परवाही बरती, जिससे सड़क किनारे से गुजर रहे एक मासूम बच्चे को जोरदार धक्का लग गया। बच्चा बस के नीचे आ गया और उसका सिर बुरी तरह चोटिल हो गया।पीड़ित बच्चे का नाम हिम्मत सिंह है, जो जगदीश सिंह का 11 वर्षीय पुत्र था। हिम्मत डाबड़वास गांव का निवासी था और स्थानीय सरकारी स्कूल में कक्षा 5 का छात्र था। सुबह के समय वह घर का सामान लेने पास की एक दुकान की ओर जा रहा था। वह स्कूल के समय से थोड़ा पहले निकला था, ताकि दुकान से सामान लेकर समय पर क्लास पहुंच सके। लेकिन किस्मत में कुछ और ही लिखा था। बस के चालक ने गति नियंत्रण में चूक की, जिससे हिम्मत सीधे बस के आगे आ गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बच्चा सड़क पर गिर पड़ा और उसका सिर जमीन पर लगने से गंभीर चोटें आईं।
ग्रामीणों की तत्परता और अस्पताल पहुंचे; हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण दौड़ पड़े। उन्होंने घायल बच्चे को तुरंत नजदीकी माँढण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने बच्चे की जांच की, लेकिन सिर की गंभीर चोटों के कारण हिम्मत को बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दौरान ग्रामीणों ने माँढण थाने की पुलिस को सूचना दी, जो कुछ ही मिनटों में घटनास्थल पर पहुंच गई।पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की। जांच में पता चला कि बस चालक ने लापरवाही से वाहन चलाया था और बच्चों को चढ़ाने के दौरान सड़क पर ध्यान नहीं दिया। बस में उस समय करीब 20-25 स्कूली बच्चे सवार थे, जो हादसे से बाल-बाल बच गए। कोई अन्य हताहत नहीं हुआ, लेकिन बच्चे डर के मारे रो रहे थे।
पुलिस कार्रवाई: बस जब्त, ड्राइवर हिरासत में माँढण पुलिस ने हादसे के तुरंत बाद बस को जब्त कर लिया गया है। बस चालक को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 304ए (लापरवाही से मौत का कारण बनना), 279 (लापरवाही से वाहन चलाना) और मोटर व्हीकल एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने चालक के बयान दर्ज किए हैं, जिसमें वह अपनी लापरवाही को स्वीकार कर चुका है। आगे की जांच में बस के दस्तावेज, ड्राइवर का लाइसेंस और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी जांचा जाएगा।ट्रैफिक पुलिस ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और सड़क की स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक जांच में सड़क पर कोई तकनीकी खराबी नहीं पाई गई, बल्कि यह पूरी तरह चालक की लापरवाही का मामला लग रहा है।
परिवार और ग्रामीणों का शोक; हिम्मत सिंह के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। उसके पिता जगदीश सिंह एक किसान हैं, जबकि मां घर संभालती हैं। पिता जगदीश ने बताया, "मेरा बेटा सुबह ही घर से निकला था। वह हमेशा समय पर स्कूल जाता था और पढ़ाई में होशियार था। बस चालक ने क्या सोचकर इतनी तेजी से बस दौड़ाई?" परिवार ने मांग की है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए और मुआवजे की व्यवस्था हो।गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों ने स्कूल प्रशासन पर भी सवाल उठाए कि बस चालकों की ट्रेनिंग और वाहनों की जांच की व्यवस्था क्यों ढीली है।