जयपुर में ठाकुर गोविंद देवजी की रथयात्रा: भक्ति की लहरों में डूबा मंदिर, श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

जयपुर के गोविंद देवजी मंदिर में शुक्रवार को रथयात्रा महोत्सव भव्य रूप से मनाया गया। मंगला झांकी और अभिषेक के बाद ठाकुर जी को लाल वस्त्र व विशेष श्रृंगार धारण करवाया गया। पांच दालों का भिजौना और फलों का भोग अर्पित हुआ। गौड़ीय वैष्णव मंडली के संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय रहा। महंत अंजन कुमार गोस्वामी ने गौर गोविंद विग्रह को चांदी के रथ पर विराजित कर चार परिक्रमाएं करवाईं। धूप आरती के साथ समापन हुआ और श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आनंद प्राप्त किया

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026Sub Editor
June 27, 2025 • 12:19 PM  35
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जयपुर में ठाकुर गोविंद देवजी की रथयात्रा: भक्ति की लहरों में डूबा मंदिर, श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब
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27 Jun 2025
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जयपुर में ठाकुर गोविंद देवजी की रथयात्रा: भक्ति की लहरों में डूबा मंदिर, श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

जयपुर के प्रसिद्ध आराध्य गोविंद देवजी मंदिर में शुक्रवार को रथयात्रा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने ठाकुर गोविंद देवजी के दिव्य दर्शन कर अपने जीवन को धन्य किया।

सुबह मंगला झांकी के दर्शन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके पश्चात ठाकुर गोविंददेव जी का विधिवत अभिषेक किया गया। ठाकुर जी को नए लाल रंग के लप्पा जामा वस्त्र धारण करवाए गए और विशेष अलंकार व माला श्रृंगार से सुसज्जित किया गया। पांच प्रकार की दालों से तैयार भिजौना और पांच ऋतु फलों का भक्तिपूर्वक भोग अर्पित किया गया, जिसने समारोह की गरिमा को और बढ़ाया।

सुबह 6 बजे से गौड़ीय वैष्णव मंडली और मंदिर परिवार द्वारा मंगलाचरण और महामंत्र संकीर्तन का आयोजन किया गया। भक्तों के संकीर्तन से मंदिर का वातावरण भक्तिमय हो उठा। महोत्सव के मुख्य आकर्षण में महंत अंजन कुमार गोस्वामी ने गौर गोविंद श्री विग्रह को चांदी निर्मित रथ पर विराजित किया। रथयात्रा की शुरुआत मंदिर परिसर से हुई, जिसमें ठाकुर जी ने चार भव्य परिक्रमाएं कीं। इसके बाद गौर गोविंद विग्रह को रथ सहित गर्भगृह में पुनः विराजमान किया गया।

कार्यक्रम का समापन धूप आरती और दर्शन के साथ हुआ। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने ठाकुर जी के दर्शन कर अपार आनंद की अनुभूति की। रथयात्रा महोत्सव ने न केवल भक्ति का संदेश फैलाया, बल्कि जयपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को भी उजागर किया।

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