सुप्रीम कोर्ट को मिले 5 नए जज, राष्ट्रपति मुर्मू ने दी मंजूरी; न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हुई

सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कॉलेजियम की सिफारिश पर मुहर लगाते हुए नियुक्तियों को मंजूरी दी। इनमें चार हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं। इसके साथ ही शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026Sub Editor
June 1, 2026 • 5:20 PM  20
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सुप्रीम कोर्ट को मिले 5 नए जज, राष्ट्रपति मुर्मू ने दी मंजूरी; न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हुई
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सुप्रीम कोर्ट को मिले 5 नए जज, राष्ट्रपति मुर्मू ने दी मंजूरी; न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हुई

देश की सर्वोच्च अदालत में न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की सिफारिश के बाद इन नियुक्तियों को अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने सोमवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी।

इन नई नियुक्तियों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है, जो हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत विस्तार योजना का हिस्सा है।

किन पांच हस्तियों को मिली जिम्मेदारी?

सुप्रीम Court में नियुक्त किए गए पांच नए न्यायाधीशों में देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं। इनमें बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रशेखर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली शामिल हैं।

इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता वी. सुब्रमणि मोहना को भी सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति विशेष रूप से चर्चा में है क्योंकि वे सीधे अधिवक्ता से सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बनने वाली चुनिंदा कानूनी हस्तियों में शामिल हो गई हैं।

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने दी जानकारी

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इन नियुक्तियों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद इन पांचों नामों को मंजूरी दी है।

मेघवाल ने सभी नए न्यायाधीशों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति न्यायपालिका को और अधिक मजबूत बनाएगी।

वी. सुब्रमणि मोहना की नियुक्ति क्यों खास?

वरिष्ठ अधिवक्ता वी. सुब्रमणि मोहना की नियुक्ति कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है। वह ऐसे परिवार से आती हैं, जिसका कानून के पेशे से कोई सीधा संबंध नहीं रहा। उन्होंने वर्ष 1983 में शुरू हुए भारत के पहले पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम के शुरुआती बैच में कोयंबटूर के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में अध्ययन किया था।

लंबे समय तक कानूनी क्षेत्र में सक्रिय रहने के बाद अब उन्हें देश की सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीश बनने का अवसर मिला है।

क्यों बढ़ाई गई जजों की संख्या?

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। सरकार का मानना है कि बढ़ते मामलों के बोझ और लंबित मुकदमों को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना आवश्यक है।

सरकार आगामी संसद सत्र में इससे संबंधित विधेयक पेश करेगी, जिसके बाद वर्ष 1956 के संबंधित कानून में संशोधन किया जाएगा। संविधान के अनुच्छेद 124(1) के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित करने का अधिकार संसद के पास है।

लंबित मामलों के निपटारे में मिलेगी मदद

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से शीर्ष अदालत में लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी और आम लोगों को न्याय मिलने में लगने वाला समय भी कम हो सकेगा।

नई नियुक्तियों को न्यायपालिका में क्षमता विस्तार और न्याय वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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