स्वर्ग का लालच देकर 190 मासूमों को भूखा मारा, पाखंडी धर्मगुरु दोषी
केन्या के शाकाहोला जंगल में अंधविश्वास के नाम पर 190 बच्चों सहित 400 से ज्यादा लोगों को भूखा मारकर स्वर्ग भेजने वाले पादरी पॉल मैकेंजी और उसके 30 साथियों को कोर्ट ने दोषी ठहराया है।



केन्या से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां 'दुनिया खत्म होने से पहले स्वर्ग जाने' का लालच देकर सैकड़ों लोगों को भूखा मारकर मौत के घाट उतारने वाले स्वयंभू धर्मगुरु पॉल मैकेंजी और उसके करीब 30 साथियों को अदालत ने दोषी करार दिया है। इस खौफनाक मामले में 190 बच्चों और एक वयस्क की जान गई थी। इस मामले में आगामी 6 नवंबर को सजा सुनाई जाएगी।
शाकाहोला जंगल में चल रहे इस मौत के खेल का खुलासा तब हुआ जब पुलिस को वहां सामूहिक कब्रें मिलीं। खुदाई के बाद अब तक यहां से 400 से ज्यादा शव निकाले जा चुके हैं। सोमवार को अदालत ने फिलहाल 191 मौतों के मामले में अपना फैसला सुनाया है, जबकि बाकी मौतों की जांच अभी भी जारी है।
तीन चरणों में रची गई थी खौफनाक साजिश
सरकारी वकीलों के अनुसार, मैकेंजी 'गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च' के जरिए एक ऐसा कट्टर ग्रुप चला रहा था जो लोगों को दुनिया खत्म होने का डर दिखाता था। अदालत में खुलासा हुआ कि मैकेंजी ने लोगों को मौत के घाट उतारने के लिए तीन चरणों की खौफनाक योजना बनाई थी:
पहला चरण: सबसे पहले मासूम बच्चों को भूखा रखकर मारा गया।
दूसरा चरण: इसके बाद महिलाओं और युवा लड़कों का नंबर आया।
तीसरा चरण: अंत में बचे हुए बाकी पुरुषों को भूखा रखने की योजना थी।
बच्चों को तड़पता देखते रहे माता-पिता
आठ घंटे से ज्यादा चली सुनवाई के दौरान जज डायना कावेद्जा मोचाचे ने बताया कि यह घटना कितनी क्रूर थी। कुछ मामलों में बच्चों को उनके परिवारों से अलग कर दिया गया और उन्हें खाना-पानी नहीं दिया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि अंधविश्वास में अंधे हो चुके उनके माता-पिता यह सब अपनी आंखों से देखते रहे।
हालांकि, कोर्ट में मैकेंजी और उसकी पत्नी (जो खुद एक आरोपी है) ने हत्या के आरोपों से साफ इनकार किया। मैकेंजी ने दलील दी कि उसने किसी को भूखा रहने के लिए मजबूर नहीं किया, लेकिन अदालत ने उसकी एक नहीं सुनी।
स्कूल-अस्पताल जाने पर थी पाबंदी
मैकेंजी का अपने अनुयायियों पर पूरा कंट्रोल था। वह लोगों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने से रोकता था। बीमारी की हालत में भी किसी को अस्पताल जाने की इजाजत नहीं थी क्योंकि मैकेंजी इन जगहों को 'शैतान का घर' बताता था। उसके अनुयायी शाकाहोला जंगल में प्लास्टिक की चादरों और सूखी घास से बनी झोपड़ियों में रहते थे। मैकेंजी ने इन इलाकों के नाम भी बाइबिल के आधार पर 'यरुशलम' और 'यहूदिया' रखे थे।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
इस घटना ने अपने परिवार के 8 सदस्यों (जिसमें दो नाती-पोते भी शामिल थे) को खोने वाले 62 वर्षीय फ्रांसिस वांजे जैसे कई लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस महाविनाश के बाद केन्या में पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मैकेंजी 2017 से ही विवादों में था और पुलिस ने उसके ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। 2019 में उसका चर्च बंद भी करा दिया गया था, जिसके बाद वह शाकाहोला जंगल में छिपकर अपना नेटवर्क चला रहा था।
इस घटना के बाद केन्या में मांग उठ रही है कि देश में चल रहे चर्च और अन्य धार्मिक संगठनों पर सरकार सख्त निगरानी रखे, ताकि भविष्य में अंधविश्वास के नाम पर ऐसी क्रूरता दोबारा न हो सके।













































