शिक्षा पर भारी नहीं पड़ सकता छात्र राजनीति का जोश राजस्थान हाईकोर्ट ने छात्रसंघ चुनाव की याचिका पर सुनाया अहम फैसला.

राजस्थान हाईकोर्ट ने छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की याचिकाओं को खारिज कर दिया। जस्टिस समीर जैन की पीठ ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव संवैधानिक अधिकार तो है, लेकिन यह शिक्षा के मौलिक अधिकार से ऊपर नहीं हो सकता। NEP-2020 लागू होने और पढ़ाई प्रभावित होने के कारण इस सत्र में चुनाव नहीं होंगे, जिससे छात्रों में निराशा है।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
December 19, 2025 • 11:30 AM  10
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राजस्थान
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शिक्षा पर भारी नहीं पड़ सकता छात्र राजनीति का जोश राजस्थान हाईकोर्ट ने छात्रसंघ चुनाव की याचिका पर सुनाया अहम फैसला.
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19 Dec 2025
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शिक्षा पर भारी नहीं पड़ सकता छात्र राजनीति का जोश राजस्थान हाईकोर्ट ने छात्रसंघ चुनाव की याचिका पर सुनाया अहम फैसला.

जयपुर: राजस्थान में लंबे समय से बंद पड़े छात्रसंघ चुनावों को बहाल करने की मांग को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने छात्रों की याचिकाओं पर विचार करते हुए स्पष्ट कहा कि छात्रसंघ चुनाव निश्चित रूप से एक संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यह शिक्षा के मौलिक अधिकार से ऊपर नहीं हो सकता। कोर्ट ने चुनाव कराने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिससे प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में इस सत्र में भी छात्रसंघ चुनाव नहीं होंगे।यह मामला राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र जय राव और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर किया गया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट ने केरल विश्वविद्यालय मामले में छात्रसंघ चुनाव को मौलिक अधिकार माना है और लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुसार हर सत्र में चुनाव कराना अनिवार्य है। लगातार तीन सत्रों से चुनाव न कराने को उन्होंने छात्रों के अधिकारों का हनन बताया।हालांकि, राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष था कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के कार्यान्वयन, शैक्षणिक सत्र की व्यस्तता और कैंपस में चुनावी माहौल से पढ़ाई प्रभावित होने के कारण इस सत्र में चुनाव संभव नहीं हैं।

 कई विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भी चुनाव न कराने की सिफारिश की थी, क्योंकि चुनाव अक्सर कक्षाओं में बाधा डालते हैं और अकादमिक वातावरण खराब करते हैं।कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नवंबर में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज (19 दिसंबर 2025) सुनाए गए फैसले में जस्टिस समीर जैन ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि छात्र राजनीति महत्वपूर्ण है, लेकिन शिक्षा की प्राथमिकता सर्वोपरि है। चुनाव से जुड़ा अधिकार शिक्षा के अधिकार को कमजोर नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान परिस्थितियों में NEP लागू करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसे बाधित नहीं किया जा सकता।इस फैसले से छात्र संगठनों में निराशा है। कई छात्र नेताओं ने इसे छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश बताया है, जबकि सरकार का कहना है कि यह निर्णय अकादमिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जरूरी था। अब देखना यह है कि याचिकाकर्ता इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच या सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हैं या नहीं।फिलहाल, राजस्थान के छात्रों को अगले सत्र तक इंतजार करना पड़ सकता है, जब NEP पूरी तरह लागू हो जाए और स्थितियां अनुकूल हों। यह फैसला देश के अन्य राज्यों में भी छात्रसंघ चुनावों पर बहस को नई दिशा दे सकता है, जहां शिक्षा और राजनीति के बीच संतुलन की चर्चा जोर पकड़ रही है।

 

Basanti Parmar

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

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