पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा: राजस्थान की जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रोजेक्ट्स को बंद करने पर जताई गहरी चिंता

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राजस्थान में कांग्रेस सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं (जैसे राइट टू हेल्थ, इंदिरा रसोई, चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा, स्मार्टफोन योजना आदि) को बंद या कमजोर करने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने चित्तौड़गढ़ रैली में दिए गए 'मोदी की गारंटी' की याद दिलाते हुए इन योजनाओं और विकास परियोजनाओं को मूल रूप में बहाल करने की मांग की है, साथ ही अजमेर दौरे के दौरान राज्य सरकार को निर्देश देने का आग्रह किया।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
February 26, 2026 • 7:15 PM  191
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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा: राजस्थान की जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रोजेक्ट्स को बंद करने पर जताई गहरी चिंता
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26 Feb 2026
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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा: राजस्थान की जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रोजेक्ट्स को बंद करने पर जताई गहरी चिंता

जयपुर, 25 फरवरी 2026: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 28 फरवरी को प्रस्तावित अजमेर दौरे से पहले उन्हें एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने प्रदेश की कई महत्वपूर्ण जनहितकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता जताई है तथा इनके बंद या कमजोर होने पर रोष व्यक्त किया है।

गहलोत ने पत्र में 2 अक्टूबर 2023 को चित्तौड़गढ़ में दिए गए प्रधानमंत्री के उस वादे की याद दिलाई, जिसमें कहा गया था कि भाजपा सरकार बनने पर कांग्रेस की किसी भी जनहितकारी योजना को बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें और बेहतर बनाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान राज्य सरकार ने इस वादे के ठीक उलट काम किया है। पिछले दो वर्षों में कई योजनाओं को बंद कर दिया गया है या बजट कटौती तथा शर्तों में बदलाव से उन्हें निष्प्रभावी बना दिया गया है, जिससे प्रदेश की जनता में असंतोष बढ़ा है।

पत्र में गहलोत ने प्रमुख योजनाओं और परियोजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी:

राइट टू हेल्थ: देश का पहला स्वास्थ्य का अधिकार कानून बनने के बावजूद इसके नियम लागू नहीं किए गए, जिससे मुफ्त इलाज का कानूनी अधिकार जनता को नहीं मिल पा रहा।

गिग वर्कर्स वेलफेयर एक्ट: ऑनलाइन डिलीवरी पार्टनर्स की सामाजिक सुरक्षा के लिए बनाया गया कानून लागू नहीं हुआ, बोर्ड नहीं बना और फंड का लाभ नहीं पहुंचा।

राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस: नाम बदलने के साथ लाभार्थियों की संख्या 500 से घटाकर 150 कर दी गई, जिससे मेधावी छात्रों के विदेश पढ़ाई के अवसर सीमित हो गए।

इंदिरा रसोई योजना: नाम बदलकर अन्नपूर्णा रसोई किया गया, लेकिन कुप्रबंधन से लाभार्थियों की संख्या आधी रह गई।

इंदिरा गांधी स्मार्टफोन योजना: महिलाओं के डिजिटल सशक्तिकरण वाली योजना का दूसरा चरण पूरी तरह बंद कर दिया गया।

इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना: शहरों में 125 दिनों का रोजगार देने वाली योजना का क्रियान्वयन अब लगभग शून्य है।

चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा एवं RGHS: अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स को समय पर भुगतान न होने से योजनाएं संकट में हैं।

नि:शुल्क बिजली योजना (100 यूनिट): इसे पीएम सूर्य घर योजना की जटिल शर्तों से जोड़ दिया गया, नए उपभोक्ताओं को लाभ नहीं मिल रहा।

अन्नपूर्णा राशन किट: महंगाई राहत के लिए वितरण पूरी तरह बंद।

इंदिरा गांधी क्रेडिट कार्ड योजना: बिना ब्याज के 50,000 रुपये ऋण के नए आवेदन बंद कर दिए गए।

गहलोत ने विकास परियोजनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार के समय शुरू कई परियोजनाएं अब रुकी हुई हैं या उनका उपयोग नहीं हो रहा:

जयपुर में महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज का निर्माण पूरा होने के एक वर्ष बाद भी लोकार्पण नहीं हुआ।

कोचिंग हब का निर्माण किया गया था, लेकिन कोचिंग संस्थानों को स्थानांतरित नहीं किया गया और अब इसे आईआईटी जोधपुर के रीजनल सेंटर के रूप में दे दिया गया, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ी।

सुपरस्पेशियलिटी आईपीडी टावर का काम रुक गया।

कानोता और अचरोल में सैटेलाइट अस्पतालों की घोषणा रद्द कर दी गई।

शिवदासपुरा और बालमुकुंदपुरा के अस्पताल तैयार होने के बाद भी शुरू नहीं किए गए।

जोधपुर में चौपासनी हाउसिंग बोर्ड अस्पताल, प्रताप नगर अस्पताल, डिगाड़ी अस्पताल आदि इमारतें तैयार हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं दी गईं।

राजस्थान स्टेट स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, सुमेर लाइब्रेरी और राजीव गांधी फिनटेक इंस्टीट्यूट का काम धीमा या रुका हुआ है।

कोटा में रिवर फ्रंट का रखरखाव और आगे का काम रोक दिया गया।

गहलोत ने पत्र में कहा कि ये केवल कुछ उदाहरण हैं और पूरे प्रदेश में ऐसे दर्जनों मामले हैं। उन्होंने लोकतंत्र में जनता के विश्वास को सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि 28 फरवरी को अजमेर की सभा में वे राज्य सरकार को निर्देश दें कि पूर्ववर्ती सरकार की इन योजनाओं और प्रोजेक्ट्स को मूल स्वरूप में बहाल किया जाए। इससे जनता खुद को ठगा हुआ महसूस न करे।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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