुए विवाह विच्छेद की अर्जी मंजूर कर ली। अदालत ने कहा कि पत्नी ने वैवाहिक दायित्वों का पालन नहीं किया और ऐसे हालात में दोनों का एक साथ रहना संभव नहीं है।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
July 19, 2026 • 4:01 PM  2
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राजस्थान
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बीमार पति की देखभाल नहीं करना पड़ा भारी, फैमिली कोर्ट ने मंजूर किया तलाक
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बीमार पति की देखभाल नहीं करना पड़ा भारी, फैमिली कोर्ट ने मंजूर किया तलाक

जयपुर की फैमिली कोर्ट ने एक अहम फैसले में बीमार पति की देखभाल नहीं करने और उसके साथ अमानवीय व्यवहार को वैवाहिक क्रूरता मानते हुए तलाक की अर्जी मंजूर कर ली। जयपुर महानगर प्रथम की फैमिली कोर्ट-5 के न्यायाधीश अनीश दाधीच ने अपने आदेश में कहा कि पत्नी ने वैवाहिक दायित्वों का पालन नहीं किया और उसका व्यवहार पति के प्रति मानसिक एवं शारीरिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी परिस्थितियों में दोनों का एक ही छत के नीचे रहकर वैवाहिक जीवन का निर्वहन करना संभव नहीं है।

मैट्रिमोनियल साइट से तय हुआ था रिश्ता

मामले से जुड़े अधिवक्ता दिवेश शर्मा के अनुसार, जयपुर निवासी आईटी प्रोफेशनल युवक और असम की रहने वाली आईटी प्रोफेशनल युवती का रिश्ता एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट के माध्यम से तय हुआ था। दोनों का विवाह 24 नवंबर 2019 को पूरे रीति-रिवाज से संपन्न हुआ। शादी के बाद दोनों दिल्ली में रहने लगे और शुरुआती कुछ समय तक वैवाहिक जीवन सामान्य रहा।

कुछ महीनों बाद बदल गया पत्नी का व्यवहार

पति का आरोप था कि कुछ समय बाद पत्नी का व्यवहार बदल गया। वह बिना किसी ठोस कारण के झगड़ा करने लगी। जब भी पति अपने माता-पिता और परिवार से मिलने की बात करता, पत्नी आत्महत्या की धमकी देकर उसे रोकती थी। दीपावली सहित अन्य पारिवारिक आयोजनों में भी उसने पति के माता-पिता, भाई-भाभी और रिश्तेदारों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया।

तनाव के बीच आया ब्रेन स्ट्रोक

बाद में दोनों नौकरी के सिलसिले में दिल्ली से बेंगलुरु चले गए। पति के अनुसार, वहां भी पत्नी का व्यवहार नहीं बदला। 17 जनवरी 2023 को दोनों के बीच गंभीर विवाद हुआ, जिसके बाद अत्यधिक तनाव के कारण पति को ब्रेन स्ट्रोक (लकवा) आ गया।

18 जनवरी से 18 मार्च 2023 तक पति अस्पताल और रिहैबिलिटेशन सेंटर में भर्ती रहा। इस दौरान पत्नी अस्पताल में बहुत कम पहुंची और उसकी देखभाल का पूरा जिम्मा माता-पिता तथा केयरटेकर ने संभाला। घर लौटने के बाद भी पत्नी ने उसकी देखभाल नहीं की।

माता-पिता के साथ भी किया दुर्व्यवहार

पति ने अदालत को बताया कि बेंगलुरु में इलाज के दौरान पत्नी ने उसके माता-पिता के साथ भी दुर्व्यवहार किया और उन्हें घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। इसके अलावा पत्नी के भाई पर भी पति के साथ मारपीट और मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया गया। अंततः 8 जुलाई 2023 को पति के पिता उसे बेंगलुरु से जयपुर ले आए, जहां वह तब से इलाज करा रहा है। बीमारी के कारण उसकी नौकरी भी छूट गई और वह पूरी तरह अपने माता-पिता पर आश्रित हो गया।

पत्नी कोर्ट में पेश नहीं हुई

पति ने 24 मार्च 2025 को जयपुर फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की। अदालत ने पत्नी को कई बार नोटिस भेजे, यहां तक कि ई-मेल के माध्यम से भी नोटिस तामील कराया गया, लेकिन उसने न तो कोई जवाब दाखिल किया और न ही अदालत में पेश हुई। इसके बाद कोर्ट ने एकपक्षीय सुनवाई शुरू की।

कोर्ट ने क्या कहा

फैमिली कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पति ने जो दस्तावेज, साक्ष्य और तथ्य प्रस्तुत किए, उनका पत्नी की ओर से कोई खंडन नहीं किया गया। न कोई साक्ष्य पेश किया गया और न ही गवाहों से जिरह की गई। ऐसे में पति के आरोपों को विश्वसनीय माना गया।

कोर्ट ने कहा कि बिना किसी उचित कारण के पति से लगातार झगड़ा करना, उसके परिवार का अपमान करना, उसे परिवार से अलग रहने के लिए मजबूर करना तथा गंभीर बीमारी के दौरान उसकी देखभाल नहीं करना मानसिक और शारीरिक क्रूरता है। अदालत ने माना कि पत्नी ने अपने वैवाहिक दायित्वों का निर्वहन नहीं किया और दोनों के बीच वैवाहिक संबंध पूरी तरह टूट चुके हैं। इसी आधार पर अदालत ने पति की तलाक की याचिका स्वीकार कर विवाह विच्छेद का आदेश पारित किया।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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