24 नवंबर तक रहेंगे व्रत-त्योहार, जानें दीपावली-छठ सहित सभी प्रमुख तिथियां और पूजा विधि
हिंदू पंचांग का पवित्र कार्तिक महीना शुरू हो चुका है, जो 24 नवंबर तक चलेगा। इस माह में करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और छठ जैसे बड़े त्योहार मनाए जाएंगे। जानें कार्तिक मास में पूजा-पाठ, स्नान-दान का महत्व और व्रत-त्योहारों की पूरी सूची।



हिन्दू पंचांग का आठवां और बेहद पवित्र माना जाने वाला कार्तिक महीना शुरू हो चुका है। यह मास 24 नवंबर तक चलेगा। आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से इस महीने का विशेष महत्व है, क्योंकि इसमें करवा चौथ से लेकर देव दीपावली तक कई प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। इस पूरे महीने में पवित्र नदियों में स्नान, तुलसी पूजा, दीपदान और जरूरतमंदों को दान-पुण्य करने की प्राचीन परंपरा है।
इन देवी-देवताओं की होती है विशेष पूजा
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, कार्तिक मास में आराधना और साधना का विशेष फल मिलता है। इस दौरान भगवान गणेश, कार्तिकेय, धन्वंतरि, यमराज, माता महालक्ष्मी, भगवान विष्णु, गोवर्धन पर्वत, छठ माता और सूर्य देव की विशेष रूप से पूजा की जाती है। इसके अलावा, इस महीने में तुलसी के साथ-साथ पीपल और आंवले के पेड़ की पूजा करना भी बहुत शुभ माना गया है।
कार्तिक मास के प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची
29 अक्टूबर - करवा चौथ
5 नवंबर - रमा एकादशी
6 नवंबर - धनतेरस
7 नवंबर - नरक चतुर्दशी
8 नवंबर - दीपावली
9 नवंबर - कार्तिक अमावस्या
10 नवंबर - गोवर्धन पूजा
11 नवंबर - भाई दूज
15 नवंबर - छठ पूजा
20 नवंबर - देवउठनी एकादशी
24 नवंबर - कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली
तीर्थ स्नान, दीपदान और परिक्रमा का महत्व
कार्तिक मास में गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा और कावेरी जैसी पवित्र नदियों में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दीपदान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। गोवर्धन पूजा के अवसर पर मथुरा, वृंदावन और गोकुल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जहां गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा कर भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। भाई दूज के दिन यमुना नदी में स्नान और यमराज की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। महीने के अंतिम दिन यानी 24 नवंबर (कार्तिक पूर्णिमा) को काशी के घाटों पर दीप जलाकर देव दीपावली का भव्य उत्सव मनाया जाता है।
बदलते मौसम में रखें सेहत का ध्यान
कार्तिक महीने से मौसम में बदलाव होने लगता है और ठंड बढ़ने लगती है। ऐसे में आध्यात्मिक दिनचर्या के साथ-साथ सेहत पर ध्यान देना भी जरूरी है। सुबह जल्दी उठकर योग-प्राणायाम, ध्यान और मंत्रों का जप करने से मानसिक व शारीरिक शांति मिलती है। ठंड के मौसम के अनुकूल कपड़े पहनने, पौष्टिक आहार लेने और पर्याप्त आराम करने से स्वास्थ्य बेहतर रहता है।













































