राजधानी जयपुर से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने हर मां-बाप के होश उड़ा दिए हैं। 7वीं कक्षा में पढ़ने वाली महज 12 साल की मासूम बच्ची को अपनी बातों में फंसाकर, उसके ही माता-पिता को नींद की गोलियां दिलवाई गईं और फिर देर रात अगवा कर उसके साथ घिनौनी वारदात को अंजाम दिया गया।
मासूमियत और भरोसे का फायदा उठाकर रची गई इस साजिश का खुलासा तब हुआ जब बच्ची के परिजन पुलिस के पास पहुंचे। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत संगीन धाराओं में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।
दुकान से शुरू हुई 'दोस्ती' और फिर रची खौफनाक साजिश
मिली जानकारी के मुताबिक, 12 वर्षीय पीड़िता अक्सर घर के पास स्थित एक दुकान से राशन और दैनिक जरूरत का सामान लेने जाती थी। इसी दौरान दुकान पर मौजूद युवक ने उससे मेलजोल बढ़ाया और उसे अपनी बातों के जाल में फंसा लिया।
3 जून की शाम को जब बच्ची हमेशा की तरह दुकान पर पहुंची, तो आरोपी ने उसे नींद की गोलियां थमा दीं। उसने मासूम को झांसा दिया कि इन गोलियों को रात में माता-पिता के खाने में मिला दे ताकि वे सो जाएं। नादान बच्ची आरोपी की बातों को समझ नहीं पाई और उसने वैसा ही किया जैसा उसे कहा गया था।
रात के अंधेरे में अपहरण, मंदिर में शादी और फिर हैवानियत
रात को नींद की गोलियां मिला खाना खाने के बाद माता-पिता बेसुध होकर सो गए। इसी का फायदा उठाकर आरोपी ने देर रात बच्ची को घर के बाहर बुलाया और शादी का झांसा देकर अपनी बाइक पर बैठा लिया।
शातिर आरोपी मासूम को जयपुर से सीधे सवाई माधोपुर के खंडार इलाके में ले गया। वहां एक स्थानीय मंदिर में उसने ढोंग रचते हुए बच्ची से शादी का नाटक किया। इसके बाद आरोपी उसे पास के ही एक होटल में ले गया, जहां उसने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया।
सुबह जब खुली परिजनों की नींद, उड़े होश
अगली सुबह जब माता-पिता की नींद खुली तो बच्ची घर पर गायब थी। बदहवास परिजनों ने आसपास खोजबीन शुरू की। बाद में जब बच्ची मिली और उसने पूरी आपबीती सुनाई, तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
मामला थाने पहुंचने के बाद पुलिस तुरंत एक्शन में आई। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया गया और उसके बयानों के आधार पर पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) में मामला दर्ज कर आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया गया।
बड़ा सवाल: आखिर होटल प्रबंधकों और सिस्टम पर कब उठेगी उंगली?
पुलिस ने मुख्य आरोपी को तो गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर और अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं:
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12 साल की नाबालिग बच्ची को होटल में कमरा कैसे मिला? क्या होटल प्रबंधन ने पहचान पत्र (ID) जांचने की जहमत नहीं उठाई?
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क्या इस साजिश में आरोपी के साथ कोई और भी शामिल था, जिसने बिना डॉक्टर के पर्चे के इतनी गंभीर नींद की गोलियां मुहैया कराईं?
फिलहाल पुलिस होटल स्टाफ और गोलियां देने वाले मेडिकल स्टोर की भूमिका की भी जांच कर रही है। यह मामला हर उस अभिभावक के लिए एक बड़ी चेतावनी है, जिनके बच्चे रोजाना आसपास की दुकानों या पड़ोस में बेझिझक आते-जाते हैं।